हाइपरसोनिक मिसाइल
हाइपरसोनिक मिसाइल (Hypersonic Missile) लगभग 90 किमी की ऊंचाई से नीचे के वातावरण के माध्यम से Mach 5 से अधिक गति से उड़ता है. 2020 तक हाइपरसोनिक की गति, Mach 25+ तक हासिल कर ली गई है. दो चरण वाला बंपर रॉकेट से हाइपरसोनिक उड़ान बनाया गया, जिसमें WAC Corporal के पहले चरण के शीर्ष पर वी -2 और द्वितीय चरण सेट शामिल था. फरवरी 1949 में, व्हाइट सैंड्स में, हाइपरसोनिक रॉकेट की गति 8,288.12 किमी/घंटा यानी लगभग Mach 6.7 तक पहुंच गया था (Speed of Hypersonic Missile).
DRDO ने 9 जनवरी 2026 को हैदराबाद में फुल स्केल एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट कंबस्टर का 12 मिनट से ज्यादा ग्राउंड टेस्ट सफलतापूर्वक किया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम की मजबूत नींव बताया. यह सफलता भारत को अमेरिका, रूस, चीन के साथ हाइपरसोनिक तकनीक में आगे ले जाती है.
रूस ने यूक्रेन के ल्विव क्षेत्र में नई हाइपरसोनिक ओरेशनिक बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया, जो गैस स्टोरेज फैसिलिटी को निशाना बनाया. मिसाइल की स्पीड 13 हजार किमी/घंटा और MIRV तकनीक वाली थी. यानी एक ही मिसाइल से कई टारगेट हिट किए गए. रूस ने इसे पुतिन निवास पर कथित ड्रोन हमले का बदला बताया, जिसे यूक्रेन-अमेरिका ने खारिज किया था.
अमेरिका ने रूसी झंडे वाले तेल टैंकर को जब्त कर लिया है. इसे रूस ने समुद्री डकैती कहा है. रूसी डूमा डिप्टी झुरावलेव ने टॉरपीडो से अमेरिकी जहाज डुबोने की मांग भी की है. वेनेजुएला तेल संकट से तनाव बढ़ा है. रूस के हाइपरसोनिक हथियार जैसे सरमत, अवानगार्ड अमेरिका के लिए खतरा बने हुए हैं.
ईरान की सैन्य ताकत मध्य पूर्व में मजबूत है. 2025 ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग में 16वें स्थान पर है. इसके पास हजारों मिसाइलें और ड्रोन हैं. ईरान से अमेरिका की दूरी बहुत ज्यादा है इसलिए ईरान वहां तक नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा. लेकिन अरब देशों में अमेरिकी बेस पर हमला करेगा. अमेरिका के लिए दूरी समस्या नहीं है.
रूस अपनी नई न्यूक्लियर हाइपरसोनिक मिसाइल ओरेश्निक को बेलारूस के क्रिचेव एयरबेस पर तैनात कर रहा है. सैटेलाइट तस्वीरों से तेज निर्माण और लॉन्चर सुविधाएं दिख रही हैं. यह मिसाइल 12000 km/hr की स्पीड से उड़ती है. इसकी रेंज 5500 km तक है. यह कदम NATO को चेतावनी और यूरोप में रूस की ताकत बढ़ाने का राजनीतिक संदेश है.
यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कूटनीतिक कोशिशों के बीच रूस ने एक बार फिर ताकत दिखाई है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की प्रस्तावित मुलाकात से ठीक पहले कीव पर बड़ा सैन्य हमला हुआ है.
यूक्रेन की राजधानी कीव पर 27 दिसंबर की रात रूस ने बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया राजधानी और आसपास के इलाकों में कई जोरदार धमाके सुने गए
भारत ने 17-20 दिसंबर 2025 को बंगाल की खाड़ी में मिसाइल परीक्षण के लिए 3550 किमी का डेंजर जोन घोषित किया है. NOTAM जारी कर हवाई-सागरीय यातायात रोका जाएगा. संभावित K-4 SLBM या लंबी रेंज वाली मिसाइल का टेस्ट होने वाला है. चीन की जासूसी जहाजों पर नजर है. यह भारत की न्यूक्लियर डिटरेंस को मजबूत करेगा.
पुतिन-मोदी शिखर सम्मेलन में आज रक्षा सौदों पर सबकी नजरें हैं. SU-57 फाइटर जेट (84+ विमान), S-500 एयर डिफेंस सिस्टम, अतिरिक्त S-400 रेजिमेंट, ब्रह्मोस-एनजी और Su-30 अपग्रेड पर बड़े ऐलान संभावित हैं. भारत में जॉइंट प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर जोर रहेगा. डिफेंस सेक्टर में उत्साह दिख रहा है. डिफेंस कंपनियों के शेयरों में उछाल की उम्मीद भी है.
आजतक के वर्ल्ड एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि भारत-रूस परमाणु सहयोग में बड़ी घोषणा जल्द आने वाली है. पुतिन ने कहा कि मोदी किसी के दबाव में नहीं झुकते. S-400, Su-57 जैसे सौदों पर बोले- हम सिर्फ हथियार नहीं, तकनीक और विश्वास साझा करते हैं. ब्रह्मोस, टी-90, कलाश्निकोव भारत में ही बन रहे हैं.
भारत को S-500 इसलिए चाहिए क्योंकि चीन-पाकिस्तान की हाइपरसोनिक मिसाइलों का मुकाबला करना है. S-400 इन तेज मिसाइलों को नहीं रोक सकता. S-500 एक साथ 12 बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें 600 किमी दूर मार गिरा सकता है. पुतिन की दिसंबर 2025 यात्रा में डील फाइनल हो सकती है. 100% तकनीक ट्रांसफर के साथ भारत में बनेगा.
भारत को Su-57 इसलिए चाहिए क्योंकि चीन के J-20 व पाकिस्तान के आने वाले स्टील्थ जेट्स का मुकाबला करना है. IAF में सिर्फ 31 स्क्वाड्रन बची हैं, AMCA 2035 तक आएगा. रूस 100% तकनीक ट्रांसफर और भारत में उत्पादन का ऑफर दे रहा है. पुतिन की यात्रा में डील फाइनल हो सकती है. यह तुरंत ताकत और आत्मनिर्भरता दोनों देगा.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का स्पेशल विमान IL-96-3000 प्यू अब से कुछ ही घंटों में भारत की सरज़मीं पर लैंड करेगा. यह विमान 'हवा में उड़ता किला' है, जिसके सामने मिसाइलें भी फेल हो जाती हैं. पुतिन की अभेद्य सुरक्षा के लिए भारत में 5-लेयर सुरक्षा कवच तैयार है.
Battle Ready Bharat: भारतीय सेना ने ब्रह्मोस की नई 800+ किमी रेंज वाली मिसाइल का सफल कॉम्बैट लॉन्च किया. अब पाकिस्तान का आखिरी कोना भी निशाने पर है. हल्की, तेज और घातक यह मिसाइल जमीन, समुद्र व हवा से मार कर सकती है. ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन के 11 एयरबेस तबाह करने वाली ब्रह्मोस अब भारत की सबसे बड़ी ताकत बन गई है.
रूस वेनेजुएला को नई ओरेश्निक मिसाइलें दे सकता है. स्टेट ड्यूमा के एलेक्सी जुरावल्योव ने कहा कि इसमें कोई बाधा नहीं है. इससे अमेरिका को 'सरप्राइज' मिलेगा. रूस हथियारों की पूरी रेंज दे रहा, हाल ही IL-76 प्लेन से पंतसीर-एस1 और बक-एम2ई पहुंचे. ओरेश्निक यूरोप को एक घंटे में निशाना बना सकती. छह न्यूक्लियर वॉरहेड्स ले जा सकती है.
ट्रंप के परमाणु बयान के बाद USAF ने मिनटमैन-3 ICBM टेस्ट की तैयारी कर ली है. 5-6 नवंबर को कैलिफोर्निया के वांडेनबर्ग बेस से बिना हथियार वाली मिसाइल लॉन्च करेगा. मार्शल द्वीपों पर निशाना लगेगा. अमेरिका का कहना है कि रूटीन चेक है. मिसाइल की ताकत जांच की जा रही है. CTBT के तहत कोई विस्फोट नहीं होगा.
पाकिस्तान के परमाणु हथियार भारत के अधिकांश हिस्सों तक पहुंच सकते हैं, लेकिन भारत की मल्टी-लेयर्ड डिफेंस सिस्टम उन्हें आसमान में ही नष्ट करने की क्षमता रखते हैं. पाकिस्तान फाइटर जेट के जरिए भारत में घुसकर बम गिराने की हिम्मत नहीं कर सकता. मिसाइलें ही आखिरी रास्ता बचेगा, उसे रोकने के लिए भारत में बीएमडी सिस्टम (फेज I/II), एस-400, आकाश और रडार नेटवर्क है.
भारत और रूस मिलकर ब्रह्मोस-टू हाइपरसोनिक मिसाइल को अंतिम मंजूरी देने के करीब हैं. ये ऐसी हाइपरसोनिक मिसाइल होगी, जो साउंड से 5 गुना तेज उड़ सकती है. इसमें रूसी प्रोपल्शन इंजन और भारतीय सेंसर व एंटी ई डब्लू एवियोनिक्स का कॉम्बिनेशन है.
पाकिस्तान AIM-120, PL-15 मिसाइलें मंगवा रहा, लेकिन DRDO की VSHORAD (6 किमी), Astra (200 किमी), Rudram (250 किमी), NRSAM (25 किमी), BrahMos-ER (800 किमी) रेंज, स्पीड (5000 km/hr) और सटीकता में आगे. ऑपरेशन सिंदूर में पाक मिसाइलें फेल हुई. भारत की आर्सेनल पाक से दोगुनी मजबूत, स्वदेशी टेक से अजेय है.
डीआरडीओ की 'ध्वनि' हाइपरसोनिक मिसाइल का 2025 अंत तक पहला परीक्षण हो सकता है. इसकी गति 7400 किमी/घंटा होगी. 1500 किमी रेंज. ब्रह्मोस से तेज, दुश्मन का रक्षा कवच भेदेगी. यह मिसाइल 80% स्वदेशी है. 2029-30 तक तैनाती संभव. चीन-रूस की मिसाइलों का जवाब. भारत हाइपरसोनिक पावर बनेगा.
चीन ने DF-26D मिसाइल का परीक्षण कर लिया, जो हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल ले जाती है. 3 सितंबर 2025 की परेड में अनावरण हुआ था. रेंज 5,000 किमी. 'गुआम किलर' परिवार का अपग्रेड वर्जन. न्यूक्लियर-कन्वेंशनल क्षमता. एंटी-शिप हमलों के लिए बेहतरीन. पैसिफिक में अमेरिकी कैरियर ग्रुप को खतरा. जल्द तैनाती, इंडो-पैसिफिक में तनाव बढ़ेगा.