अजीम हाशिम प्रेमजी, व्यवसायी
अजीम हाशिम प्रेमजी (Azim Hashim Premji) एक भारतीय व्यापार उद्यमी और परोपकारी व्यक्ति हैं ( Indian Businessman and philanthropist) जो लगभग चार दशकों तक सॉफ्टवेयर कंपनी विप्रो लिमिटेड के चेयरमैन के पद पर रहे. उनके 2019 में कार्यकारी अध्यक्ष का पद छोड़ने के बाद उनके बेटे रिशद प्रेमजी ने यह पदभार ग्रहण किया (Rishad Premji Chairman WIPRO Limited).
प्रेमजी का जन्म 24 जुलाई, 1945 को मुंबई के एक गुजराती मुस्लिम परिवार में हुआ था (Date of Birth). उनके पिता को बर्मा के राइस किंग के रूप में जाना जाता था (Premji Father Rice King) और वे वेस्टर्न इंडियन वेजेटेबल प्रोडक्ट्स लिमिटेड के संस्थापक थे. साल 1966 में अपने पिता की मृत्यु के बाद, अजीम प्रेमजी को स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University) से इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर पारिवारिक व्यवसाय को संभालने और उसे आगे बढ़ाने के लिए लौटकर भारत आना पड़ा. उन्होंने 1977 में कंपनी को उसका नया नाम ‘विप्रो’ दिया (WIPRO). लंबे वक्त के बाद, 1999 में, उन्हें स्टैनफोर्ड से आधिकारिक तौर पर इंजीनियरिंग की डिग्री मिल गई.
जुलाई 2021 तक, उनका नेट वर्थ 32.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर आंका गया है (Azim Premji Net Worth). जबरदस्त निजी संपत्ति के बावजूद, प्रेमजी की गणना दुनिया के सबसे उदार अरबपतियों में होती है (Azim Premji most generous billionaire). अप्रैल 2020 में, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने कोविड-19 से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए 134 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद का वादा किया है.
उन्हें मिली कई उपाधियों में 2005 में पद्म भूषण और 2011 में पद्म विभूषण शामिल है (Padma Vibhushan). वे फैराडे मेडल पाने वाले पहले भारतीय हैं.
उनकी शादी यास्मीन से हुई है जिनसे उनहें दो बच्चे, रिशद और तारिक हैं (Family).
देश के दिग्गज कारोबारी और IT कंपनी विप्रो के मालिक अजीम प्रेमजी ने अपने बेटों को बड़ा गिफ्ट दिया है.
Narayana Murthy ने साल 1981 में अपने छह साथियों के साथ कंपनी शुरू करने का प्लान बनाया. उस दौर में नारायण मूर्ति अपनी पत्नी सुधा मूर्ति (Sudha Murthy) के साथ एक कमरे के मकान में रहते थे और इंफोसिस (Infosys) को शुरू करने के लिए उन्होंने पत्नी से 10,000 रुपये उधार लिए थे.
एडलगिव हुरुन इंडिया परोपकारी लिस्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022-23 में सबसे ज्यादा दान देने वाली भारतीय महिला रोहिणी नीलेकणी (Rohini Nilekani) हैं, जो इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणी (Nandan Nilekani) की पत्नी हैं.
Nikhil Kamath ने वॉरेन बफे और बिल गेट्स द्वारा स्थापित 'The Giving Pledge' ज्वाइन किया है. इसके साथ ही अजीम प्रेमजी, किरण मजूमदार-शॉ और रोहिणी व नंदन नीलेकणि के बाद वे इसमें शामिल होने वाले चौथे और सबसे युवा भारतीय बन गए हैं.
संतूर और यार्डली जैसे साबुन, टाल्क, पर्सनल और होम केयर हाइजीन प्रोडक्ट के निर्माण में लगी विप्रो कंज्यूमर केयर ने पैकेज्ड फूड सेक्टर में बड़ा खिलाड़ी बनने की ओर कदम बढ़ाए हैं. हालांकि, उसे इस सेक्टर में पहले से मौजूद Adani Wilmar, Reliance Retail और Tata Consumer Ltd से सीधा मुकाबला करना होगा.
हुरुन की दानदाता की लिस्ट में Reliance Industries के चेयरमैन मुकेश अंबानी तीसरे स्थान पर हैं. जबकि Aditya Birla Group के कुमार मंगलम बिड़ला चौथे स्थान पर रहे हैं. अंबानी ने 411 करोड़, तो बिड़ला ने 242 करोड़ रुपये दान किए हैं. Adani Group के गौतम अडानी 7वें स्थान पर रहे हैं.
भारत में उद्योगपतियों के दान करने की पुरानी परंपरा है. राजा-महाराजाओं से अलग उद्योगपतियों ने कई जगहों पर धर्मशाला से लेकर प्याऊ तक खुलवाए. अस्पताल से लेकर स्कूल तक के लिए उद्योगपतियों ने पैसा और जमीन दान की. आज ऐसे ही 15 उद्योगपतियों की बात, जिन्होंने दान किए 100 करोड़ से ज्यादा.
देश की दिग्गज आईटी कंपनी Wipro के चेयरमैन रिशद प्रेमजी (Rishad Premji) ने बीते दिनों अपने ट्विटर अकाउंट से ट्वीट कर कहा था, कि मूनलाइटनिंग (Moonlighting) यानी कंपनी में काम करते हुए दूसरा काम करने के पॉलिसी सीधा धोखा है, खासकर आईटी सेक्टर में. लेकिन उनके इस नजरिए से कई कर्मचारी सहमत नहीं दिखे थे.
रविवार को विप्रो के चेयरमैन रिशद प्रेमजी (Rishad Premji) ने अपने ट्विटर अकाउंट से ट्वीट (Tweet) कर कहा था, कि मूनलाइटनिंग (Moonlighting Policy) यानी वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) के दौरान कंपनी के काम के अलावा दूसरा काम करना धोखा है.
Azim Premji Birthday: दुनिया की प्रमुख आईटी कंपनियों में से एक विप्रो (wipro) की शुरुआत उसी साल हुई थी, जिस वर्ष अजीम प्रेमजी का जन्म हुआ था. मुंबई से स्टैनफोर्ड और फिर पढ़ाई अधूरी छोड़कर वापस छोटे से शहर अमलनेर में पिता के कारोबार को संभाला. आज अजीम प्रेमजी अपना 77वां जन्मदिन मना रहे हैं.
गौतम अडानी ने अपनी संपत्ति से 60 हजार करोड़ रुपये सामाजिक कार्यों के लिए दान करने का ऐलान किया है. इस घोषणा के बाद वह सबसे बड़े दान दाने वाले भारतीय उद्योगपतियों में शुमार हो गए हैं. दान देने के मामले में भारत में विप्रो चेयरमैन अजीम प्रेमजी पहले नंबर पर आते हैं.