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बिहार लोक सेवा आयोग

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बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) भारत के संविधान (Constitution of India) द्वारा आवेदकों की योग्यता के अनुसार भारतीय राज्य बिहार में सिविल सेवाओं के लिए आवेदकों का चयन करने के लिए बनाई गई एक संस्था है (Bihar Public Service Commission).


भारत के संविधान के इतिहास पर नजर डाले तो पता चलता है कि कुछ पदों पर नियुक्ति के लिए प्रतियोगी परीक्षा आयोजित करने की अवधारणा वर्ष 1853 में आई थी. इस समिति का गठन वर्ष 1854 में लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में किया गया था. बाद में संघीय लोक सेवा आयोग पर और राज्य लोक सेवा आयोगों का गठन भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत किया गया था. बिहार लोक सेवा आयोग 1 अप्रैल 1949 को उड़ीसा और मध्य प्रदेश राज्यों के लिए आयोग से अलग होने के बाद अस्तित्व में आया था (Foundation of BPSC). इसकी संवैधानिक स्थिति 26 जनवरी 1950 को भारत के संविधान की घोषणा के साथ घोषित की गई थी. यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत एक संवैधानिक निकाय है. बिहार लोक सेवा आयोग ने शुरू में रांची में मुख्यालय के साथ बिहार राज्य के लिए अपना कामकाज शुरू किया. राज्य सरकार ने आयोग के मुख्यालय को रांची से पटना स्थानांतरित करने का निर्णय लिया और अंततः 1 मार्च 1951 को इसे पटना (Patna) स्थानांतरित कर दिया गया (Headquarter BPSC). बिहार लोक सेवा आयोग के पहले अध्यक्ष श्री राजंधारी सिन्हा थे (BPSC First Chairman) और श्री राधा कृष्ण चौधरी आयोग के पहले सचिव थे (BPSC First Secretary).

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