ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) झारखंड राज्य की एक राजनीतिक पार्टी है. आजसू पार्टी की स्थापना 22 जून 1986 को ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (All Jharkhand Students Union) की तर्ज पर की गई थी. आजसू के संस्थापकों का झारखंड की पिछली राजनीतिक पार्टियों से मोहभंग हो गया था और वे और अधिक उग्र आंदोलन चाहते थे. आजसू ने 1989 में आम हड़ताल और लोकसभा चुनावों का बहिष्कार करने के लिए एक अभियान चलाया. हालांकि 1990 तक आजसू ने व्यावहारिक रुख अपनाते हुए राजनाति में आगे बढ़ा. बिहार राज्य विधानसभा चुनाव के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रतीक पर उम्मीदवार थे. आज आजसू (AJSU) अपने नाम से चुनाव लड़ती है.
JLKM vs AJSU in Jharkhand Polls: जेएलकेएम ने राज्य की 71 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे और उसे जीत सिर्फ एक सीट पर मिली. लेकिन उसने कम से कम 14 सीटों पर चुनाव परिणाम प्रभावित किया, जिसका बड़े पैमाने पर इंडिया ब्लॉक को फायदा हुआ. दूसरी ओर, कुर्मी समुदाय (ओबीसी) का प्रतिनिधि होने का दावा करने वाली ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU) पार्टी ने भाजपा के साथ गठबंधन में 10 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 231 वोटों के मामूली अंतर से केवल एक सीट जीतने में सफल रही.
निर्वाचन आयोग ने एक बयान में कहा है कि कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा से मिली शिकायत के बाद बीजेपी द्वारा शेयर वीडियो का अवलोकन करने से ऐसा प्रतीत होता है कि प्रथम दृष्टया यह आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करता है.
झारखंड के रामगढ़ की हॉट सीट पर चुनावी हवा तेज हो चली है. इस सीट को पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के प्रतिनिधित्व के लिए जाना जाता है. रामगढ़ के प्रत्याशी चंद्रप्रकाश चौधरी ने विशेष रूप से आजतक से बातचीत करते हुए यहां के कई मुख्य मुद्दों पर चर्चा की. देखें...
महाराष्ट्र की 288 और झारखंड की 38 सीटों के लिए मंगलवार को नामांकन समाप्त हो गया. दोनों राज्यों को मिलाकर 8 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया. महाराष्ट्र में जहां एक ही चरण में चुनाव है, वहीं झारखंड में दो चरणों में 13 और 20 नवंबर को मतदान है. वोटों की गिनती 23 नवंबर को है.
Jharkhand Vidhan Sabha Chunav 2024: झारखंड में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है. सूबे में पिछली बार पांच चरणों में चुनाव हुए थे, लेकिन इस बार राज्य में दो चरणों में मतदान होगा. 2024 के झारखंड चुनाव में 2019 के मुकाबले क्या अलग होगा? आइए जानते हैं.
झारखंड में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच सियासी सरगर्मियां बढ़ गई हैं. बीजेपी के सामने लोकसभा चुनाव में जेएमएम के आदिवासी अस्मिता वाले दांव से निपटने की चुनौती है. सीएम हेमंत की गिरफ्तारी को आदिवासी अस्मिता से जोड़ने की जेएमएम की रणनीति से बीजेपी कैसे निपटेगी?
झारखंड आवास बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि बोर्ड ने इसके पहले भी हरमू, अरगोड़ा और बरियातु आवासीय कॉलोनी में मकान, फ्लैट का व्यवसायिक, अवैध इस्तेमाल करने वालों को नोटिस दे चुकी है. बीजेपी और आजसू को भी नोटिस भेजा गया था.
ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU) ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. आजसू ने आने वाले 100 दिनों के लिए विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार कर ली है. उन्होंने आजतक से खास बातचीत में कहा कि वो NDA का हिस्सा थे और आगे भी एनडीए का हिस्सा रहेंगे, लेकिन विधानसभा चुनावों में खुद को किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रखना चाहती है.