छत्तीसगढ़ विधान सभा चुनाव 2023 का परिणाम आ चुका है. वहां के 90 सीटों में भाजपा ने 54 सीटों पर जीत दर्ज करते हुए बहुमत हासिल करली है. कांग्रेस को 36 सीटें मिली हैं. छत्तीसगढ़ में 90 सीटों के लिए 2 चरणों 7 नवंबर और 17 नवंबर को वोटिंग हुई थी (Chhattisgarh Assembly Election 2023 Result).
बीजेपी में नेताओं को अब समझ लेना चाहिए कि पॉलिटकल शो बाजी की जगह कार्यकर्ता की तरह काम करने में ही भलाई है. नेता बने, समझो निबटे. कुर्सी के लिए इमेज ब्रैंडिंग करने की जरूरत नहीं है.
भाजपा ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में नए सीएम के नाम का ऐलान कर दिया है. Chattisgarh में विष्णुदेव साय को, जबकि मध्यप्रदेश में मोहन यादव को चुना गया है. दोनों ही राज्यों के नए मुख्यमंत्री करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं.
छत्तीसगढ़ में सरकार की तस्वीर साफ हो गई है. सबसे अधिक चर्चा एक नाम को लेकर हो रही है. वह नाम है विजय शर्मा का. विजय शर्मा छत्तीसगढ़ की नई सरकार में डिप्टी सीएम होंगे. विजय को डिप्टी सीएम बनाने वाले बीजेपी के दांव के पीछे क्या रणनीति है?
छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर दिया है. बीजेपी ने छत्तीसगढ़ के आदिवासी चेहरे विष्णुदेव साय को नया सीएम चुना है. पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के प्रस्ताव से विधायक दल ने बैठक में एक मत से सहमति जताई. विष्णुदेव साय ने ऐलान के बाद राज्यपाल से मुलाकात की. बीजेपी ने राज्य के लिए दो डिप्टी सीएम की घोषणा की है.
बीजेपी ने छत्तीसगढ़ के सीएम पद पर नाम का ऐलान कर दिया है. विष्णुदेव साय को प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है. विष्णुदेव छत्तीसगढ़ बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. 2 साल 68 दिन तक उन्होंने इस जिम्मेदारी को निभाया. साथ ही रायगढ़ सीट से सांसद भी रहे हैं.
Chhattisgarh CM Net Worth : छत्तीसगढ़ में रविवार को सीएम के नाम को लेकर बना सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया है और विष्णुदेव साय को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान किया गया है. राज्य के नए सीएम के पास करीब 3 करोड़ रुपये की संपत्ति है.
5 राज्यों के जिन विधानसभा चुनावों को 2024 के लिए सत्ता का सेमीफाइनल कहा जा रहा था. उन चुनावों में 3 राज्यों में बीजेपी ने जीत दर्ज की. जबकि कांग्रेस को हार मिली. इन नतीजों के बाद इंडिया गठबंधन के भीतर तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं. देखें ये स्पेशल एपिसोड.
छत्तीसगढ़ में चुनाव हारने के मामले को लेकर पार्टी के सीनियर नेता टीएस सिंहदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पार्टी की हार का जिम्मेदार मैं खुद को मानता हूं. उन्होंने कहा कि अभी मैं रिटायर नहीं हो रहा हूं. मैं आगे भी चुनाव लड़ूंगा और पार्टी के लिए लोगों के बीच जाकर काम करूंगा. वहीं कुमारी शैलजा ने कहा कि हार के बाद हम निराश जरूर हुए हैं, लेकिन हताश नहीं हुए. हम हार के कारणों की समीक्षा कर रहे हैं. आने वाले चुनावों में हम लोगों के बीच जाकर मजबूती से काम करेंगे.
बीजेपी ने शुक्रवार को राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को लेकर एक सूची तो जारी की, लेकिन इसमें इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों का नहीं, बल्कि उन्हें चुनने वाले केन्द्रीय पर्यवेक्षकों का नाम था, जो इन राज्यों में जाकर विधायकों के साथ बैठक करेंगे और फिर इसके बाद सीएम के नामों का ऐलान किया जाएगा. देखें ब्लैक एंड व्हाइट
मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ के चुनावी नतीजे आए छह दिन पूरे हो गए. आज तीनों राज्यों में विधायकों की राय लेकर मुख्यमंत्री का चुनाव करने के लिए पर्यवेक्षक चुन लिए गए हैं. सीएम की रेस में नए नाम आगे होने की सुगबुगाहट दिल्ली से भोपाल, जयपुर, रायपुर तक चली है. देखें 10 तक.
चुनावी नतीजे आने के बाद ईवीएम पर फिर सवाल उठने लगे हैं. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने ईवीएम में गड़बड़ी होने का आरोप लगाया है. वहीं, बीजेपी का कहना है कि जब कांग्रेस हार जाती है तो ईवीएम पर सवाल उठाने लगती है. ऐसे में जानते हैं ईवीएम की अब तक की पूरी कहानी...
राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के सीएम का काउंटडाउन शुरु हो चुका है, क्योंकि बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए हैं. राजस्थान के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति बहुत सोच समझ कर की गई है, क्योंकि तीन राज्यों में अगर मुख्यमंत्री को लेकर सबसे ज्यादा सियासत कहीं हो रही है, तो वो राजस्थान ही है. देखें स्पेशल रिपोर्ट.
राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री को लेकर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है. बीजेपी ने तीनों राज्यों में पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए हैं. पुराने या नए चेहरे के बीच फैसला करना बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है. सीएम पद पर जारी इस गहमागहमी पर देखिए सो सॉरी.
राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में सीएम पर सस्पेंस जारी है. बीजेपी ने इसकी जिम्मेदारी अब पर्यवेक्षकों को सौंप दी है. आखिर तीन राज्यों में सीएम की रेस में कौन आगे चल रहा है. सोमवार को मध्यप्रदेश में विधायक दल की बैठक बुलाई गई है. वहीं रविवार को राजनाथ सिंह जयपुर जाएंगे, जहां विधायकों के साथ मुलाकात करेंगे. देखें शंखनाद.
बीजेपी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए पर्यवेक्षक तय कर दिए हैं. तमाम सियासत और कयासों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि तीनों राज्यों की कमान किसे मिलेगी. सूत्रों के मुताबिक, राजनाथ सिंह रविवार को जयपुर जाएंगे. छत्तीसगढ़ के पर्यवेक्षक शनिवार को जयपुर जा सकते हैं. देखें हल्ला बोल.
विधानसभा चुनाव जीतकर आए बीजेपी के 12 में से 11 सांसदों ने सांसदी पद से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफा देने वालों में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और प्रहलाद पटेल भी शामिल हैं. जानते हैं कि इन्हें सांसद के तौर पर कितनी सैलरी मिलती थी और अब विधायक बनने पर कितनी सैलरी कम हो जाएगी?
विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में कुल 21 सांसदों को मैदान में उतारा था. पार्टी की यह रणनीति काम कर गई और 12 सांसदों ने चुनाव जीता है. इनमें तीन केंद्रीय मंत्रियों के नाम शामिल हैं. पार्टी ने इन सभी नेताओं को केंद्र की राजनीति से दूर कर दिया है और उनके गृह राज्य की पॉलिटिक्स में भेजने का फैसला लिया है. माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही इन नेताओं को राज्यों में बड़ी जिम्मेदारी देने वाली है.
राजनाथ सिंह, विनोद तावड़े और सरोज पांडेय को राजस्थान का पर्यवेक्षक बनाया गया है. जबकि मनोहर लाल, के लक्ष्मण, आशा लकड़ा को मध्यप्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है. वहीं छत्तीसगढ़ के लिए अर्जुन मुंडा और सर्वानंद सोनोवाल को चुना गया है. ये पर्यवेक्षक विधायक दल की बैठक में विधायकों की राय लेंगे.
पीएम मोदी की 'गारंटी' पर 3 राज्यों में जीत मिली. चुनावी प्रचार के दौरान मोदी ने वोटरों को अपनी शैली में सतर्क किया, अपनी गारंटी और विपक्ष की गारंटी का फर्क बताया. बीजेपी की टॉप लीडरशिप ने तय किया है कि अब 2024 का पूरा चुनावी अभियान मोदी की गारंटी पर आधारित होगा. देखें ये वीडियो.
बीजेपी ने तीन राज्यों में चुनाव तो जीत लिया, लेकिन अब मुख्यमंत्री के चेहरे चुनने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. बीजेपी की सबसे बड़ी समस्या ये है कि उसके पास तीनों राज्यों में विकल्पों की कोई कमी नहीं है. साथ ही दावेदारों की लिस्ट में तीन पूर्व सीएम हैं. देखें ब्लैक एंड व्हाइट.
बीजेपी ने मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी बिना सीएम चेहरे के चुनाव लड़ा था. पार्टी ने पीएम मोदी के चेहरे और सामूहिक नेतृत्व के दम पर तीनों राज्यों में जीत हासिल की. ऐसे में बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री चेहरे का चुनाव करना है. मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर बीजेपी का मंथन जारी है. लेकिन अभी तक किसी भी राज्य में बीजेपी सीएम चेहरे का ऐलान नहीं कर पाई है.