राजधानी दिल्ली के विवेक विहार में 25 मई 2024 को रात में शिशु देखभाल केंद्र में आग लगने से 7 बच्चों की मौत हो गई. वहीं 5 बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं. अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली बेबी केयर से 12 नवजात बच्चों को रेस्क्यू कराया गया. दिल्ली पुलिस ने बेबी केयर सेंटर के मालिक डॉक्टर नवीन खिची और घटना के वक्त ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर आकाश को गिरफ्तार कर लिया है. नवीन को दिल्ली के पश्चिम विहार से गिरफ्तार किया गया. नवीन के दिल्ली में कई बेबी केयर सेंटर चलते हैं. दिल्ली पुलिस ने मामले में IPC 304 और IPC की धारा 308 जोड़ा है.
इस हादसे में सिलेंडर ब्लास्ट हुआ जिससे, आस-पास के मकान के शीशे टूट गए. बिल्डिंग में आग लड़ने से कुछ पदार्थ बिल्डिंग के पास बने ITI कॉलेज में गिरे, जिससे वहां भी आग लग गई. आग की चपेट में कुछ गाड़ियां भी आ गई थी (Delhi Baby Care Agnikand).
दिल्ली के एक बेबी केयर सेंटर में आग लगने से कई नवजात बच्चों की मौत के बाद एलजी के निर्देशों पर ACB की टीम ने एक्शन लेते हुए शुक्रवार को 62 अस्पतालों पर छापेमारी की है. टीम ने 40 अस्पतालों में खामियां मिली हैं. साथ ही 4 अस्पताल अवैध रूप से चलते हुए मिले हैं.
दिल्ली के विवेक विहार में स्थिति बेबी केयर न्यूबॉर्न हॉस्पिटल में बीते शनिवार की रात को आग लगने से 7 नवजातों की मौत हो गई थी. ये संख्या और ज्यादा होती, अगर दिल्ली फायर सर्विस के ये पांच जांबाज कर्मचारी नहीं होते.
फायर और एमसीडी के आला अधिकारियों ने माना कि पूरी दिल्ली में कहीं ना कहीं बिना फायर एनओसी के अस्पताल और नर्सिंग होम चल रहे हैं. विवेक विहार ग्राउंड प्लस वन बिल्डिंग थी. फायर विभाग को पता चला है कि कुछ कमरे ऊपर बना रखे थे और टीन शेड डाला गया था
दिल्ली के बेबी केयर सेंटर में हुए अग्निकांड में बच्चा गंवाने वाले एक गरीब पिता की मदद के लिए कई लोग सामने आए हैं. इस पर उस पिता ने बताया कि अपने बच्चे के इलाज के लिए उसने ब्याज पर पैसे लिए थे, अब इन पैसों से मैं वो कर्ज चुकाऊंगा. देखें वीडियो.
दिल्ली के विवेक विहार स्थित बेबी केयर अस्पताल में आग लगने के बाद जहां स्टाफ मौके से भाग गया, वहीं एक आम आदमी ने आग में फंसे बच्चों को बचाने के लिए बड़ी बहादुरी दिखाई. उसने अपनी जान की परवाह किए बिना बच्चों को आग से बचाया. देखें वीडियो.
दिल्ली के एक अस्पताल में हुई आग में एक गरीब माली ने अपने 17 दिन के बच्चे को खो दिया. उन्होंने अपने बच्चे को बड़े भरोसे के साथ अस्पताल में छोड़ा था, लेकिन उनका यह भरोसा टूट गया. उन्होंने अस्पताल और पुलिस से अपने बच्चे की मौत की कोई सूचना नहीं मिली. उन्होंने अपने बच्चे की मौत के लिए अस्पताल की लापरवाही को दोषी माना है और न्याय की मांग की है. इस मजबूर पिता ने क्या बताया, देखें वीडियो.
दिल्ली के विवेक विहार स्थित बेबी केयर अस्पताल में हुए अग्निकांड में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, अस्पताल में 30 ऑक्सीजन सिलेंडर मिले, जिसकी आवश्यकता इतनी छोटे अस्पताल में नहीं थी. आसपास मौजूद लोगों ने क्या बताया, देखें वीडियो.
दिल्ली के विवेक विहार स्थित एक बेबी केयर अस्पताल में लगी भीषण आग में कई बच्चों की जिंदगी चली गई. हालांकि, इन हालात में भी कुछ आम नागरिकों ने अपनी जान की परवाह किए बिना कई बच्चों को बचाया. इन लोगों ने आजतक को हादसे के वक्त की पूरी कहानी सुनाई है. देखें वीडियो.
दिल्ली में उपराज्यपाल विनय कुमार के आदेश पर भ्रष्टाचार निरोधक शाखा दिल्ली में नर्सिंग होम के पंजीकरण और इसे चलाने को लेकर जांच करेगी. अग्निकांड के बाद एलजी ने यह आदेश जारी किया है. देखें वीडियो.
दिल्ली के विवेक विहार इलाके में बेबी केयर सेंटर में दर्दनाक हादसा हुआ. यहां आगजनी में 7 नवजातों की जान चली गई. हादसे के बाद इस चाइल्ड हॉस्पिटल के बारे में कई खुलासे हुए हैं. लाइसेंस रद्द होने के बावजूद ये सेंटर चल रहा था. ब्लैक एंड व्हाइट में देखें विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट.
एलजी ने मुख्य सचिव को दिए निर्देश में कहा, "जांच के दौरान यह स्पष्ट रूप से पता लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग ने रजिस्ट्रेशन या उसके रेनोवेशन की मंजूरी 100 फीसदी साइट निरीक्षण के बाद दी थी या नहीं." एलजी ने शहर में तमाम नर्सिंग होम के फील्ड वेरिफिकेशन के निर्देश दिए हैं.
दिल्ली के बेबी केयर सेंटर की आग में जान गंवा चुके बच्चे के पिता का रो-रोकर बुरा हाल है. पीड़ित पिता ने कहा कि मैं यहां अपने बच्चे से मिलने आया हूं. मैं उसे लिए बिना यहां से नहीं जाऊंगा. मैं PM मोदी से इंसाफ मांगता हूं. मैं अरविंद केजरीवाल से न्याय मांगता हूं.
दिल्ली में अस्पतालों और नर्सिंग होम के लिए फायर एनओसी हासिल करना अक्सर नौकरशाही में उलझ जाता है. लेकिन सवाल ये है कि इस एनओसी को हासिल करने के लिए राजधानी के अस्पतालों और नर्सिंग होम के लिए क्या दिशानिर्देश हैं? इंडिया टुडे की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने इस अग्निकांड के दो किलोमीटर के दायरे में आने वाले तीन नर्सिंग होम की जांच की. इस जांच में पता चला कि किस तरह से छूट और सतर्कता की कमी की आड़ में निर्दोष लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है.
बेबी केयर न्यू बोर्न हॉस्पिटल के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में साफ-साफ लिखा है कि 31 मार्च 2024 को मान्यता खत्म हो रही है. यह सर्टिफिकेट 30 सितंबर 2021 को जारी किया गया था. हैरानी की बात ये है कि इस सार्टिफकेट में साफ-साफ ये भी लिखा है कि वहां केवल 5 बेड तक ही मान्य होंगे.
दिल्ली के विवेक विहार स्थित बेबी केयर सेंटर में आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई. आग की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने बिना देर किए सेंटर से नवजात को बाहर निकालना शुरू कर दिया. टीम ने बताया कि 11 नवजात बच्चों को रेस्क्यू किया गया है.
दिल्ली सरकार ने सभी छोटे-बड़े प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों को 8 जून 2024 तक फायर ऑडिट कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं. नर्सिंग होम या अस्पताल के रजिस्ट्रेशन फॉर्म में भी बदलाव किया जाएगा. फॉर्म में Smoke Detector, Fire Extinguishers और Water Sprinkler के बिल्डिंग में लगे होने की जानकारी देना होगा अनिवार्य होगा.
राजधानी दिल्ली के बेबी केयर न्यू बॉर्न हॉस्पिटल में शनिवार रात आग लगने से 7 नवजातों की मौत हो गई. पुलिस ने इस मामले में अस्पताल के मालिक डॉक्टर नवीन खींची और ऑन ड्यूटी डॉक्टर आकाश को गिरफ्तार कर लिया है.
सोमवार को डॉ. नवीन ओर डॉ आकाश को लेकर पुलिस कड़कड़डूमा कोर्ट में पेश करने के लिए निकली. कुछ देर बार दोनों आरोपियों की कोर्ट में पेशी हुई और यहां पुलिस ने 5 दिन की रिमांड की मांग की. कोर्ट ने ये मांग मान ली है. पुलिस लगातार बेबी केयर सेंटर से जुड़ी तमाम जानकारी जुटाने में लगी है.
दिल्ली के विवेक विहार में बेबी केयर न्यू बोर्न हॉस्पिटल में हुए अग्निकांड ने हर किसी का दिल दहला दिया है. यहां सात मासूम बच्चों की आग से जलकर मौत हो गई है. इनमें से पांच बच्चों के शव पोस्टमार्टम के बाद उनके परिवारों को सौंप दिए गए हैं.
दिल्ली के बेबी केयर सेंटर में आग में सात बच्चों की मौत हो गई. अब FIR की कॉपी में इस बात का पता चला कि मौके पर 5 ऑक्सीजन सिलेंडर फटे हुए मिले. दिल्ली पुलिस की जांच में ये खुलासा हुआ कि इस बेबी केयर सेंटर का लाइसेंस खत्म हो गया था, फिर भी फर्जी तरीके से ये चल रहा था. देखें खबरदार.
दिल्ली पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि 31 मार्च को नर्सिंग होम की परमिशन खत्म हो गई थी. दिल्ली सरकार का हेल्थ डिपार्टमेंट ये परमिशन देता है. यानी अवैध तरीके से नर्सिंग होम चलाया जा रहा था. नर्सिंग होम को 5 बेड की परमिशन थी लेकिन 25-30 बच्चे रखे जा रहे थे. हादसे के वक्त 12 बच्चों को रेस्क्यू किया गया.