आईएनएस विक्रांत
INS विक्रांत (INS Vikrant) भारतीय नौसेना का एक विमानवाहक पोत है (Indian Aircraft Carrier). इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने किया है. यह भारत में बनने वाला पहला विमानवाहक पोत है. भारत के पहले विमानवाहक पोत विक्रांत (R11) के रूप में इसका नाम 'विक्रांत' रखा गया है. विक्रांत नाम का संस्कृत में अर्थ "साहसी" है (Meaning of Vikrant). जहाज का मोटो है "जयमा सां युधिस्पति:", जिसका अर्थ है "मैं उन लोगों को हराता हूं जो मेरे खिलाफ लड़ते हैं" (Motto of INS Vikrant).
26 मिग-29के लड़ाकू जेट, 4 कामोव का-31 हेलीकॉप्टर, 2 एचएएल ध्रुव एनयूएच उपयोगिता हेलीकॉप्टर और 4 एमएच -60 आर बहु-भूमिका वाले हेलीकॉप्टर, आईएनएस विक्रांत से उड़ान भरेंगे. एयर क्राफ्ट कैरियर, 262 मीटर लंबा, 62 मीटर चौड़ा और 59 मीटर ऊंचा है. इसका अधिकतम गति 28 समुद्री मील, क्रूजिंग गति 18 समुद्री मील और सहनशक्ति 7,500 समुद्री मील है. इसमें 2,300 डिब्बे, 1700 लोगों का दल, समर्पित अस्पताल परिसर, महिला अधिकारियों के लिए विशेष केबिन, दो फ़ुटबॉल मैदान के आकार के फ़्लाइट डेक और आठ किलोमीटर लंबे गलियारे हैं. इसके आठ बिजली जनरेटर 20 लाख लोगों के शहर को रौशन कर सकता है (INS Vikrant Features).
इस जहाज के डिजाइन पर काम 1999 में शुरू हुआ था (Design of INS Vikrant) और फरवरी 2009 में उलटना बिछाया गया था. वाहक को 29 दिसंबर 2011 को अपने ड्राई-लैप से बाहर निकाला गया था और इसे 12 अगस्त 2013 को लॉन्च किया गया (INS Vikrant Launched date). बेसिन परीक्षण दिसंबर 2020 में पूरा किया गया था. जहाज ने अगस्त 2021 में समुद्री परीक्षण शुरू किया. इस जहाज के लिए कमीशन समारोह 2 सितंबर 2022 को आयोजित किया गया था. विमान का उड़ान परीक्षण 2023 के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है (INS Vikrant Trials). पहले समुद्री परीक्षण के समय परियोजना की कुल लागत लगभग 23,000 करोड़ (US$2.9 बिलियन) थी (INS Vikrant Project Cost).
भारतीय नौसेना 26 राफेल-एम फाइटर जेट की डील फाइनल करने वाला है. नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने यह बात स्पष्ट तौर पर कही कि दो महीने के अंदर यह डील हो जाएगी. नौसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी. साथ ही भारतीय समुद्री क्षेत्र में शांति बनाए रखने में भी मदद मिलेगी. जानिए इस फाइटर जेट की ताकत...
भारतीय नौसेना के दो एयरक्राफ्ट कैरियर INS Vikrant और INS Vikramaditya इस समय देश की पश्चिमी समुद्री सीमा पर तैनात किए गए हैं. यानी अरब सागर में इंडियन नेवी के दो 'महायुद्धपोत'. इन दोनों की वजह से कैसे समंदर का पावर गेम बदलेगा? आइए जानते हैं...इनसे भारतीय नौसेना, भारत और उसके मित्र देशों को किस तरह का फायदा होगा.
आईएनएस विक्रांत से संबंधित एक मामले में मुंबई पुलिस ने बीजेपी नेता किरीट सोमैया के खिलाफ दायर मामलों को खत्म करने के लिए मजिस्ट्रेट कोर्ट में एक क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी. कोर्ट ने अधूरी जांच और फंड के इस्तेमाल में स्पष्टता की कमी को देखते हुए दोबारा जांच के आदेश दिए.
भारत बहुत जल्द फ्रांस के साथ 26 राफेल-एम फाइटर जेट की डील कर सकता है. 50 हजार करोड़ रुपए की इस डील से भारतीय नौसेना को फायदा होगा. भारत के एयरक्राफ्ट कैरियर पर इनकी तैनाती हो सकती है. इससे चीन, पाकिस्तान समेत पूरे इंडो-पैसिफिक रीजन में शांति बहाल करने में आसानी होगी.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि बहुत जल्दी तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर को बनाने का काम शुरू होगा. यह पूरी तरह स्वदेशी होगा. यह विक्रांत क्लास का दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर होगा. इसे बनने में कम समय लगेगा.
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि बहुत जल्द तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर की शुरुआत हो जाएगी. हम तीन पर ही नहीं रुकेंगे. हम पांच-छह कैरियर और बनाएंगे. अगर ऐसा होता है तो भारतीय नौसेना की ताकत हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में कई गुना बढ़ जाएगी. चीन की हरकतों पर विराम लगेगा. जानिए कैसे?
आज से तीन दिन तक नौसेना के कमांडरों का सम्मेलन हो रहा है. इसमें रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल हो रहे हैं. हाइब्रिड मोड के कार्यक्रम में पहली बार आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत एकसाथ शामिल होंगे. जानिए क्या होगा इस कॉन्फ्रेंस में...
मिलन 2024 युद्धाभ्यास के अंतिम चरण में भारतीय नौसेना ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया. इस युद्धाभ्यास में 51 देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया. भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत ने भी इसमें शामिल होकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया.
1971 वॉर के दौरान बेनॉय रॉय चौधरी का योगदान हर तरह से महत्वपूर्ण था. तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल एसएम नंदा ने उन्हें 'एक उत्कृष्ट अभियंता' (An Engineer Par Excellence) की उपाधि दी थी. बेनॉय रॉय चौधरी को उनकी बहादुरी, देशभक्ति, समर्पित सेवा भाव और वीरतापूर्ण कार्यों के लिए उन्हें 'वीर चक्र' प्रदान किया गया था.
भारतीय नौसेना (Indian Navy) के लिए दूसरे विक्रांत क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर को बनाने की सहमित बन चुकी है. इससे भारतीय नौसेना की ताकत तो बढ़ेगी ही लेकिन इससे जापान को बड़ी मदद मिलेगी. ये बात आपको हैरान करेगी. लेकिन यह सच्चाई है. जापान को इसका फायदा रणनीतिक तौर पर होगा. आइए जानते हैं कैसे?
भारत चीन के खिलाफ समंदर में अपनी ताकत बढ़ाने की तैयारी कर चुका है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत एक और विमानवाहक पोत बनाएगा जिसे भारतीय नोसैना में शामिल किया जाएगा. इस खबर पर चीन के ग्लोबल टाइम्स ने एक रिपोर्ट प्रकाशित कर भारत के स्वदेशी पोतों को कमतर दिखाने की कोशिश की है.
भारत की तीनों सेनाओं का पावर बूस्ट होने वाला है. बहुत जल्द देश को नए तेजस फाइटर जेट, प्रचंड हमलावर हेलिकॉप्टर, नया एयरक्राफ्ट कैरियर, माउंटेड गन सिस्टम, MRSAM मिसाइल जैसी ताकत मिलने वाली है. डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने इन्हें खरीदने की अनुमति दे दी है. अब चीन-PAK सीमाओं पर भारतीय सेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी.
Indian Navy के लिए फ्रांस से राफेल मरीन यानी राफेल-एम खरीदने की डील होने वाली है. 90 हजार करोड़ में 26 राफेल भारत आएंगे. इनके आने से भारतीय नौसेना की ताकत समंदर में कैसे बढ़ेगी? क्या चीन या पाकिस्तान के साथ भारत टक्कर ले पाएगा? जानिए चीन के पास इसके टक्कर का कोई नौसैनिक जेट है क्या?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान भारत 96 हजार करोड़ रुपए की डील पर हस्ताक्षर कर सकता है. ये डील है 26 राफेल-एम फाइटर जेट और तीन स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की. राफेल का समुद्री वर्जन INS विक्रांत और विक्रमादित्य के लिए आ रहा है. आइए जानते हैं कि इन हथियारों के आने से भारत की ताकत कितनी बढ़ेगी?
भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट करियर आईएनएस विक्रांत पर पहली बार रात में मिग-29के फाइटर जेट की लैंडिंग कराई गई. यह एक बड़ी सफलता है. यानी जंग के दौरान हमारे फाइटर जेट रात में भी एयरक्राफ्ट करियर पर लैंडिंग कर पाएंगे. इससे दुश्मन पर हमला करना, जासूसी करना आसान हो जाएगा.
भारतीय नौसेना (Indian Navy) 61 नए युद्धपोत बना रहा है. जिसमें डेस्ट्रॉयर्स, फ्रिगेट्स, कॉर्वेट्स और फास्ट अटैक क्राफ्ट्स हैं. नौसेना में इनके शामिल होने के बाद पाकिस्तान और चीन की हालत खराब हो जाएगी. क्योंकि ये बेहद आधुनिक और घातक होंगे. आइए जानते हैं कि इन जंगी जहाजों की खासियत क्या होगी?
भारतीय नौसेना (Indian Navy) भविष्य में दो और एयरक्राफ्ट करियर बनाने जा रही है. एक INS Vikrant जैसा होगा, लेकिन दूसरा इससे बड़ा, ताकतवर और आधुनिक होगा. इसके अलावा फ्यूचर लैंडिंग प्लेटफॉर्म और हाई स्पीड लैंडिंग क्राफ्ट भी बनाए जाएंगे. इनसे नौसेना की हमला करने की ताकत बहुत बढ़ जाएगी. भविष्य में ऐसे होंगे नौसेना के जंगी जहाज...
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बनीस इस समय भारत यात्रा पर हैं. गुरुवार को वे मुंबई पहुंचे और स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत का जायजा लिया. आईएनएस विक्रांत पर एलसीए के कॉकपिट के अंदर ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीस को बैठे देखा गया. उन्होंने आईएनएस विक्रांत के बारे में खूबियां जानीं और तारीफ की है.
देश के स्वदेशी विमान-वाहक पोत (Aircraft Carrier) INS विक्रांत पर पहली बार नौसेना कमांडरों की एक अहम बैठक 6 मार्च को शुरू हो रही है. इस बैठक में समुद्र से संबंधित कई अहम रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा होगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस नौसेना कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित करेंगे.
चीन और पाकिस्तान अगर एकसाथ भारत के खिलाफ जंग छेड़ते हैं, तो भारतीय सेनाएं कहीं से कमजोर नहीं पड़ेंगी. हमारे पास 17 ऐसे हथियार हैं, जिनकी ताकत से पाकिस्तान और चीन, दोनों को ही डर लगता है. टू-फ्रंट वॉर की स्थिति में ये हथियार ही भारत के माथे पर विजय तिलक लगाएंगे. आइए जानते हैं इनकी ताकत को...
भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने अपने एयरक्राफ्ट करियर INS Vikrant के लिए मल्टीरोल कॉम्बैट फाइटर जेट चुन लिया है. विक्रांत पर तैनाती के लिए दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगी मैदान में थे. फ्रांस का राफेल-एम और अमेरिका का एफ-18 सुपर हॉर्नेट. लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स आ रही हैं कि बाजी राफेल ने मार ली है.