हिमस्खलन
हिमस्खलन (Avalanches) एक पहाड़ी या पहाड़ ढलान के नीचे बर्फ का तीव्र प्रवाह होता है. हिमस्खलन होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि बढ़ी हुई वर्षा या स्नोपैक कमजोर होना, या बाहरी साधनों जैसे कि मनुष्यों, जानवरों और भूकंपों के कारण (Factors of Avalanches).
हिमस्खलन दो सामान्य रूपों में होता है. पहला बर्फ से बने स्लैब हिमस्खलन, जो एक अंतर्निहित कमजोर बर्फ की परत के ढहने से उत्पन्न होते हैं और दूसरा ढीली बर्फ से बने ढीले हिमस्खलन जिसका प्रभाव हलका होता है. हिमस्खलन आमतौर पर बहुत तेजी से आगे बढ़ते हैं. यदि कोई हिमस्खलन काफी तेजी से चलता है, तो कुछ बर्फ हवा के साथ मिल सकती है, जिससे पाउडर हिमस्खलन हो सकता है. हिमस्खलन कीचड़ के प्रवाह, मडस्लाइड, रॉक स्लाइड और सेराक ढहने से अलग होते हैं (Types of Avalanches).
हिमस्खलन किसी भी पर्वत श्रृंखला में हो सकता है. खासकर जिसमें एक स्थायी स्नोपैक हो, वहां संभावना ज्यादा होती है. हिमस्खलन सर्दियों या वसंत ऋतु में सबसे अधिक बार होते हैं (Avalanches Happen). पर्वतीय क्षेत्रों में, हिमस्खलन जीवन और संपत्ति के लिए सबसे गंभीर प्राकृतिक खतरों में से हैं, इसलिए हिमस्खलन नियंत्रण में बहुत प्रयास किए जाते रहे हैं (Efforts for Avalanche Control).
उत्तराखंड के चमोली जिले में बद्रीनाथ के पास माड़ा गांव में बर्फ़ का पहाड़ फिसकने से 57 मजदूर दब गए. रेस्क्यू ऑपरेशन में 32 मज़दूरों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 25 मजदूर अभी भी फंसे हुए हैं. बचाए गए लोगों में से चार की स्थिति गंभीर बताई जा रही है. देखें.
उत्तराखंड के सुमना में हुए हिमस्खलन में 57 मजदूर फंस गए हैं. यह इलाका भारत-चीन सीमा से सटा हुआ है और जोशीमठ के पास स्थित है. भारतीय सेना, आईटीबीपी, बीआरओ, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें बचाव कार्य में जुटी हुई हैं. देखें.
सोनमर्ग के सरबल इलाके में हिमस्खलन हुआ, जिसकी वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग के करीब एक जलधारा अवरुद्ध हो गई.
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में हुए एवलांच में झारखंड के तीन मजदूरों की मौत हो गई है. वहीं दो अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं. बताया जाता है कि जब सभी मजदूर दिन का खाना खाने के लिए एक वर्क साइट पर जमा हुए थे. तभी यह हादसा हुआ. एवलांच की चपेट में आने से दो मजदूरों की तो मौके पर ही मौत हो गई. वहीं एक ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.
अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी सीमावर्ती इलाकों और ऊंचे इलाकों के कई कस्बों और गांवों में इस समय भारी बर्फबारी हो रही है, जिसके चलते सरकार ने राज्य में हिमस्खलन की चेतावनी जारी की है. मौसम विभाग ने इसका कारण वेस्टर्न डिस्टर्बेंस को बताया है.
पहाड़ी इलाकों में बारिश और बर्फबारी का सिलसिला अभी भी जारी है. उत्तराखंड में चार जिलों को लेकर हिमस्खलन का अलर्ट जारी किया गया है. आइये जानते हैं, देशभर के मौसम का हाल.
जम्मू कश्मीर के गुलमर्ग में हिमस्खलन की खौफनाक तस्वीरें सामने आई हैं. पहाड़ों पर जमी बर्फ अचानक दरकने लगी. बर्फीले तूफान की चपेट में आने से दो विदेशी पर्यटकों की मौत हो गई.
तंगोल गांव करगिल से लगभग 78 किलोमीटर दूर ज़नास्कर राजमार्ग पर पड़ता है. यहां पिछले कई दिनों से बर्फबारी के बाद पहाड़ों पर भारी बर्फ जमा हो गई थी. वहीं मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी बर्फबारी की संभावना जाहिर करते हुए लोगों को अलर्ट जारी किया है.
गुरुवार दोपहर बाद मौसम बिगड़ जाने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन रोक दिया गया था. लेकिन अब 7 अक्टूबर को भी रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. कारण, मौसम विभाग ने बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है.
Draupadi ka Danda Avalanche: उत्तरकाशी में हुए हिमस्खलन में 27 ट्रेनी पर्वतारोही अब भी लापता हैं. 41 लोगों की टीम द्रौपदी पीक पर एडवांस ट्रेनिंग करके लौट रही थी. तब यह हादसा हुआ. पर ये हुआ क्यों? इस मौसम में एवलांच होने की वजह क्या है? जानिए हिमालय के एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के 28 ट्रेनी ट्रैकर्स द्रौपदी का डांडा-2 पर्वत पर हुए एवलांच में फंस गए हैं. यह इलाका बेहद दुर्गम माने जाने वाले गंगोत्री रेंज में आता है. यहां पर डोकरियानी ग्लेशियर है. यह ग्लेशियर इस ऊंचे पर्वत के उत्तरी दिशा से निकलता है. देखिए कितनी खतरनाक जगह पर मौजूद है ये पर्वत.
सिखों की आस्था के केंद्र हेमकुंड साहिब को लेकर वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है. घांघरिया से हेमकुंड तक के रास्ते पर हिमस्खलन का बड़ा खतरा है. यहां पर किसी भी तरह का निर्माण कार्य खतरे को और बढ़ा देगा. हालांकि वैज्ञानिकों ने यहां पर रोपवे बनाने के सुझाव पर अपनी सहमति जताई है.