आर्कटिक महासागर
आर्कटिक महासागर (Arctic Ocean) दुनिया के पांच प्रमुख महासागरों में सबसे छोटा और उथला है (Arctic Ocean Smallest and Shallowest). यह लगभग 14,060,000 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला है (Arctic Ocean Area). यह सभी महासागरों में सबसे ठंडा है (Coldest Ocean). अंतर्राष्ट्रीय जल सर्वेक्षण संगठन (IHO) इसे एक महासागर के रूप में मान्यता देता है, हालांकि कुछ समुद्र विज्ञानी इसे आर्कटिक भूमध्य सागर कहते हैं. इसे विश्व महासागर के सबसे उत्तरी भाग के रूप में भी देखा जाता है.
आर्कटिक महासागर में उत्तरी गोलार्ध के मध्य में उत्तरी ध्रुव क्षेत्र शामिल है और यह दक्षिण में लगभग 60° N तक फैला हुआ है. आर्कटिक महासागर यूरेशिया और उत्तरी अमेरिका से घिरा हुआ है. इसकी सीमाएं प्रशांत की ओर बेरिंग जलडमरूमध्य और अटलांटिक की ओर ग्रीनलैंड स्कॉटलैंड रिज से लगती हैं. यह ज्यादातर साल भर समुद्री बर्फ से ढका रहता है (Arctic Ocean Location). कम वाष्पीकरण, नदियों और नालों से भारी ताजे पानी के प्रवाह और सीमित कनेक्शन के कारण इसकी लवणता पांच प्रमुख महासागरों के औसत से सबसे कम है (Arctic Ocean Salinity).
आर्कटिक में गर्मियों में बर्फ के सिकुड़ने की दर 50% बताई गई है. सितंबर 2012 में, आर्कटिक बर्फ की सीमा न्यूनतम नए रिकॉर्ड पर पहुंच गई थी. इसमें औसत सीमा (1979-2000) की तुलना में, समुद्री बर्फ में 49% की कमी आई थी (Arctic Ocean Ice Extent).
आर्कटिक महासागर मोटे तौर पर वृत्ताकार बेसिन में फैला है. यह लगभग 1,40,56,000 वर्ग किमी के क्षेत्र को कवर करता है (Arctic Ocean Area). इसका समुद्र तट 45,390 किमी लंबा है. यह रूस से छोटा एकमात्र महासागर है. यह यूरेशिया, उत्तरी अमेरिका और आइसलैंड की भूमि से घिरा हुआ है. इसे आम तौर पर बाफिन बे, बैरेंट्स सी, ब्यूफोर्ट सी, चुच्ची सी, ईस्ट साइबेरियन सी, ग्रीनलैंड सी, आइसलैंड सी, नॉर्वेजियन सी, हडसन बे, हडसन स्ट्रेट, कारा सी, लापटेव सी, व्हाइट सी और अन्य सहायक नदियों के पानी को शामिल करने के लिए लिया जाता है. यह बेरिंग जलडमरूमध्य द्वारा प्रशांत महासागर से और ग्रीनलैंड सागर और लैब्राडोर सागर के माध्यम से अटलांटिक महासागर से जुड़ा हुआ है. आर्कटिक महासागर की सीमा वाले देश रूस, नॉर्वे, आइसलैंड, ग्रीनलैंड (डेनमार्क राज्य का क्षेत्र), कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका हैं (Arctic Ocean Geography).
आर्कटिक महासागर से पहला आइस फ्री डे साल 2027 में होने की आशंका जताई जा रही है. यह स्टडी हाल ही में सामने आई है. आर्कटिक की बर्फ अप्रत्याशित दर से पिघल रही है. हर दस साल में 12 फीसदी की दर से.वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले तीन साल में इस इलाके से बर्फ लगभग खत्म हो जाएगी.
एक बेहद डरावनी स्टडी सामने आई है. जिसमें कहा गया है कि आर्कटिक सागर से तीन साल में बर्फ खत्म हो जाएगी. ऐसे ही गर्मी बढ़ती रही तो उस इलाके के जीवों के लिए खतरा बढ़ेगा. जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा. जानिए कितनी खतरनाक बातें कहीं गई हैं इस रिपोर्ट में...
पिघलती बर्फ से सिर्फ समंदर में पानी नहीं बढ़ता, बल्कि पूरे दिन का समय बदल जाता है. इससे पूरे साल का समय भी प्रभावित होता है. एक हैरान करने वाली साइंटिफिक स्टडी में इस बात का खुलासा किया गया है. आइए जानते हैं कि कैसे ध्रुवों पर पिघलती बर्फ हमारे दिन के समय को बदल रही है?
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आर्कटिक महासागर में तापमान माइनस 8 से नीचे जाने पर अकसर कमल के फूल जैसी बर्फ की आकृति बन जाती है. जिन्हें लोग बर्फ कमल भी कह देते हैं. हालांकि बर्फ कमल कोई शब्द नहीं होता, असल में इन फूलों को फ्रॉस्ट फ्लावर, आइस फ्लावर या सी आइस कहते हैं. देखें वीडियो.
यहां दिख रही तस्वीर में आपको कमल जैसे फूल दिख रहे हैं. ये कमल नहीं बल्कि 'बर्फ कमल' हैं. ये आर्कटिक सागर में उगते हैं. वो खास दिनों के दौरान जब तापमान बेहद उपयुक्त होता है. आइए जानते हैं कि ये फूल कैसे बनते हैं. इनके पीछे का साइंस क्या है?
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