आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया-ASI, एक भारतीय सरकारी एजेंसी है जो पुरातात्विक अनुसंधान और देश में सांस्कृतिक ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार है. इसकी स्थापना 1861 में अलेक्जेंडर कनिंघम ने की थी और इसके पहले महानिदेशक भी थें. इसका मुख्यालय नई दिल्ली- New Delhi में स्थित है. एएसआई के वर्तमान महानिदेशक आईएएस, वी विद्यावती हैं.
एएसआई का नेतृत्व एक महानिदेशक करता है जिसकी सहायता के लिए एक अतिरिक्त महानिदेशक, दो संयुक्त महानिदेशक और 17 निदेशक होते हैं. एएसआई को कुल 34 सर्किलों में विभाजित किया गया है. प्रत्येक का नेतृत्व एक अधीक्षण पुरातत्वविद् करता है. प्रत्येक सर्कल को आगे सब-सर्कल में विभाजित किया गया है.
आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, संस्कृति मंत्रालय का एक संलग्न कार्यालय है. 1958 के एएमएएसआर अधिनियम के प्रावधानों के तहत, एएसआई 3650 से अधिक प्राचीन स्मारकों, पुरातात्विक स्थलों और राष्ट्रीय महत्व के अवशेषों का नियंत्रित करता है. इनमें मंदिर, मस्जिद, चर्च, मकबरे और कब्रिस्तान से लेकर महल, किले, बावड़ी और चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाएं तक सब कुछ शामिल हो सकता है- Archaeological Survey of India.
सर्वेक्षण प्राचीन टीलों और अन्य समान स्थलों का भी रखरखाव करता है जो प्राचीन निवास के अवशेषों का हिस्सा हैं.
सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन हिंसा की जांच के लिए आज न्यायिक आयोग के सामने पेश हुए. 24 नवंबर को हिंसा के दौरान जामा मस्जिद में सर्वे टीम के साथ विष्णु शंकर जैन मौजूद थे और संभल पुलिस ने ये खुलासा किया था कि विष्णु शंकर जैन की हत्या की साजिश थी. देखिए कील विष्णु शंकर ने आयोग के सामने क्या बयान दिया?
यूपी के संभल में भारतीय पुरातत्व विभाग का सर्वे जारी है. शुक्रवार को रानी की बावड़ी की खुदाई वाली जगह पर एएसआई टीम दूसरी बार पहुंची.
नए-नए खोजे गए मंदिरों को संभालने वाला ASI कैसे करता है काम? जानिए भारत में इसकी शुरुआत कब से हुई.
क्या संभल हिंदुत्व की नई प्रयोगशाला बन गया है. ये सवाल इसलिए क्योंकि, यहां मस्जिद के सर्वे से बवाल शुरू हुआ था, उस सर्वे पर तो अभी रोक लगी है. लेकिन इसके कुछ दिन बाद ही खुदाई में कुएं से प्राचीन मूर्तियां मिलीं. फिर अगले दिन 46 साल से बंद पड़ा एक मंदिर का खुलासा हुआ. और अब खुदाई के दौरान ऐतिहासिक बावड़ी मिली है. इसके साथ ही शहर दर शहर मंदिरों की तलाश शुरु हो गई. लेकिन अब ऐसे मंदिरों और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों की पहचान की तलाश शुरु हो गई है, जिन पर अतिक्रमण हुआ है. ऐसे दावों में कितना दम है? देखें हल्ला बोल.
संभल की शाही मस्जिद पर दावेदारी की लड़ाई पहले से चल रही थी. अब संभल के चंदौसी में ऐतिहासिक बावडी मिली भी है. जिसकी आज भी खुदाई जारी है. कल संभल के चंदौसी इलाके में खुदाई के दौरान करीब 150 साल पुरानी बावड़ी का पता चला.
मंदिर-मस्जिद पॉलिटिक्स पर मोहन भागवत ने कुछ ऐसा कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी से लेकर तमाम विपक्षी उनके बयान का स्वागत कर रहे हैं. भागवन ने पुणे के एक कार्यक्रम में कहा कि देश में हर दिन एक नई मस्जिद को मन्दिर बताना सही नहीं है. अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि वो ऐसे मुद्दे उठाकर हिंदुओं के नेता बन जाएंगे. देखें विश्लेषण.
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक बड़ी लकीर खींची है. उस दौर में जब होड़ मस्जिदों के नीचे मंदिर खोजने की चल रही है. तब मोहन भागवत कहते हैं कि अतिवादिता छोड़कर धर्म के माध्यम मार्ग पर चलना होगा. अब सवाल है कि क्या संघ प्रमुख की कही गई बड़ी बात को बीजेपी, वीएचपी, बजरंग दल, हिंदूवादी संगठन मानेंगे? क्या अब देश में मस्जिदों में मंदिरों की खोज वाला रोज एक नया मसला निकालना बंद होगा?
उत्तर प्रदेश में सनातन की निशानियां और पुरातन की पहचान पुराने मंदिरों से लेकर कुओं तक की जा रही है. आज यूपी के संभल में भारतीय पुरातत्व विभाग की टीम ने करीब 9 घंटे तक संभल के पंचतीर्थ और 19 कुओं में धार्मिक चिह्नों की मौजूदगी की कार्बन डेटिंग वाली पड़ताल की है जिसे एएसआई का सर्वे कहा जा रहा है. इस सर्वेक्षण में क्या मिला है अभी इसका खुलासा नहीं हुआ है. ऐसे में सवाल है कि क्या सदियों पुराने तोड़े गए मंदिरों की तलाशी से ही सनातन मजबूत होगा और क्या औरंगजेब की करतूतों पर आज की हुकूमतें कार्रवाई करेंगी.
संभल में एएसआई की टीम के द्वारा मंदिर का सर्वे कर लिया गया है. इसकी जानकारी डीएम संभल ने दी है. साथ ही साथ उन्होंने ये भी कहा कि सारी प्रक्रिया को गुप्त रखा गया था. देखें सर्वे को लेकर क्या अपडेट सामने आया है.
संभल में एक बड़ी खबर सामने आई है. ASI ने हनुमान मंदिर समेत कई प्राचीन स्थलों का सर्वे पूरा कर लिया है. पांच तीर्थ स्थलों और 19 कुओं का निरीक्षण किया गया. सर्वे के दौरान कार्बन डेटिंग भी की गई है. ASI के 'सीक्रेट' सर्वे में क्या मिला? देखें रणभूमि.
आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया का अहम काम देश की सांस्कृतिक विरासतों, राष्ट्रीय महत्व के प्राचीन स्मारकों, पुरातत्त्वीय स्थलों और अवशेषों की आर्कियोलॉजिकल जांच और रखरखाव है. इन दिनों ये विभाग देश की कई मस्जिदों के मूल रूप से मंदिर होने के दावों और विवादों की जांच में जुटा हुआ है. इसी पर आधारित है 'सो सॉरी' की ये व्यंग्यात्मक प्रस्तुति.
29 नवंबर को संभल के शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद में भारतीय पुरातत्व विभाग के वकील विष्णु शर्मा ने जो हलफनामा दाखिल किया है उसे लेकर बड़ी जानकारी सामने आ रही है. हलफनामे में भारतीय पुरातत्व विभाग की तरफ से बड़ा दावा किया गया है. ASI ने क्या दावा किया है? देखें.
धार की ऐतिहासिक भोजशाला में ASI की सर्वे रिपोर्ट में 94 मूर्तियां और मूर्ति कला के टुकड़े मिले हैं. ये मूर्तियां संगेमरमर, नरम पत्थर, बलुआ पत्थर और चुना पत्थर से बनी हैं. खिड़कियों, खंभों और बीमों पर चार सशस्त्र देवताओं की मूर्तियां उकेरी गई हैं. परिसर से चांदी, तांबे, अल्युमिनियम और स्टील के 31 ऐतिहासिक सिक्के भी मिले हैं. याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि इस रिपोर्ट से उनका केस मजबूत हुआ है और सुप्रीम कोर्ट में आगे की कार्यवाही की मांग करेंगे.
धार नगरी की ऐतिहासिक भोजशाला के सर्वेक्षण के बाद ASI ने अपनी सर्वे रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए है. ASI ने अपनी ये रिपोर्ट हाईकोर्ट में जमा कर दी है. देखें नॉनस्टॉप 100
भोजशाला मंदिर है या फिर मस्जिद? इस सवाल का जवाब जानने महीनों ने जुटी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट आ गई है. जिसमें ASI ने कहा कि 94 मूर्तियां मिली हैं. देखिए VIDEO
आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) 18 स्मारकों को डीलिस्ट करने जा रहा है, इनमें से कई मिसिंग भी हैं. इन जगहों का जिम्मा अब ASI के पास नहीं रहेगा. उसका मानना है कि ये स्मारक अपना राष्ट्रीय महत्व खो चुके. जानिए, किस आधार पर ऐसा कहा गया, और संरक्षण मिलने पर क्या होता है.
मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने आदेश दिया है कि भोजशाला का ASI सर्वे किया जाए. हिंदू संगठनों के मुताबिक धार स्थित कमाल मौलाना मस्जिद दरअसल मां सरस्वती मंदिर भोजशाला है, जिसे सन 1034 में राजा भोज ने संस्कृत की पढ़ाई के लिए बनवाया था. देखें रणभूमि.
वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद की एएसआई सर्वे की रिपोर्ट से सुलझेगा हर विवाद? देखें ये रिपोर्ट.
ASI के सर्वे में व्यास जी के तहखाना से मिली 10 मूर्तियों में से आठ मूर्तियों को ट्रेजरी से इस तहखाने में वापस लाकर स्थापित किया गया है जिसकी पूजा चल रही है. देखें रिपोर्ट.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थान परिसर में मौजूद शाही ईदगाह मस्जिद के अंदर एडवोकेट कमिश्नर से सर्वे कराने की मांग मान ली है. हिंदू पक्ष की ओर से दायर याचिका में दावा था कि शाही ईदगाह मस्जिद के नीचे ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान है. ऐसे में सवाल है कि क्या मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद के अंदर धार्मिक आकृतियों के होने का दावा सही है?
ज्ञानवापी में सर्वे आज भी जारी रहेगा . इस मामले में वादी सीता साहू की ओर से बड़ा दावा किया गया है. उन्होंने कहा कि पश्चिमी दीवार पर आधे पशु आधे मनुष्य की प्रतिमा दिखी. हालांकि सीता साहू के अलावा एएसआई की टीम या किसी और की तरफ से ऐसा कोई दावा नहीं किया गया है.