अंटार्कटिका
अंटार्कटिका (Antarctica) पृथ्वी का सबसे दक्षिणी महाद्वीप है (Southernmost Continent). यह अंटार्कटिक सर्कल के दक्षिण में स्थित है और दक्षिणी महासागर (Southern Ocean) से घिरा हुआ है. अंटार्कटिका में मौजूद गोमेद नदी (Gomed River) सबसे लंबी नही है (Longest River). अंटार्कटिका 5वां सबसे बड़ा महाद्वीप है (fifth-largest continent), और इसका क्षेत्रफल 1,42,44,934 वर्ग किलोमीटर है. अंटार्कटिका का अधिकांश भाग बर्फ से ढका है, जिसकी औसत मोटाई 1.9 किमी (1.2 मील) है (Antarctica Geographical Location).
अंटार्कटिका, महाद्वीपों में सबसे ठंडा, सबसे शुष्क और तेज हवा वाला स्थान है (Coldest Continent), साथ ही इसकी औसत ऊंचाई सबसे अधिक है. यहां दुनिया के मीठे पानी के भंडार का लगभग 70% हिस्सा पानी जमा हुआ है (Sweet Water in Antarctica ). अंटार्कटिका में पृथ्वी पर सबसे कम मापा गया तापमान −89.2 °C (−128.6 °F) का रिकॉर्ड है (Antarctica Temperature). यहां जानवरों की मूल प्रजातियों में घुन, नेमाटोड, पेंगुइन, सील और टार्डिग्रेड पाए जाते हैं (Antarctica Animals). यहां टुंड्रा नामक वनस्पति पाया जाता है (Antarctica Vegetation).
अंटार्कटिका को रॉस सागर (Ross Sea) और वेडेल सागर (Weddell Sea) के बीच, Transantarctic Mountains द्वारा दो भागों में विभाजित किया गया है. वेडेल सागर के पश्चिम और रॉस सागर के पूर्व के हिस्से को पश्चिमी अंटार्कटिका (West Antarctica) और शेष पूर्वी अंटार्कटिका कहा जाता है (East Antarctica).
अंटार्कटिका महाद्वीप का पता 1820 के आसपास चला, जब रूस के फैबियन गॉटलिब वॉन बेलिंग्सहॉसन (Fabian Gottlieb von Bellingshausen) और मिखाइल लाजरेव (Mikhail Lazarev) ने फिम्बुल बर्फ शेल्फ (Fimbul ice shelf) को देखा था. इस महाद्वीप की खोज जनवरी 1840 में यूनाइटेड स्टेट्स एक्सप्लोरेशन एक्सपेडिशन द्वारा लेफ्टिनेंट चार्ल्स विल्क्स के अधीन की गई थी. इस महाद्वीप पर पहली लैंडिंग की पुष्टि 1895 में नॉर्वेजियन टीम ने की थी. 1996 में रूस के वोस्तोक स्टेशन के नीचे खोजी गई वोस्तोक झील (Vostok Lake), दुनिया की सबसे बड़ी उप-हिमनद झीलों में से एक है. अंटार्कटिका में कई खारे और मीठे पानी की झीलें हैं (Antarctica Sweet Lakes).
गर्मियों के महीनों के दौरान 5,000 लोग यहां के अनुसंधान केंद्रों में रहते हैं. यह आंकड़ा सर्दियों में कम होकर लगभग 1,000 रह जाता है (Antarctica Population). 1959 की अंटार्कटिक संधि के मुताबिक यह महाद्वीप लगभग 30 देशों द्वारा शासित है. संधि की शर्तों के अनुसार यहां सैन्य गतिविधि (Military activity), खनन (Mining), परमाणु विस्फोट (Nuclear explosions) और परमाणु कचरा (Nuclear Waste) प्रतिबंधित हैं (Prohibited activity in Antarctica).
हरियाणा के रेवाड़ी जिले के पर्वतारोही नरेंद्र सिंह यादव ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की. उन्होंने 25 दिसंबर को अंटार्कटिका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी विन्सन मैसिफ पर तिरंगा लहराया. इस अभियान के दौरान तापमान -52°C तक था. बेस कैंप से चढ़ाई पूरी करने में उन्हें छह दिन लगे. VIDEO
वैज्ञानिक कई बार बता चुके हैं कि 2050 तक दुनिया के कई देश, द्वीप और भारत के कम से कम 13 तटीय शहर समंदर में डूबेंगे. कम से कम एक बड़ा हिस्सा तो डूब ही जाएगा. इसी का पता करने के लिए NASA ने अंटार्कटिका में अंडरवाटर रोबोट्स डाले हैं. ताकि समंदर और उसके जलस्तर में हो रहे बदलावों की स्टडी की जा सके.
अंटार्कटिका के एक ग्लेशियर से लाल रंग का एक रहस्यमयी झरना बहता है. इसे अंटार्कटिका का खूनी झरना कहते हैं. लाल रंग के इस रहस्यमयी बहाव से वैज्ञानिक हैरान हैं. ये जगह लाखों सालों से यहां मौजूद है और इसे 112 साल पहले खोजा गया था. आइए जानते हैं कि एक ग्लेशियर की जीभ का शुरुआती हिस्सा खून से सना हुआ क्यों है.
अंटार्कटिका के एक ग्लेशियर से लाल रंग का एक रहस्यमयी झरना बहता है. इसे अंटार्कटिका का खूनी झरना कहते हैं. लाल रंग के इस रहस्यमयी बहाव से वैज्ञानिक हैरान हैं. ये जगह लाखों सालों से यहां मौजूद है और इसे 112 साल पहले खोजा गया था. आइए जानते हैं कि एक ग्लेशियर की जीभ का शुरुआती हिस्सा खून से सना हुआ क्यों है.
भारत 46वें अंटार्कटिक संसद की मेजबानी कर रहा है. 30 मई तक चलने वाली इस बैठक में बर्फीले महाद्वीप से जुड़े कई मुद्दों पर बात होगी. जानिए इसके बारे में सबकुछ.
भारत 46वें अंटार्कटिक संसद की मेजबानी कर रहा है. 30 मई तक चलने वाली इस बैठक में बर्फीले महाद्वीप से जुड़े कई मुद्दों पर बात होगी. फिलहाल वैज्ञानिक परेशान हैं क्योंकि अंटार्कटिक महासागर के भीतर धाराएं कमजोर पड़ रही हैं. डर जताया जा रहा है कि साल 2050 तक ये बहाव इतना कम हो जाएगा कि सांस लेने के लिए ऑक्सीजन घटने लगेगी.
दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला से एक डराने वाली खबर आई है. छह ग्लेशियर वाले इस देश में आखिरी ग्लेशियर हम्बोल्ट पिघलकर इतना छोटा हो चुका कि वैज्ञानिक इसे बर्फ का मैदान कह रहे हैं. आशंका है कि इसके बाद कई और देशों का नंबर है. वैज्ञानिक मानते हैं कि अगर ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका के ग्लेशियर पिघल जाएं तो धरती का बड़ा हिस्सा समुद्र में समा जाएगा.
पिछले साल इतनी गर्मी बढ़ी कि अंटार्कटिका में लाखों एंपरर पेंग्विन बच्चे मारे गए. जब तक उनके वाटरप्रूफ पंख निकलते, तब तक ठंडी ने उनकी जान ले ली. वैज्ञानिकों की आशंका है कि इस सदी के अंत तक दुनिया के सबसे बड़े एंपरर पेंग्विंस की प्रजाति 99 फीसदी खत्म हो जाएगी.
पिघलती बर्फ से सिर्फ समंदर में पानी नहीं बढ़ता, बल्कि पूरे दिन का समय बदल जाता है. इससे पूरे साल का समय भी प्रभावित होता है. एक हैरान करने वाली साइंटिफिक स्टडी में इस बात का खुलासा किया गया है. आइए जानते हैं कि कैसे ध्रुवों पर पिघलती बर्फ हमारे दिन के समय को बदल रही है?
सामने आई गूगल मैप की तस्वीर के अनुसार अंटार्कटिका के एक सुदूर द्वीप के किनारे पर कुछ रहस्यमयी दिखा है जो दुर्घटनाग्रस्त एलियन अंतरिक्ष यान जैसा दिखता है. अनुमान लगाया गया है कि ये लगभग 12 मीटर डायमीटर का कुछ गोलाकार सा है.
सोशल मीडिया पर इन दिनों अंटार्कटिका का एक वीडियो वायरल हुआ है जो शानदार है. वीडियो में एक शख्स कमरे से निकलकर बाहर का नज़ारा दिखा रहा है.
अंटार्कटिका के टेलर ग्लेशियर से एक खूनी झरना बहता है. रहस्यमयी लाल रंग निकलता है. इसे अंटार्कटिका का खूनी झरना कहते हैं. 112 साल पहले खोजे गए इस जगह के रहस्य का खुलासा अब हुआ है. आखिर क्यों एक ग्लेशियर की जीभ का शुरुआती हिस्सा खून से सना हुआ है.
पेरिस और स्विटजरलैंड जैसी जगहों पर घूमने की जगह अब लोग दुनिया के सबसे आखिरी छोर पर जा रहे हैं. साल 2019 से एक साल के भीतर 74 हजार से ज्यादा टूरिस्ट अंटार्कटिका घूमने गए. कई ट्रैवल कंपनियां काफी ऊंची कीमत पर लोगों को वहां ले जाती हैं. लेकिन कुछ लोगों के सैर-सपाटे का ये शौक पूरे महाद्वीप पर भारी पड़ रहा है.
अंटार्कटिक महासागर के भीतर धाराएं कमजोर पड़ रही हैं. वैज्ञानिक अनुमान लगा रहे हैं कि साल 2050 तक इनका बहाव 40% तक कम हो जाएगा. इससे क्या फर्क पड़ेगा? तब ये होगा कि दुनिया के सारे समुद्रों का प्रवाह कमजोर पड़ जाएगा, और उनमें ऑक्सीजन भी कम होने लगेगी. यानी समुद्र एक तरह का गहरा दलदल बन जाएगा. इसका असर इंसानों पर भी होगा.
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर इंसान धरती के बढ़ते तापमान को 2 डिग्री सेल्सियस पर रोक भी दे, तो भी दोनों ध्रुवों पर खतरा कम नहीं होगा. अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड पर तेजी से पिघलने वाली बर्फ को वापस जमाया नहीं जा सकेगा.
अंटार्कटिका (Antarctica) और ग्रीनलैंड (Greenland) ... यानी दोनों ध्रुवों पर खतरा मंडरा रहा है. यानी सिर्फ यहां की बर्फ ही नहीं पिघलेगी, इससे पृथ्वी पर बड़ी आबादी विस्थापित होगी. मतलब ये कि तटों पर रहने वाले लोग ऊंचाई वाले इलाकों की तरफ खिसकेंगे. अंटार्कटिका में तो बर्फ पिघलने का पिछले 45 साल का रिकॉर्ड टूट गया है.
एक दिन में 20 लाख वर्ग KM पिघली अंटार्कटिका के नीचे की बर्फ, जानिए क्यों है खतरनाक?
नेशनल स्नो एंड आइस डेटा सेंटर ने बताया है कि 13 फरवरी को अंटार्कटिका में 19 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा की बर्फ पिघल गई. ये पिछले रिकॉर्ड से थोड़ा ही कम है. पिछले साल 25 फरवरी को 19.2 लाख वर्ग किमी की बर्फ पिघल गई थी. जानें अंटार्कटिका में बर्फ का पिघलना कितना खतरनाक हो सकता है.
चीन अंटार्कटिका में दो ग्राउंड स्टेशन बनाने जा रहा है. दावा है कि इससे उसके स्पेस मिशन को सपोर्ट मिलेगा. लेकिन पूरी दुनिया को डर है कि चीन इन ग्राउंड स्टेशन से जासूसी करेगा. चीन के स्पेस पावर बनने से भारत, अमेरिका और कई यूरोपीय देश परेशान हैं. चीन लगातार जासूसी सैटेलाइट्स छोड़ रहा है.
अंटार्कटिका के उत्तर-पश्चिम में स्थित चास्म-1 हिमखंड टूटकर अलग हो गया है. अब वो खुले समुद्र में तैरने के लिए तैयार है. ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे (BAS) ने बताया कि यह हिमखंड यानी आइसबर्ग अपनी प्राकृतिक प्रक्रिया यानी काल्विंग (Calving) की वजह से टूटा है. न कि जलवायु परिवर्तन या ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से.
अंटार्कटिका के उत्तर-पश्चिम इलाके से एक बड़ा हिमखंड टूट गया है. इसका आकार ग्रेटर लंदन के बराबर है. डरावनी बात ये है कि जहां से ये आइसबर्ग टूटा है, उसके पास ही रिसर्च स्टेशन है. पिछले दो साल में यह दूसरी ऐसी घटना है जब अंटार्कटिका से इतना बड़ा बर्फ का पहाड़ टूटा है.