मेरठ में मुस्कान वाले केस और ऐसे कई मामलों के बीच पति समुदाय ने पत्नियों के लिए ट्रेडिशनली चले आ रहे सपाट-नॉन क्रिएटिव-हल्के चुटकुलों को नए तरह से मोडिफाई करके फिर से मार्किट में घुमा दिया. इस चुहलबाजी में एक पुराना गाना काफी लोगों की सोशल मीडिया पोस्ट में सुनाई देने लगा- 'मुझे मेरी बीवी से बचाओ.'
इमरान हाशमी के करियर में 'आवारापन' वो फिल्म बनकर आई थी जिसकी हाईलाइट उनकी एक्टिंग थी. आज इसे एक कल्ट फिल्म माना जाता है. लेकिन क्या आपको पता है कि इमरान की इस फिल्म को लेकर पाकिस्तान में कितना विवाद हुआ था? आइए बताते हैं...
आलिया भट्ट के चुलबुलेपन, सिद्धार्थ मल्होत्रा के कन्फ्यूज छोटे भाई वाले कैरेक्टर और खट्टी-मीठी पारिवारिक नोंकझोंक से हटकर 'कपूर एंड सन्स' एक और मामले में बहुत खास थी. फिल्म में फवाद खान ने एक गे किरदार निभाया था. मगर जिस तरह उन्होंने ये किरदार निभाया था, उसने अपने आप में बॉलीवुड में एक बड़ी चीज बदली थी.
एक तरफ अनुष्का के पास 'पीके', 'सुल्तान' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में थीं, जो उन्हें दीपिका पादुकोण के टक्कर में खड़ा करती थीं. दूसरी तरफ वो 'सुई धागा' और 'परी' जैसी फिल्मों में एक्सपरिमेंट कर रही थीं. और इस एक्सपरिमेंट की शुरुआत जिस फिल्म से हुई उसे फिल्म लवर्स आज भी एक कल्ट थ्रिलर मानते हैं. ये फिल्म है 'NH 10'.
'लाल बादशाह' एक तरफ तो अमिताभ के साथ जवान हुए लोगों के लिए नाक-भौं सिकोड़ने वाली फिल्म थी. क्योंकि अपने हमउम्र अमिताभ को, अपने बच्चों की उम्र वाली एक्ट्रेसेज के साथ रोमांस करते देखना उस दौर में एक पचाने वाली बात नहीं थी. दूसरी तरफ अमिताभ को फिल्म के लिए उस दौर की सबसे महंगी फीस मिली थी.
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली 'रंग दे बसंती' का आज रिलीज होना लोगों को मुश्किल क्यों लगता है? शायद इस बात का जवाब उस असर में छुपा है जो डायरेक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा की 'रंग दे बसंती' ने लोगों के दिल-दिमाग पर छोड़ा था. उस असर को तब खबरों में RDB (रंग दे बसंती) इफेक्ट कहा जाता था.
राज कपूर एक तरफ 'अंदाज' शूट कर रहे थे और दूसरी तरफ अपनी अगली फिल्म 'बरसात' की प्लानिंग शुरू कर चुके थे. फिल्म की कास्टिंग में सारी कड़ियां फिट हो चुकी थीं, लेकिन राज को सेकंड लीड रोल के लिए ऐसी एक्ट्रेस नहीं मिल रही थी, जिसमें 'गांव की गोरी' वाला नेचुरल भोलापन हो, जैसा 'बरसात' के किरदार में लिखा गया है.
'कच्चे धागे' को रिलीज के बाद रिव्यू बहुत अच्छे नहीं मिले थे लेकिन गानों, अजय की परफॉरमेंस और एक्शन ने इस फिल्म को धीरे-धीरे एक कल्ट फॉलोइंग दिला दी. 'कच्चे धागे' ने पर्दे पर जनता को जितना एंटरटेन किया, इसके बनने के वक्त की कुछ कहानियां भी उतनी ही दिलचस्प हैं.
क्या आपको पता है कि अमिताभ ने जिस तरह ये डायलॉग फिल्म में बोला, आवाज बदलने का उनका वो अंदाज शुरुआत में जनता को बिल्कुल भी पसंद नहीं आया था. आज बॉलीवुड की कल्ट-क्लासिक बन चुकी 'अग्निपथ' से जुड़ी कई ऐसी दिलचस्प बातें हैं जिन्हें जानने के बाद ये फिल्म दोबारा देखने में आपको और मजा आने लगेगा.