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धूमकेतु

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धूमकेतु

धूमकेतु 

धूमकेतु (Comet), जिसे पुच्छल तारा (Star with a Tail) भी कहते हैं, सौर मंडल के बर्फीले, छोटे पिंड हैं. यह पत्थर, धूल बर्फ और गैस से बने होते हैं (Comet Formation Materials). यह ग्रहों की तरह सूर्य का चक्कर लगाते हैं. धूमकेतु आमतौर पर अण्डाकार कक्षाओं में सूर्य का चक्कर लगाते हैं. इन्हें अपने कक्षीय पथ के आधार पर सूर्य का एक चक्कर लगाने में 6 से 200 साल तक का समय लगता है, जबकि वलयाकार पथ वाले धूमकेतु एक चक्कर लगाने के लिए हजारों – लाखों वर्षों का समय लेते हैं (Comet Orbital Characteristics). एक धूमकेतु सूर्य के करीब से गुजरने पर गर्म होकर गैसों को छोड़ना शुरू कर देता है, इस प्रक्रिया को आउटगैसिंग कहते हैं, जिसके कारण पृथ्वी से देखने पर यह एक पूंछ वाले खगोलीय पिंड के रूप में नजर आता है (Formation of Comet’s tail). 

धूमकेतु के तीन मुख्य भाग होते हैं, नाभिक, कोमा पूंछ. इसके नाभिक कुछ सौ मीटर से लेकर दसियों किलोमीटर तक फैले होते हैं. यह बर्फ, धूल और छोटे चट्टानी कणों से बने होते हैं. कोमा पृथ्वी के व्यास के 15 गुना तक हो सकता है. सूर्य के करीब होने पर सौर-विकिरण के कारण नाभि की गैस गर्म होकर फैल जाती है. जिससे नाभि का आकार करोड़ों किलोमीटर तक का हो जाता है. वहीं, इससे निकलने वाली गैसें अरबों किलोमीटर की लंबाई में पूंछ का आकार बना लेती है (Parts of Comet).  

नवंबर 2021 तक 4584 धूमकेतुओं के बारे में पता लगाया जा चुका था (Known Comets). एक अनुमान के मुताबिक, बाहरी सौर मंडल (ऊर्ट क्लाउड) में धूमकेतु जैसे लगभग एक ट्रिलियन पिंड हो सकते हैं. मोटे तौर पर हर साल लगभग एक धूमकेतु नंगी आंखों से दिखाई देता है. कुछ प्रसिद्ध धुमकेतुओं में हैली धूमकेतु, धूमकेतु शूमेकर-लेवी 9, और हेल-बॉप धूमकेतु खास हैं (Famous Comets).
 

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