मरूस्थलीय जीव
रेगिस्तान में रहने के लिए अनुकूलित जानवरों को जेरोकॉल (Xerocoles) कहा जाता है. कई मरूस्थलीय जीव (Desert Fauna) जल संरक्षण या गर्मी सहनशीलता के लिए विशेष रूप से अनुकूलित होते हैं. रेगिस्तानी जीवों में विकास के कई खास उदाहरणों की पहचान की गई है, जिनमें कैक्टि और यूफोरबिया, कंगारू चूहे, जेरोबा, फ्रीनोसोमा और मोलोच छिपकलियां शामिल हैं (Best Adapted Desert Fauna).
रेगिस्तान जानवरों के लिए एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण वातावरण प्रस्तुत करता है. उन्हें न केवल भोजन और पानी की आवश्यकता होती है, बल्कि उन्हें अपने शरीर के तापमान को इसे सहन करने के स्तर पर रखने की भी आवश्यकता होती है. कई मायनों में, खाद्य उपलब्धता वाले क्षेत्रों में जाने की सुविधा के कारण पक्षी और उच्च स्तर के जानवर ऐसा करने में सक्षम हैं. वे स्थानीय वर्षा के बाद रेगिस्तान में दूर के जलकुंडों में उड़कर जा सकते हैं. गर्म रेगिस्तान में, ग्लाइडिंग पक्षी बड़ी ऊंचाई पर ठंडी हवा में उड़ सकते हैं. ऊर्जा बचाने के लिए, अन्य रेगिस्तानी पक्षी उड़ने के बजाय दौड़ते हैं (Birds Ablest to Desert Life).
पानी और कार्बन डाइऑक्साइड वसा, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट के ऑक्सीकरण के उपापचयी उत्पाद हैं. एक ग्राम कार्बोहाइड्रेट के ऑक्सीकरण से 0.60 ग्राम पानी बनता है, एक ग्राम प्रोटीन 0.41 ग्राम पानी पैदा करता है, और एक ग्राम वसा से 1.07 ग्राम पानी पैदा होता है, जिससे जेरोकॉल्स के लिए पीने के पानी की बहुत कम या बिना पहुंच के रहना संभव हो जाता है (Desert Fauna Adaptation). कंगारू चूहा मेटाबॉलिज्म के इस पानी का उपयोग करता है और कम मेटाबॉलिक रेट और दिन की गर्मी के दौरान जमीन के अंदर रहकर शरीर में पानी को बचाता है. शाकाहारी स्तनधारी पौधों को खाकर उससे नमी प्राप्त करते हैं. ऊंट रेगिस्तानी जीवन के लिए अनुकूलित स्तनपायी का एक शानदार उदाहरण है (Camel Best Example of Mammal Adapted to Desert Life). यह कंसंट्रेटेड यूरिन और सूखा गोबर करके अपने पानी के नुकसान को कम करता है. रेगिस्तानी ऊंट पानी की कमी से मरने से बचने के लिए अपने शरीर के वजन का 40% तक कम करने में सक्षम है. मांसाहारी अपने शिकार के शरीर के तरल पदार्थों से अपनी पानी की अधिकांश जरूरतें प्राप्त करते हैं (Carnivores Adaptation to Desert Life).
रेगिस्तान में रहने वाले सांप शिकार की तलाश में रात में बाहर निकलते हैं. इनमें अफ्रीका के सींग वाले वाइपर और उत्तरी अमेरिका के साइडवाइंडर शामिल हैं (Reptiles in Deserts).
अकशेरूकीय जीवों में, खासकर आर्थ्रोपोड ने रेगिस्तान में अपना घर बना लिया है. मक्खियों, चींटियों, दीमक, टिड्डियों, बिच्छूओं और मकड़ियों में कठोर क्यूटिकल्स होते हैं और उनके अंदर पानी का प्रवेश संभव नहीं होता है (Invertebrates in Deserts).
समुद्र से निकलेंगे भयानक जीव, इंसानों की बस्ती पर करेंगे हमला... खतरनाक है अगला सामूहिक विनाश
35 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर सामूहिक विनाश की शुरुआत हुई थी. तब वजह थी बढ़ते समुद्री जलस्तर में घटता ऑक्सीजन और बढ़ता हाइड्रोजन सल्फाइड. आज फिर वैसी ही स्थिति बनती दिख रही है. यानी अब जो सामूहिक विनाश चल रहा है, उसमें समुद्र का बड़ा योगदान है. बढ़ते समुद्री जलस्तर से ही दुनिया खत्म होगी.
धरती से सिर्फ डायनासोरों का ही सामूहिक विनाश नहीं हुआ था. वैज्ञानिकों ने यह पता कर लिया है कि हमारी पृथ्वी से सबसे पहले किन जीवों का सामूहिक विनाश हुआ था. भविष्य में किसका खात्मा होगा. पृथ्वी ने अब तक पांच बड़े सामूहिक विनाश देखें हैं. छठां विनाश शुरू हो चुका है. जानिए पहले और आखिरी विनाश के बारे में...
पिछले 100 सालों में दुनिया से ये 16 जीव नष्ट हो चुके हैं. यानी खत्म हो चुके हैं. विलुप्त हो चुके हैं. इसकी वजह है इंसान की लालच और उसके द्वारा फैलाया गया प्रदूषण. इंसानों द्वारा किया जाने वाला बेहिसाब शिकार, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती हुई वैश्विक गर्मी में ये जीव खुद को बचा नहीं पाए.
Three Limb Parrot: इन्हें कुछ लोग लव बर्ड्स (Love Birds) कहते हैं. कुछ लोग छोटा तोता. लेकिन आप ये जानकर हैरान होंगे कि ये चलने के लिए 'तीन पैरों' का उपयोग करते हैं. वैज्ञानिक इनके इस जुगाड़ को देखकर हैरान हैं. वो इन लव बर्ड्स के चलने की तकनीक पर स्टडी कर रहे हैं.