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कोरोनल मास इजेक्शन

कोरोनल मास इजेक्शन

कोरोनल मास इजेक्शन

कोरोनल मास इजेक्शन 

एक कोरोनल मास इजेक्शन (Coronal Mass Ejection) सूर्य के कोरोना से सौर हवा में प्लाज्मा और साथ में चुंबकीय क्षेत्र के रिलीज होने की एक घटना है (Release of Plasma and Magnetic Field from Sun's Corona). कोरोनल मास इजेक्शन ज्यादातर मौके पर सौर ज्वाला या तरंग और सौर गतिविधि के अन्य रूपों से जुड़े होते हैं.

अगर कोई कोरोनल मास इजेक्शन इंटरप्लानेटरी स्पेस में प्रवेश करता है, तो इसे इंटरप्लानेटरी कोरोनल मास इजेक्शन (ICME) कहा जाता है. आईसीएमई पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर तक पहुंचने और टकराने में सक्षम हैं, जहां वे भू-चुंबकीय तूफान, औरोरा और कुछ मामलों में विद्युत पावर ग्रिड को नुकसान पहुंचा सकते हैं. अब तक की सबसे बड़ी रिकॉर्ड की गई भू-चुंबकीय गड़बड़ी, संभवतः एक सीएमई, 1859 के सौर तूफान से उत्पन्न हुआ था. इसे कैरिंगटन इवेंट के रूप में भी जाना जाता है, इसने उस समय के नव निर्मित संयुक्त राज्य टेलीग्राफ नेटवर्क के कुछ हिस्सों को निष्क्रिय कर दिया था, आग लग गई थी और कुछ टेलीग्राफ ऑपरेटरों को झटके भी लगे थे (Effects of Coronal Mass Ejection). 

सोलर मैक्सिमा (Solar Maxima) के पास, सूर्य हर दिन लगभग तीन सीएमई पैदा करता है, जबकि सोलर मिनिमा (Solar Minima) के पास, हर पांच दिनों में लगभग एक सीएमई होता है.
 

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