World Poetry Day 2024: पोएट्री की दुनिया अदब यानी साहित्य की ज़मीन पर बसी एक बस्ती जैसी होती है, जिसमें हर तरह के लोगों का गुज़र-बसर हो जाता है. इस बस्ती को दूर से देखने वाले लोग शायरी और शायर दोनों को अलग-अलग नज़र से देखते हैं लेकिन उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी साहित्य के क़लमकारों का इसको लेकर क्या कहना है? वसीम बरेलवी, तहज़ीब हाफ़ी और गीत चतुर्वेदी ने शायरी और कविता के बारे में क्या कहा?