सिनेमा का कल्चर ही ऐसा रहा है कि शुक्रवार का मतलब होता है नई फिल्मों की रिलीज. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि फिल्में शुक्रवार को ही क्यों रिलीज होती हैं? इसकी शुरुआत कैसे हुई और ये नियम आज भी क्यों निभाया जाता है? और इस वीकेंड की तरह, वो कौन से मौके हैं जब फिल्ममेकर्स ये नियम तोड़ते हैं?
क्या आपने कभी ये ध्यान दिया है कि अक्सर फिल्मों में कार के अंदर शूट हुए सीन्स में आगे की सीटों के हेडरेस्ट गायब होते हैं? कई फिल्मों में ऐसा नहीं भी होता. सवाल ये है कि आखिर ये कब होता है और कब नहीं होता? आइए बताते हैं...
अपने डेढ़-दो सौ साल के इतिहास में सिनेमा और इसकी तकनीक का जिस तरह विकास हुआ है, उसमें यकीनन दुनिया भर के वैज्ञानिकों, आविष्कारकों और टेक्नीशियनों का हाथ है.मगर ये जानकर आप हैरान हो जाएंगे कि लाइट और इमेज के जिस सिद्धांत पर सिनेमा का जन्म हुआ, वो असल में भारत की ही की एक कठपुतली कला से इंस्पायर है.
जो चर्चा में है, वो लाइमलाइट में ही क्यों है? ट्यूबलाइट या फ्लड लाइट में क्यों नहीं? ये लाइमलाइट आती कहां से है और पहली बार ये पड़ी किसपर थी? और सिनेमा से इस लाइमलाइट का क्या लेना देना है? ऐसा करते हैं आज लाइमलाइट को ही जरा लाइमलाइट में ले आते हैं...
सेंसर बोर्ड ने 'बैड न्यूज' में विक्की कौशल और तृप्ति डिमरी के तीन किसिंग सीन काटकर करीब 27 सेकंड छोटे किए थे. सेंसर बोर्ड पहले भी फिल्मों में कई 'आपत्तिजनक' सीन्स कटवाता रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये सेंसर बोर्ड्स 125 साल पहले लगी एक आग की वजह से अस्तित्व में आए? पेश है फिल्म सेंसरशिप का इतिहास.
पिछले हफ्ते इसी कॉलम में हमने आपको बताया था कि बॉक्स-ऑफिस शब्द आया कैसे. भारत में फिल्मों की कमाई कैसे नापी जाती है और एक ही फिल्म की कमाई के अलग-अलग आंकड़े क्यों मिलते हैं. लेकिन क्या एक आम दर्शक को फिल्मों की कमाई से कोई मतलब होना चाहिए? आइए इसपर बात करते हैं...
आखिर फिल्मों की कामयाबी को बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से नापने का सिलसिला शुरू कैसे हुआ? इस बॉक्स ऑफिस में कौन सा बॉक्स है और कौन सा ऑफिस? इसका इतिहास क्या है और शेक्सपियर जैसे अंग्रेजी के महानतम नाटककारों से इसका क्या कनेक्शन है? आइए आज बॉक्स ऑफिस की इस पूरी आभा में गोता लगते हैं...