गोटबाया राजपक्षे
नंदसेना गोटबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) एक श्रीलंकाई राजनेता और पूर्व सैन्य अधिकारी हैं. उन्होंने 2019 से 2022 तक श्रीलंका के आठवें राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया. वह अपने बड़े भाई, पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के प्रशासन के तहत 2005 से 2015 तक रक्षा और शहरी विकास मंत्रालय के सचिव के रूप में कार्यरत थे. राजपक्षे ने 9 जुलाई 2022 को अपने इस्तीफे की घोषणा की और 13 जुलाई 2022 को इस्तीफा दे दिया (Gotabaya Rajapaksa Resign). वह वर्तमान में अपने कार्यकाल के बीच में इस्तीफा देने वाले श्रीलंका के एकमात्र राष्ट्रपति हैं (Gotabaya Rajapaksa Former President of Sri Lanka).
गोटबाया राजपक्षे का जन्म 20 जून 1949 मतारा जिले के पलातुवा में हुआ था (Gotabaya Rajapaksa Age). उनके नौ भाई-बहन हैं. हंबनटोटा के दक्षिणी ग्रामीण जिले के वीरकेतिया में उनका पालन-पोषण हुआ. वह श्रीलंका के एक प्रसिद्ध राजनीतिक परिवार से हैं. उनके पिता, डी ए राजपक्षे, एक प्रमुख राजनेता, स्वतंत्रता आंदोलनकारी, संसद सदस्य, उपाध्यक्ष और विजयानंद दहनायके की सरकार में कृषि और भूमि मंत्री थे. उनके बड़े भाई, महिंदा राजपक्षे पहली बार 1970 में 24 साल की उम्र में श्रीलंका फ्रीडम पार्टी के सदस्य के रूप में संसद के लिए चुने गए थे, जो धीरे-धीरे पार्टी रैंक के माध्यम से 2001 में विपक्ष के नेता बने, 2004 में प्रधानमंत्री बने और 2005 में श्रीलंका के राष्ट्रपति बने. उनके दो अन्य भाई, चमल राजपक्षे और तुलसी राजपक्षे भी वर्तमान संसद सदस्य हैं (Gotabaya Rajapaksa Family). उनकी पत्नि का नाम इओमा राजपक्षे है (Gotabaya Rajapaksa Wife).
राजपक्षे ने अपनी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा आनंद कॉलेज, कोलंबो में प्राप्त की. उन्होंने कोलंबो विश्वविद्यालय से सूचना प्रौद्योगिकी में स्नातकोत्तर डिप्लोमा की और 1992 में एक मार्केटिंग मैनेजर के रूप में कोलंबो स्थित एक आईटी फर्म इंफॉर्मेटिक्स में शामिल हो गए. बाद में वे 1998 में संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए और लोयोला लॉ स्कूल में काम किया. साथ ही, लॉस एंजिल्स, यू.एस. में, सिस्टम इंटीग्रेटर और यूनिक्स सोलारिस प्रशासक के रूप में भी काम किया (Gotabaya Rajapaksa Education).
इससे पहले बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी भी तख्तापलट के बाद देश छोड़कर फरार हो गए थे और अन्य देश में शपथ ली थी.
दो साल पहले श्रीलंकाई सरकार ने एलान किया कि देश दिवालिया हो चुका है. तब लाखों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को हटाकर ही दम लिया. इसके बाद ये देश जो आर्थिक संकट में डूबा तो अब तक उबर नहीं सका. अब 21 सितंबर को हो रहे राष्ट्रपति चुनाव के बीच यही मुद्दा सेंटर में है.
दक्षिण अफ्रीका के ‘इंटरनेशनल ट्रुथ एंड जस्टिस प्रोजेक्ट’ (आईटीजेपी) के वकीलों ने सिंगापुर के अटॉर्नी जनरल से श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के खिलाफ आपराधिक शिकायत सौंपी है. इसमें उन पर श्रीलंका में गृहयुद्ध के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं.
73 साल के रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार को श्रीलंका के आठवें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली. श्रीलंका इन दिनों अभूतपूर्व आर्थिक संकट का सामना कर रहा है. रानिल विक्रमसिंघे के पक्ष में 134 वोट पड़े. अब श्रीलंका के लिए नई सरकार का गठन होना है. शुक्रवार को कैबिनेट का शपथग्रहण होगा.
साल 1948 में आजाद हुआ श्रीलंका अब तक के सबसे बुरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है. श्रीलंका को इस संकट से उबारने में भारत उसकी मदद कर रहा है. इस साल 3.5 अरब डॉलर से ज्यादा की मदद भारत कर चुका है.
श्रीलंका के राजनीतिक संकट की सबसे बड़ी वजह वहां की सरकार की आर्थिक नीतियां हैं. सरकार के गलत आर्थिक निर्णयों का असर ये हुआ कि देश में खाने-पीने और राशन की सामान्य वस्तुऐं अंधाधुंध महंगाई की चपेट में आ गई. लोगों के लिए खाना-पीना भी मुश्किल हो गया, नतीजा-सरकार के प्रति विरोध का बढ़ता गया और अब वहां अस्थिरता का माहौल है. एक बार आप जब यहां मिल रहे चावल, नारियल तेल और राजमा जैसी कई चीजों की कीमत जान लेंगे जो भौंचक्के रह जाएंगे...
श्रीलंका आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है. देश में खाने और ईंधन की भारी कमी हो गई है. जबकि राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे देश छोड़कर भाग चुके हैं. राजपक्षे श्रीलंका से मालदीव गए, फिर वहां से वह सिंगापुर पहुंच गए. लेकिन रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि गोटाबाया की आखिरी मंजिल सिंगापुर नहीं थी.
बुधवार शाम स्पीकर द्वारा बुलाई गई एक इमरजेंसी मीटिंग में शामिल हुए नेताओं ने मांग की कि प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे अपने पद से इस्तीफा दें और कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में भी इस्तीफा दें. विपक्षी दलों ने मांग की कि स्पीकर को अंतरिम स्पीकर के रूप में कार्यभार संभालना चाहिए.
राजपक्षे ने जनता के विरोध प्रदर्शन के डर से सिंगापुर जाने के लिए मालदीव सरकार से प्राइवेट जेट की मांग की है. मालदीव में गोटाबाया के खिलाफ प्रदर्शन हुए.
श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों का तांडव फिर शुरू हो गया है. राष्ट्रपति गोटाबाया के मालदीव भागने से जनता भड़क गई है. गोटाबाया ने अबतक राष्ट्रपति पद से इस्तीफा नहीं दिया है.
श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने देश छोड़ दिया है. इसके बाद श्रीलंका में अब आर्थिक के साथ-साथ राजनीतिक संकट भी खड़ा हो गया है. राजपक्षे से पहले भी ऐसे नेता रह चुके हैं, जिन्हें हालात बदलते ही देश छोड़ना पड़ा था.
Sri Lanka Crisis: श्रीलंका में रानिल विक्रमसिंघे को कार्यकारी राष्ट्रपति चुन लिया गया है. अब कुछ दिनों में अंतरिम राष्ट्रपति चुना जाना है. सर्वदलीय सरकार बनने पर पीएम-राष्ट्रपति के नाम पर विपक्ष के चेहरों पर भी चर्चा होगी.
श्रीलंका से भागे राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) को मालदीव में एंट्री नहीं मिल रही थी. फिर मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति आगे आए. अब मालदीव से गोटाबाया दुबई जा सकते हैं.