गर्भनिरोधक
गर्भनिरोधक (Contraception) गर्भावस्था को रोकने के लिए एक विधि या उपकरण होता है. गर्भनिरोधक का उपयोग प्राचीन काल से किया जाता रहा है, लेकिन इसके प्रभावी और सुरक्षित तरीके 20वीं शताब्दी में उपलब्ध हुए.
जन्म नियंत्रण के सबसे प्रभावी तरीके पुरुषों में नसबंदी (Vasectomy) और महिलाओं में ट्यूबल बंधन (Tubal ligation), इंट्रायूटरिन डिवाइस (IUD) और इंप्लांटेबल बर्थ कंट्रोल (implantable birth control) हैं. इसके अलावा कई हार्मोन-आधारित तरीके भी अपनाए जाते हैं जिनमें ओरल पिल्स (oral pills), पैच (patches), वजाइनल रिंग्स (vaginal rings) और इंजेक्शन (injections) शामिल हैं. कम प्रभावी तरीकों में कंडोम (condoms), डायाफ्राम (Diaphragms) और जन्म नियंत्रण स्पंज (Birth control sponges) और प्रजनन जागरूकता विधियां शामिल हैं. यदि असुरक्षित यौन संबंध के बाद 72 से 120 घंटों के भीतर आपातकालीन गर्भनिरोधक लिया जाए तो गर्भधारण को रोका जा सकता है. कुछ लोगों का तर्क है कि सेक्स न करना भी जन्म नियंत्रण का एक तरीका है. कुछ गर्भनिरोध के तरीकों को बच्चे के जन्म के तुरंत बाद शुरू किया जा सकता है, जबकि कुछ में छह महीने तक की देरी की आवश्यकता होती है. रजोनिवृत्ति तक पहुंचने वाली महिलाओं में अंतिम अवधि के बाद एक वर्ष तक गर्भनिरोधक जारी रखा जा सकता है (Methods of Contraceptions).
सबसे प्रभावी तरीके वे हैं जो लंबे समय तक काम करते हैं और जिसमें स्वास्थ्य से जुड़ी कोई खास चिंता नहीं होती है. गर्भनिरोधक के प्रथम वर्ष की विफलता दर 1% से कम है (Contraceptions Failure Rates).
1909 में, रिचर्ड रिक्टर (Richard Richter) ने रेशमकीट की आंत से बना पहला अंतर्गर्भाशयी उपकरण विकसित किया, जिसे 1920 के दशक के अंत में अर्न्स्ट ग्रैफेनबर्ग ने जर्मनी में और विकसित किया था. इस बीच, ग्रेगरी पिंकस (Gregory Pincus) और जॉन रॉक (John Rock) ने प्लान्ड पेरेंटहुड फेडरेशन ऑफ अमेरिका की मदद से 1950 के दशक में मेस्ट्रानोल / नोरेटिनोड्रेल (Mestranol/Noretynodrel Pills) जैसी पहली गर्भनिरोधक गोलियां विकसित कीं, जो 1960 के दशक में एनोविड नाम से बाजार में उपलब्ध हो गई (History of Contraceptions Pills).
अमेरिका में उन महिलाओं की संख्या बढ़ रही है जो अपना गर्भपात खुद ही कर रही हैं. वे जड़ी-बूटियां खाकर, शराब या नशे की दवाएं लेकर, यहां तक कि पेट पर चोट पहुंचाकर भी अबॉर्शन की कोशिश करने लगी हैं. इस चुनाव में गर्भपात का हक एक बड़ा मुद्दा है. दुनिया के सबसे मॉर्डन देश कहलाते अमेरिका में अबॉर्शन हमेशा से गैरकानूनी नहीं था.
दुनिया में पहली बार ऐसा बच्चा पैदा किया गया है, जिसे कोई जेनेटिक बीमारी नहीं होगी. न ही उसके माता-पिता से उसे मिलेगी. इस बच्चे में सिर्फ माता-पिता का डीएनए नहीं है. बल्कि एक और इंसान का डीएनए भी शामिल है. यानी तीन लोगों के डीएनए से यह बच्चा तैयार किया गया है. ये है आज की दुनिया का सुपरकिड.
दुनिया में पहली बार ऐसा बच्चा पैदा किया गया है, जिसे कोई जेनेटिक बीमारी नहीं होगी. न ही उसके माता-पिता से उसे मिलेगी.
रोबोट ने दो बच्चियों को पैदा करवाया है. भविष्य में रोबोट्स ही ये काम करेंगे. हैरानी इस बात की है रोबोट को यह काम करने में गेमिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लेस्टेशन 5 के कंट्रोलर का उपयोग किया गया. यानी रोबोट के साथ-साथ गेमिंग कंसोल को बच्चा पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया गया.
दुनिया में पहली बार ऐसा हुआ है जब इंजीनियर्ड भ्रूण के जरिए बंदर को प्रेगनेंट किया गया. इसके लिए बंदर के ही स्टेम सेल को लिया गया था. उसे लैब में भ्रूण जैसे विकसित किया गया. फिर सरोगेट बंदर के गर्भाशय में डाल दिया गया. अब तक गर्भधारण की स्थिति ठीक है. भ्रूण और सभी गर्भवती बंदरिया स्वस्थ हैं.
तालिबान ने अब अफगानिस्तान के दो प्रांतों में गर्भ निरोधक दवाओं के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है. तालिबान को ऐसा लग रहा है कि मुस्लिम आबादी को कंट्रोल करने के लिए इन गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल किया जाता है.
वैज्ञानिक अब पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक गोलियां बनाने पर काम कर रहे हैं. इस क्षेत्र में उन्हें एक बड़ी सफलता भी मिली है. वैज्ञानिकों ने एक ऐसी गोली बना ली है जो चूहों पर सफल रही है. अब इस प्रयोग को प्रीक्लिनिकल मॉडल में दोहराने के बाद मनुष्यों पर इनका क्लिनिकल ट्रायल किया जाएगा.
30 साल की महिला ने दावा किया है कि गर्भनिरोधक गोली बंद करने से उसकी सेक्शुअलिटी पर प्रभाव पड़ा. वह पुरुषों के बजाय महिलाओं की ओर आकर्षित होने लगी. महिला का कहना है कि वह Heterosexual से लेस्बियन (Lesbian) हो गई है. उसने अपने लिए एक महिला पार्टनर भी खोज लिया है.
भविष्य में इंसानों के बच्चे मशीन पैदा करेंगे. न महिला को गर्भधारण करना होगा. न लेबर पेन झेलना होगा. साइंस कम्यूनिकेटर हाशेम अल घैली ने एक वीडियो जारी किया है. जिसमें दुनिया का पहला कृत्रिम भ्रूण केंद्र दिखाया गया है. इसमें बच्चे को विकसित होते आप देख सकते हैं. उसमें अच्छी आदतें डलवा सकते हैं. देखें Photos-Video.
उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ में लिंग परीक्षण करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. इस दौरान 6 महिलाओं सहित 5 पुरुषों को पकड़ा गया है. पकड़ी गई महिलाओं का लिंग परीक्षण करवाकर गिरोह छोड़कर चला गया था. इसमें पता चला कि गुलावठी के पास गांव भटौना में एक घर में लिंग परीक्षण कराया जाता था.
भारत में गर्भपात से जुड़े आंकड़े कई पहलुओं का खुलासा करते हैं. देश में हर साल जितना भी गर्भपात होता है उसमें से आधा सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि वो अनचाहा गर्भ था. लगभग 27 प्रतिशत महिलाएं अबॉर्शन करवाने के लिए अस्पताल नहीं जाती है बल्कि इस जटिल मेडिकल प्रक्रिया को वो दोस्तों और परिवार की सहायता से घर पर ही करती है.
गर्भपात पर गुरुवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने अविवाहित और विवाहित महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के पक्ष में खुलकर पैरवी की है. अदालत ने सिंगल महिलाओं को 24 हफ्ते तक गर्भपात कराने की अनुमति दी है तो विवाहित महिलाओं की यौन स्वायतता के हक में कई टिप्पणियां की है और मैरिटल रेप को MTP एक्ट के तहत रेप की कैटेगरी में रखा है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भारत में अविवाहित महिलाओं को भी MTP एक्ट के तहत गर्भपात का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने विवाहित और अविवाहित महिलाओं के बीच गर्भपात के अधिकार को मिटाते हुए अपने फैसले मे कहा है कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट से अविवाहित महिलाओं को बाहर करना असंवैधानिक है.
गर्भ में बच्चा के चेहरे का भाव तब बदल जाता है, जब मां कुछ अजीब खा रही हो. इंग्लैंड में इसी बार पर स्टडी की गई कि क्या मां के खाने से गर्भ में पल रहे बच्चे का एक्सप्रेशन बदलता है. इस हाव-भाव की 4डी अल्ट्रासाउंड से शूटिंग की गई. बच्चों ने खराब खाने पर गंदे और अजीब एक्सप्रेशन दिए.
अब क्या सिंथेटिक बच्चे पैदा होंगे? आखिरकार सिंथेटिक भ्रूण बनाने की जरुरत किसी बायोटेक फर्म को क्यों पड़ रही है. एक बायोटेक कंपनी ने कहा है कि अब वह इंसानों का भ्रूण सिंथेटिक तौर पर विकसित करेगा. भ्रूण बनाने का मतलब सिंथेटिक जीवन को जन्म देना. यानी इंसानों का भविष्य नकली होने वाला है.
कंडोम भारत में निरोध के नाम से बिकता है. निरोध यानी कि सुरक्षा. भारत में आबादी की समस्या आज नहीं बल्कि आजादी के समय से ही थी. आजादी मिलते ही तत्कालीन नेहरू सरकार ने परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू किया. भारत में कंडोम लॉन्च करने पर सहमति बनी थी. समस्या थी कि नाम क्या दिया जाए? एक नाम उभरकर आया कामराज. लेकिन तब कामराज नाम का एक शख्स भारत की राजनीति में शीर्ष पर बैठा हुआ था.
Why Chainsaw Invented: जब हम किसी चेन सॉ (Chainsaw) या बिजली से चलने वाली आरी को देखते हैं तो पहला ख्याल क्या आता है. यही कि यह लकड़ी काटने के काम आता है. लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इसे लकड़ी काटने के लिए नहीं, बल्कि प्रसव यानी डिलिवरी कराने के लिए बनाया गया था. जानिए इस शानदार औजार की कहानी...