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भगवती अम्मन मंदिर

भगवती अम्मन मंदिर

भगवती अम्मन मंदिर

भगवती अम्मन मंदिर (Bhagavathy Amman Temple) कन्याकुमारी में स्थित है. मंदिर दक्षिण भारतीय संस्कृति का एक बहुत बड़ा हिस्सा हैं. हालांकि कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जो कई कारणों से अलग हैं. कन्याकुमारी (Kanyakumari) में भगवती अम्मन मंदिर वास्तव में एक ऐसा ही पूजा स्थल है जहां हर साल लाखों भक्त और  पर्यटक आते हैं. यह स्थान न केवल हर तरह से पवित्र है, बल्कि इसकी उत्कृष्ट वास्तुकला और समुद्र के किनारे की शांत जगह के कारण यह दुनिया के सबसे खूबसूरत मंदिरों में से एक है. 

यह मंदिर 108 शक्तिपीठों में से एक है और यह देवी कन्याकुमारी को समर्पित है, जिन्हें कुंवारी देवी भी कहा जाता है. मंदिर का इतिहास 3000 साल से भी ज्यादा पुराना है. यह मजबूत पत्थर की दीवारों से घिरा हुआ है. मंदिर परिसर में अन्य मंदिर भी हैं जो भगवान सूर्य देव, भगवान गणेश, भगवान अयप्पा, देवी बाला सुंदरी और देवी विजया सुंदरी को समर्पित हैं. मंदिर में मुख्य प्रवेश उत्तरी द्वार से होता है. मंदिर का पूर्वी द्वार ज़्यादातर बंद रहता है और केवल विशेष अवसरों पर ही खोला जाता है.

मंदिर की उत्पत्ति विभिन्न हिंदू धर्मग्रंथों और किंवदंतियों में पाई जाती है. प्रचलित कथा के अनुसार राक्षस 'बाणासुर' को वरदान मिला था कि उसे केवल कुंवारी कन्या ही मार सकती है. बाणासुर के खतरे को खत्म करने के लिए देवी पराशक्ति ने कुंवारी कन्या का रूप धारण किया और देवी ने अंततः बाणासुर को पराजित कर दिया. संत नारद और भगवान परशुराम ने देवी से कलियुग के अंत तक पृथ्वी पर रहने का अनुरोध किया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया. इसलिए परशुराम ने समुद्र के किनारे इस मंदिर का निर्माण किया और देवी कन्याकुमारी की मूर्ति स्थापित की (Bhagavathy Amman Temple History).

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