बिलकिस बानो (Bilkis Bano) गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2024 में दोषियों की रिहाई को मंजूरी देने वाले गुजरात सरकार के फैसले को पलट दिया. बिलकिस और उसके परिवार के सदस्यों की साल 2002 में गुजरात दंगों के दौरान हत्या कर दी गई थी. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी.
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा कि समीक्षा याचिकाओं, जिन आदेश को चुनौती दी गई और उनके साथ संलग्न दस्तावेजों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि रिकॉर्ड में कोई त्रुटि या समीक्षा याचिकाओं में कोई ऐसा गुण नहीं है, जिसके कारण आदेश पर पुनर्विचार किया जाए. लिहाजा समीक्षा याचिकाएं खारिज की जाती हैं.
अरविंद केजरीवाल बेशक अपनी जमानत के लिए कानूनी तरीके से जूझ रहे हैं, लेकिन ऐसे कैदी जो वक्त से पहले रिहा किये जाने योग्य हैं, उनका अलग ही संघर्ष है - हैरानी की बात ये है कि वे इसलिए जेल से नहीं निकल पा रहे हैं, क्योंकि उनकी फाइल केजरीवाल के हस्ताक्षर के बिना आगे नहीं बढ़ पा रही है.
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कैसे स्वीकार्य है? ये बिल्कुल गलत है. जनहित याचिका में हम अपील पर कैसे बैठ सकते हैं? जनहित याचिका के खिलाफ अपील पर सुनवाई उचित नहीं है.
पिछले दिनों बिलकिस बानो रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा सुनाए गए फैसले को लेकर दोषियों ने फिर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. दायर की गई याचिका में कहा गया है कि मामले को बड़ी बेंच के पास भेजा जाए.
सुप्रीम कोर्ट में गुजरात सरकार के हलफनामे के मुताबिक, चंदना ने 2008 में कैद के बाद से 1,198 दिनों की पैरोल और 378 दिनों की रिहाई का आनंद लिया है. इससे पहले, मामले में एक अन्य दोषी प्रदीप मोधिया को हाईकोर्ट द्वारा उसकी पैरोल याचिका की अनुमति के बाद 7 से 11 फरवरी तक पैरोल पर गोधरा जेल से रिहा किया गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने 8 जनवरी को बिलकिस बानो की अर्जी पर हत्या और रेप मामले में उम्रकैद की सजा पाए 11 दोषियों को रिहाई के 17 महीने बाद वापस जेल भेजने का फैसला सुनाया था. सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में गुजरात सरकार के समय से पहले दोषियों की रिहाई के आदेश को रद्द कर दिया था. अब गुजरात हाईकोर्ट ने पुनर्विचार याचिका दायर की है.
बिलकिस बानो केस का दोषी प्रदीप मोढिया अपने ससुर की मौत के बाद गुजरात हाई कोर्ट की ओर से दी गई पांच दिन की पैरोल पर जेल से बाहर निकला है. पैरोल पर बहार आने के बाद प्रदीप मोढिया दाहोद जिले के अपने पैतृक गांव रंधिकपुर पहुंचा. मोढिया को 7 से 11 फरवरी तक हाई कोर्ट ने पैरोल दी है. हालांकि प्रदीप मोढिया ने 30 दिन की पैरोल मांगी थी.
बहुचर्चित बिलकिस बानो केस में आरोपियों की गुजरात सरकार द्वारा की गई सजा माफी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद उन्हें 21 जनवरी तक जेल में पेश होने का आदेश दिया गया था. सभी 11 दोषी रात 11:30 बजे दो निजी वाहनों में सिंगवड रंधिकपुर से गोधरा उप जेल में पहुंचे और सरेंडर किया.
बिलकिस बानो मामले के 11 दोषियों में से एक के रिश्तेदार ने शनिवार को कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित समय सीमा 21 जनवरी की शाम को आत्मसमर्पण कर देगा. शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार और उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए दोषियों की याचिका खारिज कर दी.
बिलकिस बानो केस में दोषियों को सरेंडर से राहत देने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. कोर्ट ने 11 में 10 दोषियों की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें अलग-अलग कारण बताते हुए सरेंडर से फिलहाल राहत देने की मांग की गई थी.
सुप्रीम कोर्ट में बिलकिस बानो केस के दोषियों को राहत देने से इनकार करते हुए 21 जनवरी तक सरेंडर करने के लिए कहा है. अदालत ने कहा है कि याचिका में बताए गए कारण बेबुनियाद हैं और इसलिए सभी याचिकाओं को रद्द किया जाता है.
गुजरात सरकार द्वारा इन 11 दोषियों को माफी के आधार पर समय से पहले रिहाई करते हुए इनको जेल से रिहा कर दिया था. इसके खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई कर 8 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस पंकज मित्थल की पीठ ने इन दोषियों को दो हफ्ते में जेल में सरेंडर करने का आदेश दिया था.
बिलकिस बानो केस के पांच दोषियों ने जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए समय बढ़ाने की मांग की है. इन दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और अलग-अलग वजह बताकर याचिकाएं दायर की हैं. एक दोषी ने खेती बाड़ी और फसल के साथ बच्चों की शादी का हवाला दिया.
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद बिलकिस बानो केस में 11 दोषियों में से एक गोविंद नाई ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल की है. उन्होंने याचिका में अपने माता-पिता की देखभाल की बात करते हुए सरेंडर के लिए दो हफ्ते के बजाए चार हफ्ते की मोहलत देने की मांग की है.
बिलकिस बानो केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस मामले में एकमात्र गवाह ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि जघन्य अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को फांसी दी जानी चाहिए या उन्हें बचे हुए जीवन तक जेल में रखा जाना चाहिए. तभी उन्हें न्याय मिलेगा.
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुजरात सरकार को अपने विवेक का दुरुपयोग करने के लिए फटकार लगाई थी और सभी 11 दोषियों को दी गई छूट को रद्द कर दिया था. देश की सबसे बड़ी अदालत ने उन सभी दोषियों को दो सप्ताह के भीतर वापस जेल भेजने का आदेश दिया है.
हाल ही में बिलकिस बानो के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. अब कंगना रनौत ने खुलासा किया है कि वो इस पूरे मुद्दे पर फिल्म बनाना चाहती हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि वो तीन सालों से इसे लेकर रिसर्च कर रही हैं.
गुजरात की बिलकिस बानो को एक बार फिर कोर्ट से न्याय मिला है. दो साल से खुली हवा में घूम रहे दोषी एक बार फिर जेल की सलाखों में होंगे. 2002 में बिलकिस के साथ गैंगरेप हुआ और परिवार के सात सदस्यों की हत्या हुई. 6 साल बाद 2008 में सभी 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली. 14 साल बाद यानी 2022 में सभी 11 दोषियों की सजा को माफ कर दिया गया था. दो साल सभी दोषी फिर जेल में होंगे.
गुजरात के बिलकिस बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है. SC ने दोषियों को जल्द रिहाई देने के फैसले को रद्द कर दिया है. पिछले साल ही गुजरात सरकार ने सभी 11 दोषियों को समयपूर्व रिहाई दी थी. साल 2002 में जब बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप की यह घटना हुई थी, तब वो 21 साल की थीं और पांच महीने की गर्भवती थीं. भीड़ ने बिलकिस के परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी थी. मरने वालों में तीन साल की बेटी भी शामिल थी. देखें पूरी टाइमलाइन.
बिलकिस बानो केस के दोषियों की रिहाई को रद्द कर दिया गया है. 2008 में जस्टिस साल्वी ने इस केस में दोषियों को सजा सुनाई थी. उन्होंने बताया कि गैंगरेप के दोषियों को फांसी की सजा क्यों नहीं दी गई. देखें वीडियो.
बिलकिस बानो के हिस्से में आज इंसाफ आया है. वो पांच महीने की प्रेगनेंट महिला जिसके साथ 11 दोषियों ने रेप किया, उसके हांथ पांव तोड़ दिए, उसके परिवार का कत्ल किया. तारीखें गुज़रती रहीं, साल के साल बदलते रहे, फिर एक दिन वो आया जब दोषियों को उनके गुनाह की सजा मिली, वो जेल गए. बरसों बीते, समय फिर बदला और गुजरात की सरकार ने दोषियों की सजा माफ कर दी...उस रोज बिलकिस बानो पर मानों बज्र सा गिरा था,फिर से वो कानूनी लड़ी और सुप्रीम कोर्ट का आज फैसला आया जिसमें सुनाया गया कि दोषियों को फिर जेल होगी. देखें वीडियो.