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विमुद्रीकरण (नोटबंदी, Demonetisation)

विमुद्रीकरण (नोटबंदी) (Demonetisation) को मुद्रा इकाइयों की ‘लीगल टेंडर स्टेटस’ अथवा कानूनी निविदा स्थिति को हटाने के कार्य के रूप में परिभाषित किया गया है. यह तब हो सकता है जब राष्ट्रीय मुद्रा बदली जाती है. यदि इसे आचानक और बिना किसी चेतावनी के लागू किया जाए तो यह किसी देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है, ऐसा इसलिए है क्योंकि यह आर्थिक लेनदेन में एक्सचेंज मिडियम को सीधे प्रभावित करता है (What is Demonetisation?).

दुनिया भर के अधिकांश देशों ने किसी न किसी समय विमुद्रीकरण का उपयोग किया है और यह मुद्रास्फीति (इनफ्लेशन) (inflation) जैसी स्थितियों को नियंत्रित करने और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है. भारत सरकार ने नवंबर 2016 में जालसाजी और मनी लॉन्ड्रिंग (Money laundering) को रोकने के लिए 1000 और 500 रुपये के उच्च मूल्यवर्ग के नोटों पर प्रतिबंध लगा दिया.

भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 नवंबर को भारत में भ्रष्टाचार, काले धन और जालसाजी की समस्याओं को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए एक योजना बनाई. इस योजना के तहत 1000 और 500 रुपये के सभी नोटों को बंद करने का फैसला लिया. प्रधान मंत्री मोदी के इस फैसले को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं मिली साथ ही पूरी दुनिया में सुर्खियां भी बटोरीं (Corruption, Black Money).

लगभग 86 फीसदी करेंसी को नवंबर 2016 के आधी रात से अमान्य घोषित कर दिया गया. विमुद्रीकरण (Demonetisation) को तीन मुख्य उद्देश्य के तहत लागू करना था, काले धन, नकली नोटों से लड़ना और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देकर कैशलेस अर्थव्यवस्था बनाना.
 

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