अरवल्ली
अरवल्ली (Arvalli) भारत के राज्य गुजरात (Gujarat) का एक जिला है और इसका मुख्यालय मोडासा (Modasa) है. इस जिले का क्षेत्रफल 3,308 वर्ग किलोमीटर है (Geographical Area).
अरवल्ली जिले में 3 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं (Assembly constituency).
जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक अरवल्ली की जनसंख्या (Population) 10 लाख से ज्यादा है. इस जिले का लिंग अनुपात (Sex Ratio) 953 है और इस की 75.84 फीसदी जनसंख्या साक्षर है (Banaskantha literacy).
अरवल्ली जिला उत्तर पूर्वी गुजरात क्षेत्र के अंतर्गत आता है इसका कुछ भाग राजस्थान की सीमाओं से मिलता है. इसके उत्तर में साबरकांठा जिला, दक्षिण में महिसागर जिला, दक्षिण पश्चिम में खेड़ा जिला और पश्चिम में गांधीनगर जिला है (Arvalli geographical location).
इस जिले का निर्माण 13 अगस्त 2013 को हुआ और ये गुजरात राज्य का 29वां जिला बना, पहले ये साबरकांठा जिले का हिस्सा था, (Arvalli district formation) इस भूभाग में भील समेत अन्य आदिवासियों का बाहुल्य होने का कारण सरकार को इसके नियम और नीतियां बनाने के लिए इसे एक जिले का रूप देना पड़ा. अरवल्ली जिले का नाम इसकी भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए अवरावली की पहाड़ियों (Aravali Hills) के नाम पर रखा गया.
अरवल्ली जिले में एक पटाखा फैक्ट्री में भीषण आग लग गई है. इस दर्दनाक हादसे में चार मजदूर जिंदा जल गए हैं. पांच मजदूरों को बचा लिया गया है. आग ने इतना विकराल रूप ले लिया है कि पांच किलोमीटर दूर से धुआं दिखाई दे रहा है. फायर ब्रिगेड की टीम बचाव कार्य में जुटी हुई है.
Gujarat Vidhansabha Election 2022: वर्तमान में कांग्रेस के राजेंद्रसिंह ठाकोर मोदासा के विधायक हैं. वह इस सीट पर दो बार चुने गए हैं. साल 2017 के विधानसभा चुनाव के नतीजे दिलचस्प थे. उस चुनाव में राजेंद्र सिंह ठाकोर को 83 हजार 411 वोट मिले थे. जबकि बीजेपी प्रत्याशी परमार भीखूसिंहजी को 81 हजार 771 वोट मिले थे.
गुजरात में अरवल्ली जिले की भिलोडा विधानसभा सीट पर कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए हुए है. भिलोडा निर्वाचन क्षेत्र में कुल 3 लाख 9 हजार 982 मतदाता हैं. जिनमें 1 लाख 57 हजार 229 पुरुष, 1 लाख 52 हजार 738 महिला मतदाता और 15 अन्य मतदाता हैं. जहां तक जातिगत समीकरण का सवाल है भिलोडा मेघरज तहसील में आदिवासी समुदाय की आबादी अधिक है.
Gujarat Vidhansabha Chunav: बायड विधानसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रही है. पिछले विधानसभा चुनाव में धवलसिंह झाला ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थामा था. लेकिन इसके बाद हुए उपचुनाव में जनता ने उनको आशीर्वाद नहीं दिया. अभी तक BJP ने यह सीट केवल 3 बार जीती है. इसमें 1990, 1998 और 2007 के विधानसभा चुनाव शामिल हैं.