भारतीय न्याय संहिता (BNS) भारत का आधिकारिक आपराधिक संहिता है. ब्रिटिश भारत के समय से चली आ रही भारतीय दंड संहिता (IPC) को हटा कर BNS को दिसंबर 2023 में पेश किया गया था. यह 1 जुलाई 2024 से लागू होगी.
11 अगस्त 2023 को गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में भारतीय न्याय संहिता विधेयक 2023 पेश किया था.
12 दिसंबर 2023 को भारतीय न्याय संहिता विधेयक 2023 को वापस ले लिया गया. लेकिन उसी दिन भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता विधेयक 2023 को लोकसभा में पेश किया गया.
20 दिसंबर 2023 को भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता विधेयक 2023 को लोकसभा में पारित किया गया.
21 दिसंबर 2023 को भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता विधेयक 2023 को राज्यसभा में पारित किया गया.
25 दिसंबर 2023 को भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता विधेयक 2023 को भारत के राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली.
बीएनएस में कुछ बदलाव भी किए गए. इसमें 20 नए अपराध जोड़े गए हैं और आईपीसी के 19 प्रावधानों को हटा दिया गया है. 33 अपराधों के लिए कारावास की सजा बढ़ा दी गई है और साथ ही 83 अपराधों के लिए जुर्माना बढ़ा दिया गया है. 23 अपराधों के लिए अनिवार्य न्यूनतम सजा पेश की गई और छह अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा की सजै पेश की गई है.
अगर पत्नी की उम्र 15 साल या उससे अधिक है, तो पति का अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध बनाना बलात्कार नहीं माना जाएगा. ऐसे में अप्राकृतिक कृत्य के लिए पत्नी की सहमति नहीं मिलना भी महत्वहीन हो जाता है. आखिर कानून बनाने वालों के भीतर 'महिला की सहमति' को लेकर संवेदना कब जागेगी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "1857 में देश का पहला बड़ा स्वधीनता संग्राम लड़ा गया. उस 1857 के स्वतंत्रता संग्राम ने अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें हिला दी थीं, तब जाकर 1860 में अंग्रेज IPC लाए. कुछ साल बाद, CRPC का पहला ढांचा अस्तित्व में आया. इस कानूनों का मकसद यही था कि भारतीयों को दंड दिया जाए, उन्हें गुलाम रखा जाए."
वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए आईपीसी की धारा 498A और घरेलू हिंसा कानून को सबसे ज्यादा दुरुपयोग किए जाने वाला कानून बताया है. ऐसे में जानते हैं कि ये दोनों क्या हैं? और क्यों इन पर सवाल उठते रहे हैं?
सेक्सुअल असॉल्ट का शिकार हुए पुरुषों को इंसाफ देने के लिए कोई कानून नहीं है. इसे लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से जवाब भी मांगा है. आईपीसी में धारा 377 थी, लेकिन भारतीय न्याय संहिता में ऐसे कोई प्रावधान नहीं है.
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता या बीएनएसएस में पुलिस की जिम्मेदारी भी बढ़ा दी गई. साथ ही इसके लिए उन्हें नए सिरे से ट्रेनिंग दी जाएगी.
नए कानूनों पर विपक्ष क्या सवाल उठा रहा है? जानें- क्यों उसे भारत के 'पुलिस स्टेट' बनने का है डर.
एक जुलाई से तीन नए क्रिमिनल लॉ लागू हो गए हैं. 1860 में बनी आईपीसी की जगह भारतीय न्याय संहिता लागू हो गई है. आईपीसी 164 साल पहले बनकर तैयार हुई थी. आईपीसी ने भारत में ब्रिटिश शासन को और प्रभावी बना दिया था. ऐसे में जानते हैं कि आईपीसी किस तरह बनकर तैयार हुई थी?
1 जुलाई से इंडियन पीनल कोड (IPC) की जगह, भारतीय न्याय संहिता (BNS) ने ले ली है. 164 साल पुराने IPC के जाने से कई यादगार फिल्मों का जायका भी डिस्टर्ब हो गया है. कैसे? आइए बताते हैं...
अब देश में ब्रिटिश काल की भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह अब भारतीय न्याय संहिता (BNS), दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) ने ले ली है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को बताया कि नए आपराधिक न्याय कानूनों के तहत पहला मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आधी रात को करीब 12 बजकर 10 मिनट पर दर्ज किया गया है. जो कि एक बाइक चोरी का मामला है. गृह मंत्री ने यह भी कहा कि मैं सबसे पहले देश के लोगों को बधाई देना चाहता हूं कि आजादी के करीब 77 साल बाद हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली पूरी तरह से स्वदेशी हो गई है.
1 जुलाई से देशभर में तीन नए क्रिमिनल लॉ लागू हो गए हैं. विपक्ष ने इन कानूनों पर सवाल उठाए हैं. विपक्ष के कई नेताओं का आरोप है कि इन कानूनों के जरिए सरकार देश को पुलिस स्टेट में बदलने की कोशिश कर रही है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर इन कानूनों पर विपक्ष सवाल क्यों उठा रहा है? और सरकार का क्या है कहना?
New Criminal Laws: छात्रा का सवाल सुनते ही पुलिस मौन हो गई. तभी एक अभियोजन अधिकारी ने बात को सम्हालते हुए छात्रा को समझाने की कोशिश की. छात्रा ने बताया कि उसके मन में जो सवाल था उसने पूछ लिया. पुलिस को लेकर अक्सर आरोप लगते रहते हैं.
देशभर में 1 जुलाई से नए कानून लागू हो गए हैं. इस पर गृहमंत्री अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बताया कि आखिर देश को नए कानूनों की जरूरत क्यों है. अमित शाह ने कहा कि यह न्याय व्यवस्था का स्वदेशीकरण है. देखिए गृहमंत्री अमित शाह ने और क्या कहा?
जुलाई की पहली तारीख से आईपीसी की जगह भारतीय न्याय संहिता ले लेगी. भारतीय न्याय संहिता में कई अपराधों के लिए सजा को सख्त बना दिया गया है. इसमें कई ऐसे अपराध भी हैं, जिनमें उम्रकैद की सजा होने पर दोषी को जिंदा रहने तक जेल में ही रहना होगा.
भारत में तीन नए क्रिमिनल लॉ लागू होने जा रहे हैं. एक जुलाई से तीनों नए कानून लागू हो जाएंगे. जानिए इसमें क्या प्रावधान हैं. देखें वीडियो.
भारतीय न्याय संहिता को एक जुलाई से लागू किया जाएगा. आईपीसी में 511 धाराएं थीं, जबकि भारतीय न्याय संहिता में 356 धाराएं होंगी. देखें वीडियो.
UP Police: क्या 1 जुलाई से उनको किसी तरह की दिक्कत का सामना तो नहीं पड़ेगा? क्या 1 जुलाई से एफआईआर दर्ज करते समय बार-बार मोबाइल ऐप की मदद लेनी पड़ेगी? भारतीय न्याय संहिता को समझने के लिए लॉन्च हुआ मोबाइल एप कितना मददगार है?
एक जुलाई 2024 से तीन नए क्रिमिनल लॉ लागू होंगे. फिर 1860 के आईपीसी की जगह भारतीय न्याय संहिता, 1898 के सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, और 1872 के इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम ले लेंगे. इसके बाद कई चीजे़ं बदलेंगी.
एक जुलाई से तीन नए क्रिमिनल लॉ लागू होने जा रहे हैं. सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लागू हो जाएगी. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में कुछ अहम बदलाव किए गए हैं, जिसका असर छोटे-मोटे अपराधियों से लेकर बड़े जुर्म करने वाले दोषियों तक पर पड़ेगा.
केंद्र सरकार के सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय आपराधिक रिकॉर्ड ब्यूरो और पुलिस अनुसंधान ब्यूरो के साथ-साथ राष्ट्रीय सूचना संचार सेवा ने भी राज्य सरकारों के साथ मिलकर पुलिस अधिकारियों, न्यायिक अधिकारियों और इससे जुड़ी सेवाओं के सवा छह लाख से ज्यादा लोगों को नए नियमों की ट्रेनिंग दी है.
एक जुलाई से तीन नए क्रिमिनल लॉ लागू होने जा रहे हैं. आईपीसी की जगह लेने वाली भारतीय न्याय संहिता में आतंकवाद की परिभाषा को और विस्तृत कर दिया गया है. अब कई सारे कामों को आतंकवादी कृत्य में शामिल किया गया है. इनमें दोषी पाए जाने पर मौत की सजा तक का प्रावधान है.