गुरुत्वाकर्षण
गुरुत्वाकर्षण (Gravity) एक प्राकृतिक घटना है. इसके द्वारा ग्रहों, सितारों, आकाशगंगाओं और यहां तक कि प्रकाश सहित द्रव्यमान या ऊर्जा वाली सभी चीजें, एक दूसरे की ओर आकर्षित होती हैं.
गुरुत्वाकर्षण ब्रह्मांड में कई बड़े पैमाने पर संरचनाओं के लिए जिम्मेदार है.पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण भौतिक वस्तुओं को भार देता है, और चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण महासागरों के ज्वार का कारण बनता है. ब्रह्मांड में मौजूद मूल गैसीय पदार्थ के गुरुत्वाकर्षण आकर्षण ने इसे तारों को जोड़ना और बनाना शुरू किया और सितारों को आकाशगंगाओं में एक साथ समूहित करता है. गुरुत्वाकर्षण की एक अनंत सीमा होती है, हालांकि वस्तुओं के दूर जाने पर इसका प्रभाव कमजोर हो जाता है (Gravitation is a natural phenomenon).
अल्बर्ट आइंस्टीन (Albert Einstein) के सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत द्वारा गुरुत्वाकर्षण को सबसे सटीक रूप से वर्णित किया गया है. इस सिद्धांत में गुरुत्वाकर्षण को एक बल के रूप में नहीं, बल्कि स्पेसटाइम की वक्रता के रूप में समझाया गया है, जो द्रव्यमान के असमान वितरण के कारण होता है. साथ ही, जियोडेसिक लाइन के साथ स्थानांतरित करने का कारण बनता है. स्पेसटाइम की इस वक्रता का सबसे अच्छा उदाहरण एक ब्लैक होल है, जिसमें से कुछ भी नहीं—यहां तक कि प्रकाश भी नहीं.
गुरुत्वाकर्षण को न्यूटन के सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण के नियम द्वारा अच्छी तरह से अनुमानित किया जाता है, जो गुरुत्वाकर्षण को एक बल के रूप में वर्णित करता है. इस बल से किन्हीं दो पिंडों को एक-दूसरे की ओर आकर्षित किया जाता है (Newton's law of universal gravitation).
आइंस्टीन रिंग की गुरुत्वाकर्षण शक्ति बहुत ज्यादा होती है. इसे ग्रैविटेशनली लेंस्ड ऑबजेक्ट कहते हैं. यह तब बनता है जब कोई ताकतवर आकाशगंगा या ब्लैक होल अपने चारों तरफ स्पेस टाइम को बांध लेती है. वहां से जो रोशनी निकलती है, वह चारों तरफ एक घेरे जैसी आकृति बना लेती है.
वैज्ञानिकों ने धरती के समुद्र तल के नीचे मौजूद एक पहाड़ में ड्रिलिंग करके एक किलोमीटर लंबा पत्थर निकाला है. इसके जरिए वह धरती के इतिहास को जानना चाहते हैं. साथ ही ज्वालामुखीय गतिविधियों, ग्रैविटी और चुंबकीय शक्तियों का अध्ययन करना चाहते हैं.
पृथ्वी कैसे बनी? गुरुत्वाकर्षण से. धीरे-धीरे धूल-मिट्टी का जमावड़ा होता चला गया. कहीं फूली हुई. कहीं पिचकी हुई. कहीं गहरी घाटियां. कहीं ऊंचे पहाड़. ग्रैविटी आज भी धरती की सतह को बदल रही है. क्योंकि वह खुद बदलती रहती है. ग्रैविटी की वजह से धरती खनिजों का एक फूला हुआ गोला बन गई. जानिए क्या बदलाव हो रहे हैं.