पहाड़
एक पहाड़ (Hill), एक भू-आकृति है जो आसपास के इलाके से ऊपर फैली हुई होती है. अक्सर इसका एक अलग शिखर या चोटी होता है.
भूगोलवेत्ताओं (Geographers) ने ऐतिहासिक रूप से पहाड़ों को समुद्र तल से 1,000 फीट (304.8 मीटर) से अधिक की पहाड़ियों के रूप में माना है. यू.एस. ने भी एक पहाड़ को 1,000 फीट (304.8 मीटर) या उससे अधिक लंबा होने के रूप में परिभाषित किया. इस ऊंचाई से कम किसी भी समान भू-आकृति को पहाड़ी माना जाता था. हालांकि, संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने निष्कर्ष निकाला है कि इन शर्तों की वास्तव में यू.एस. में तकनीकी परिभाषाएं नहीं हैं (Definitions of Hill).
पहाड़ियों का निर्माण भू-आकृतिक घटनाओं के माध्यम से हो सकता है. फॉल्टिंग, बड़े भू-आकृतियों का इरोजन जैसे कि पहाड़ और ग्लेशियरों द्वारा सेडिमेंट यानी तलछट का जमाव. साथ ही, एक प्रक्रिया जिसे डाउनहिल क्रीप होती है जिसमें पहाड़ियों की गोल चोटियां, पहाड़ी को ढकने वाली मिट्टी और रेजोलिथ की गति के परिणामस्वरूप भी पहाड़ो की उंचाई बढ़ती है और नए पहाड़ों का निर्माण होता है (Making of a Hill).
पहाड़ो के रूप और निर्माण की विधि के आधार पर इसका वर्णन करने के लिए विभिन्न नामों का उपयोग किया जा सकता है. ऐसे कई नाम भौगोलिक क्षेत्र में इस्तेमाल हुए हैं, जो उस क्षेत्र के लिए एक प्रकार की पहाड़ी संरचना का वर्णन करते हैं. हालांकि यह नाम अक्सर भूवैज्ञानिकों द्वारा अपनाए जाते हैं और भौगोलिक संदर्भ में उपयोग किए जाते हैं (Hills,Various names by Geologists).
29 जनवरी को हल्के पश्चिमी विक्षोभ ने उत्तर भारत के पहाड़ों पर दस्तक दी. हालांकि तीव्रता कम होने के चलते इसका असर बहुत ज्यादा नहीं रहा. इसके बाद 31 जनवरी से 2 फरवरी 2025 के बीच एक और पश्चिमी विक्षोभ आएगा. यह प्रणाली पहले की तुलना में थोड़ी अधिक प्रभावी होगी.
रिज के साथ लगता निचला क्षेत्र भी सिंकिंग जोन में आता है. इससे पहले, रिज के गेएटी थिएटर के सामने वाले हिस्से और तिब्बती मार्केट में भी भूस्खलन हो चुका है. इसी तरह लक्कड़ बाजार की ओर भी जगह-जगह सड़कों पर दरारें पड़ रही हैं.
आज यानी 30 जनवरी को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू-मनाली हाईवे पर पहाड़ दरकने की घटना दर्ज की गई.
उत्तराखंड के हरसिल की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं जिनमें आप देख सकते हैं कि बर्फ से ढके पहाड़ कितने सुंदर लग रहे हैं.
देश में मानसून कहर बरपा रहा है. पहाड़ से लेकर मैदान तक आसमानी आफत बरस रही है. पहाड़ी इलाकों का हाल सबसे बेकार रहा जहां दो दर्जन से ज्यादा मौतें हो गईं. एक तो बारिश और ऊपर से लैंडस्लाइड ने काफी तबाही मचाई. देखें पहाड़ी शहरों की तबाही पर 'श्वेतपत्र'.
हर महीने आपको पाकिस्तान, जम्मू और कश्मीर, अफगानिस्तान या काराकोरम बेल्ट में भूकंप की खबरें मिलती हैं. वजह ये है कि हिमालय अब भी अपनी ऊंचाई बढ़ा रहा है. ऊंचाई बढ़ने और भूकंप आने की वजह है भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट की टक्कर. जो लगातार एकदूसरे को दबा रही हैं. या टक्कर मार रही हैं.
Luxury Cave Hotel In Desert: एक शख्स ने वीरान रेगिस्तान में अपने लिए एक गुफा खरीद ली. जब उसने गुफा खरीदी, तब कई लोगों ने उसका मजाक बनाया. मगर आज वो शख्स इसी के कारण करोड़पति बन गया है.
पृथ्वी पर सबसे ऊंचा पहाड़ माउंट एवरेस्ट है. लेकिन इससे तीन गुना बड़ा पहाड़ भी मौजूद है. सोचिए उस पहाड़ पर जाकर कैसा दिखेगा नजारा? क्या उस पहाड़ पर आजतक कोई गया है? उस पहाड़ के चारों तरफ का नजारा लाल रंग का है. असल में यह एक विशालकाय ज्वालामुखी है, जो किसी समय बहुत एक्टिव था.
अचानक आए एवलांच (Avalanche) में शख्स की जान चली गई. वो बर्फ की मोटी चादर में दब गया था. वहीं उसका साथी बुरी तरह घायल हो गया. हालांकि, उसकी जान बच गई है. उसको रेस्क्यू करने के लिए हेलिकॉप्टर की मदद लेनी पड़ी.
एक और कोरोना का डर तो दूसरी तरफ न्यू ईयर के जश्न की चाहत टूरिस्ट को पहाड़ों की ओर खीचने लगी है. लेकिन पहाड़ों का हाल भी इन दिनों थोड़ा खराब है. दरअसल क्रिसमस पर सैलानियों की भीड़ ने स्थानीय लोगों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. सरकारों के सामने कोरोना वायरस एक बड़ी चुनौती है. वहीं दूसरी ओर चिलचिलाती ठंड भी लोगों के लिए मुसीबत बन रही है.
लोग हवा खाने पहाड़ पर क्यों जाते हैं? क्या हवा वहां सस्ती मिलती है या उसमें टेस्ट बढ़ जाता है. या फेफड़ा साफ हो जाता है. जिस हिसाब से मैदानों में प्रदूषण और स्मोग बढ़ रहा है, लोग भागेंगे साफ हवा के लिए. जाएंगे कहां... दिल्ली-NCR के आसपास तो कई हिमालयी राज्य हैं. आइए समझे हवा खाने की Scientific वजह.
ये पहाड़ सजे हैं अलग-अलग रंगों के संगमरमर जैसे दिखने वाले पत्थरों से. नुकीले. तेज और धारदार. लेकिन इनकी खूबसूरती बेइंतहा है. ये हैं नमक के पहाड़. ये ईरान और उसके आसपास के इलाकों में पाए जाते हैं. आज हम आपको इनके बारे में बताएंगे और उनकी खूबसूरत रंगीन तस्वीरें दिखाएंगे.
स्नो लेपर्ड (Snow Leopard) या हिम तेंदुआ बेहद दुर्लभ होता है. इसे 'घोस्ट ऑफ माउंटेन' (Ghost Of Mountain) भी कहा जाता है. किस्मत वालों को ही ये दिखाई देता है. ORF America के कार्यकारी निदेशक ध्रुवा जयशंकर ने ट्विटर पर इस अनोखे और बेहद खूबसूरत तेंदुए की एक तस्वीर साझा की है.