बिहार में साल 2025 में विधानसभा चुनाव होना है (Bihar Assembly Election 2025). सभी राजनीतिक पार्टियां अभी से ही तैयारी में जुट गई हैं. भारतीय स्वराज मोर्चा नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू में विलय हो गया है. जिसमे मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि उज्ज्वल कुशवाहा समेत कई नेता शामिल थे. खबर है कि पूर्व विधायक अनंत सिंह 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. साथ ही, चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अगस्त 2024 में कहा था कि उनकी पार्टी, जन सुराज बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी और कम से कम 40 सीटों पर महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा जाएगा.
प्रयागराज में गंगा-यमुना-सरस्वती के मिलन वाले संगम का जल बंगाल की सियासत तक पहुंचने लगा है. तब इस सियासी दस्तक को ध्यान से समझने की जरूरत है कि क्या जिस महाकुंभ में 45 दिन में 66 करोड़ 30 लाख लोगों ने स्नान किया है, उस महाकुंभ का 2025 में बिहार, 2026 में पश्चिम बंगाल और 2027 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव समेत 2029 के लोकसभा चुनाव तक बड़ा असर दिखाने वाला है?
नीतीश कुमार कुमार बुरी तरह घिरे हुए हैं, लेकिन ऐसा कोई पहली बार नहीं है. और, हमेशा की तरफ अब भी वो पेच फंसाये हुए हैं, पटना से दिल्ली तक. अब तो उनका बेटा भी मैदान के करीब नजर आ रहा है - देखना ये है कि उनकी कितनी दिलचस्पी है.
एनडीए एक बार फिर जंगल राज को मुद्दा बनाकर जनता के डर को कैश कराने की फिराक में है. पर क्या 20 साल बाद भी आम लोग लालू यादव के कार्यकाल की गलतियों को आधार बनाकर वोटिंग करेंगे? क्या 2025 में भी यह विषय चुनावी मुद्दा बनने के लायक है?
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार इन दिनों सक्रिय हुए हैं. अक्सर मीडिया से दूरी बनाकर रहने वाले निशांत इन दिनों जब खुलकर बिहार की राजनीति और आगामी बिहार विधानसभा चुनाव पर प्रतिक्रिया देने लगे तो सियासी गलियारे में तरह-तरह के कयास भी उन्हें लेकर लगाए जाने लगे. निशांत ने एनडीए को फिर से जीत दिलाकर अपने पिता नीतीश कुमार को फिर एकबार मुख्यमंत्री बनाने की अपील की है.
नीतीश कुमार के लिए कोई मजबूरी नहीं थी कि वो सात नए मंत्री केवल बीजेपी के ही बनायें. हो सकता है कि सरकार बनते समय दोनों ही पार्टियों के बीच कुछ समझौता हुआ हो कि विधायक की संख्या के हिसाब मंत्री बनाए जाएंगे. पर अब तक यदि नीतीश कुमार बीजेपी विधायकों को मंत्री नहीं बना रहे थे अचानक कैसे तैयार हो गए? जाहिर है कि सवाल तो उठेंगे ही.
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का स्थान एक मशहूर पहेली की तरह है, जिसका जवाब है "लाडला". नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में हमेशा से सीएम पद के लिए लाडले रहे हैं. हाल ही में, सात नए मंत्री बीजेपी के कोटे से नीतीश सरकार में शामिल हुए. इस घटना ने बिहार की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दिया है, जहां जातीय और क्षेत्रीय अहम हैं. इस कैबिनेट विस्तार पर नीतिश कुमार का छोटा सा बयान भी काफी दिलचस्प है.
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने 7 नए मंत्री बनाए हैं. इस बार के कैबिनेट विस्तार में भी जाति के चुनावी गणित का ख्याल ज्यादा रखा गया है. आज शपथ लेने वाले 7 मंत्रियों में पिछड़ा वर्ग के 3, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के 2 और सामान्य वर्ग के 2 मंत्री शामिल हैं. ऐसे में सवाल कि क्या इस बार भी बिहार के चुनाव में जाति का ही दांव चलेगा. क्या जंगलराज और भ्रष्टाचार के सियासी तीर का मुकाबला इस बार इंडिया गठबंधन जाति गणना और आरक्षण संविधान के मुद्दे के साथ करने वाली है? देखें दंगल.
बिहार में आज नीतीश कुमार ने मंत्रिमंडल विस्तार कर दिया. जिसमें 7 मंत्रियों में सभी बीजेपी के ही विधायक हैं. माना जा रहा है कि, नीतीश ये संदेश देना चा रहे रहे हैं कि, हमने मंत्रिमंडल विस्तार में बीजेपी को पर्याप्त सम्मान दे दिया. अब बीजेपी की बारी है कि, वो खुला ऐलान करे कि, बिहार में नीतीश ही उसके चेहरा होंगे. क्या है नीतीश कुमार का प्लान? देखिए हल्ला बोल.
बिहार में नीतीश कुमार मंत्रिमंडल का विस्तार हो रहा है. बीजेपी कोटे से 7 नए मंत्री शामिल किए जाएंगे. इस विस्तार में जातीय समीकरण का असर साफ दिख रहा है. नए मंत्रियों में 3 पिछड़े, 2 अति पिछड़े और 2 सवर्ण वर्ग के हैं. यह विस्तार चुनावी साल में किया जा रहा है, इसका क्या असर होगा? देखिए स्पेशल शो.
नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में सबके लाडले मुख्यमंत्री हैं. उल्टा सीधा दोनों तरफ से नीतीश एक समान सीएम बनते आ रहे हैं. इसी लाडला सियासत में आज जब नीतीश सरकार में बीजेपी के कोटे से सात नए मंत्री शामिल हुए तो सबकुछ शांति से बीता. लेकिन क्या नीतीश कुमार की लाडला बनकर की जाने वाली शांत सियासत कोई बड़ा तूफान पैदा कर सकती है?
बिहार में नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बीजेपी और जेडीयू के बीच नया समीकरण सामने आया है. बीजेपी के मंत्रियों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है, जबकि जेडीयू के पास सिर्फ 13 मंत्री पद हैं. इस बदलाव से सवाल उठ रहे हैं कि क्या बिहार में बीजेपी 'बड़े भाई' की भूमिका में आ गई है? देखिए VIDEO
बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सियासी समीकरण बदल गए हैं. नीतीश कुमार की कैबिनेट में अब बीजेपी के 21 मंत्री हो गए हैं, जबकि जेडीयू के 13 मंत्री हैं. इस विस्तार में जेडीयू को कोई नया मंत्री पद नहीं मिला. बीजेपी ने जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है. लेकिन नीतीश कुमार के सीएम फेस की घोषणा को लेकर अभी भी असमंजस बना हुआ है. मंत्रिमंडल विस्तार पूरी इनसाइड स्टोरी जानिए.
बिहार के नवनियुक्त मंत्री जीवेश मिश्रा ने दूसरी बार मंत्री पद संभालने के बाद बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए 200 से अधिक सीटें जीतकर फिर से सरकार बनाएगा. मिश्रा ने मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व की सराहना की और कहा कि बिहार तेजी से विकास कर रहा है. VIDEO
बिहार के नवनियुक्त मंत्री राजू सिंह ने एनडीए के लिए बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में एनडीए 200 से अधिक सीटें जीतेगा, जबकि विपक्ष 30-40 सीटों तक सिमट जाएगा. राजू सिंह ने अपनी प्राथमिकताओं पर भी बात की और कहा कि वे बिहार के विकास के लिए काम करेंगे. VIDEO
बिहार में नीतीश कुमार मंत्रिमंडल का विस्तार होने जा रहा है. बीजेपी के कोटे से 7 नए मंत्री शपथ लेंगे, जबकि जेडीयू से कोई नया मंत्री शामिल नहीं होगा. इस विस्तार के बाद मंत्रिमंडल में बीजेपी के मंत्रियों की संख्या 21 हो जाएगी, जबकि जेडीयू के 13 मंत्री रहेंगे. नए मंत्रियों में सवर्ण, पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधि शामिल हैं. BJP ने 7 मंत्री से क्या साधा है? देखें खबरदार.
Bihar Cabinet Expansion: बिहार में नीतीश कुमार मंत्रिमंडल का विस्तार हो रहा है. शाम 4 बजे बीजेपी के 7 विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे. इस विस्तार में जाति समीकरण का असर साफ दिख रहा है. 7 में से 3 पिछड़ी, 2 अति पिछड़ी और 2 सवर्ण जाति के हैं. क्षेत्रीय संतुलन भी साधा गया है. देखिए न्यूजरूम.
बिहार में ये चुनावी साल है और उससे पहले नीतीश सरकार में कैबिनेट विस्तार होने जा रहा है. सियासी गलियारों में चर्चाएं लाजिमी हैं. राज्य में एनडीए की सरकार है. अलायंस में बीजेपी, जेडीयू, HAM, LJP (R) शामिल हैं. जदयू प्रमुख नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं.
बिहार में कल पीएम मोदी ने लालू यादव के शासन काल को जंगलराज करार दिया. चारा घोटाले का जिक्र किया था. आज जब लालू यादव परिवार को नौकरी के बदले जमीन घोटाला केस में पेशी का समन मिल गया. तो जंगलराज और घोटाले पर चुनावी घेराबंदी की राजनीति फिर शुरू हो गई. ऐसे में सवाल कि क्या इस बार फिर बिहार में चुनाव की पिच करप्शन और जंगलराज पर सेट होगी. क्या चुनावी सीजन में घोटालों की खुलती फाइलों की टेंशन आरजेडी के लिए महंगी साबित हो सकती है.
बिहार की सियासत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की एंट्री के चर्चे हैं. निशांत का सियासी डेब्यू तय बताया जा रहा है लेकिन निशांत अभी पत्ते खोलने से बच रहे हैं. क्यों?
बीते दिन पीएम मोदी ने नीतीश कुमार को बिहार का लाडला बताया, आज नीतीश कुमार के लाडले निशांत कुमार मीडिया के सामने आए. जो बात खुद नीतीश कुमार और जेडीयू की टॉप लीडरशिप ने नहीं कही, वही बात नीतीश के बेटे ने कह डाली. बीजेपी को चुनाव से पहले नीतीश को सीएम फेस घोषित करना पड़ेगा. आखिर नीतीश के लाडले का बयान और नीतीश का गेम प्लान क्या है? क्या नीतीश के दिमाग में कुछ चल रहा है? देखें स्पेशल रिपोर्ट.
बीजेपी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही आगामी चुनाव लड़ा जाएगा. गिरिराज सिंह ने दिया बड़ा बयान, कहा - नीतीश कुमार ही एनडीए के नेता बनेंगे. नीतीश के बेटे निशांत की मांग के बाद यह फैसला आया है. VIDEO