जन सुराज एक राजनीतिक पार्टी है (Jan Suraaj Party) जिसका नेतृत्व बिहार के (Bihar) राजनीतिक विशेषज्ञ प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) कर रहे हैं. प्रशांत किशोर 'पीके' के नाम से मशहूर हैं. कुछ साल पहले बिहार जन सुराज नाम से एक राजनीतिक अभियान शुरू किया गया था. इस अभियान में प्रशांत किशोर ने बिहार के विभिन्न जिलों के गांवों में पदयात्रा शुरू की. इस अभियान की शुरुआत बिहार राज्य में परिवर्तनकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से की गई थी. अभियान का फोकस जमीनी स्तर पर जनता की भागीदारी पर था, जिसमें बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार आदि जैसे प्रमुख मुद्दों को संबोधित किया गया.
करीब दो हफ्ते चले प्रशांत किशोर के आमरण अनशन की छोटी सी अवधि में उनके कई रंग देखने को मिले हैं - और इस दौरान जनसुराज पार्टी की आगे की राजनीतिक लाइन की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है.
जन सुराज पार्टी (JSP) ने बुधवार को दावा किया कि अस्पताल के आईसीयू में आमरण अनशन पर बैठे उसके संस्थापक प्रशांत किशोर की हालत 'खतरनाक रूप से बिगड़ गई है.'
PK Vanity Van: पीके की वैनिटी वैन चर्चा का विषय बनी हुई है और सब यह जानने को उत्सुक हैं कि आखिर ऐसा क्या है इस वैनिटी वैन में, जो इसको लेकर इतनी चर्चा बिहार के राजनीतिक गलियारों में हो रही है?
BPSC के अभ्यार्थियों का आंदोलन बढ़ता जा रहा है और प्रशांत किशोर के नेतृत्व में जन सुराज पार्टी का समर्थन मिल रहा है. प्रशांत किशोर ने अनशन कर नीतीश कुमार सरकार को निशाना बनाया है. बिहार में राजनीतिक माहौल गर्म है, जहां प्रशांत किशोर सक्रिय रूप से भूमिका निभा रहे हैं और नीतीश कुमार की नीतियों की आलोचना कर रहे हैं.
प्रशांत किशोर जो जन सुराज पार्टी के संस्थापक हैं, उन्होंने पटना के गांधी मैदान में BPSC छात्रों के समर्थन में अनशन शुरू किया है. उन्होंने सीधे नीतीश कुमार को निशाने पर लेते हुए कहा कि उनकी कहानी खत्म होने वाली है. प्रशांत किशोर का उद्देश्य छात्रों के संघर्ष को समर्थन देना और उनकी आवाज़ को बुलंद करना है.
Prashant Kishor: चुनाव रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर जिस जन सुराज के सूत्रधार हैं, वह चार सीटों के उपचुनाव से अपने चुनावी डेब्यू में जीरो पर रही. पार्टी के उम्मीदवार तीन सीटों पर तीसरे स्थान पर रहे. एक सीट पर पार्टी चौथे स्थान पर रही. ऐसे प्रदर्शन के बावजूद पीके की पार्टी एनडीए और महागठबंधन के लिए टेंशन क्यों है?
प्रशांत किशोर ने अमेरिका में प्रवासी बिहारियों से बात करते हुए बिहार की वर्तमान स्थिति पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि हमें यह समझना होगा कि बिहार एक ऐसा राज्य है जो कई मुश्किलों से घिरा हुआ है. अगर बिहार एक देश होता, तो यह जनसंख्या के मामले में दुनिया में 11वां सबसे बड़ा देश होता. हमने आबादी के मामले में जापान को पीछे छोड़ दिया है.
प्रशांत किशोर चाहते थे कि बिहार में उपचुनावों की तारीख भी बाकी राज्यों की तरह टाल दी जाये, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज पार्टी की मांग नामंजूर कर दी है - सवाल ये है कि आखिर प्रशांत किशोर ऐसा चाहते ही क्यों थे?
सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर की पार्टी को झटका देते हुए बिहार उपचुनाव की तारीख बदलने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस सूर्यकांत और उज्जल भुइयां की पीठ ने पीके की पार्टी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हमें चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना पसंद नहीं है.
प्रशांत किशोर की पार्टी की इस मांग से निर्वाचन आयोग सहमत नहीं है. प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. जन सुराज पार्टी ने निर्वाचन आयोग द्वारा बिहार में उपचुनावों की तारीख आगे नहीं बढ़ाए जाने के निर्णय को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है.
बिहार में उपचुनाव की तारीख नजदीक आ गई है. लेकिन इससे पहले प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज के प्रत्याशियों पर सवाल उठने शुरू हो गये हैं. दरअसल, पीके जब राजनीति में आये थे तो उन्होंने साफ शुद्ध राजनीति की बातें कही थीं, लेकिन अब उनके 4 में से 3 प्रत्याशियों के क्रिमिनल रिकॉर्ड की बात सामने आई है.
बिहार के उप-चुनाव में प्रशांत किशोर का कहना है कि बिहार के लोग अब लालू-नीतीश के विकल्प की तलाश में थे. उन्होंने जन सुराज को सही विकल्प बताया है. प्रशांत किशोर का मानना है कि अब वह बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव की आहट देख रहे हैं. देखें वीडियो.
प्रशांत किशोर कहां चुनावी रणनीति के माहिर माने जाते रहे हैं, और कहां बिहार उपचुनाव में उनकी काबिलयत का मजाक बन गया है. जब 4 सीटों के चुनाव में ये हाल है, तो तब क्या होगा जब 2025 में विधानसभा के चुनाव होंगे?
चुनाव आयोग ने प्रशांत किशोर के उस आरोप को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि बिहार के तरारी उपचुनाव में पूर्व वाइस चीफ ऑफ आर्मी को नामांकन दाखिल करने से रोका गया. प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज बिहार के चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव लड़ रही है.
बिहार की चुनावी राजनीति में प्रशांत किशोर ने नई रणनीति अपनाई है. जनसुराज पार्टी ने उपचुनाव के लिए अपने स्टार प्रचारकों की जो लिस्ट जारी की है, उसमें प्रशांत किशोर का नाम सबसे नीचे है, जबकि पहले नंबर पर पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष मनोज कुमार भारती का नाम है.
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बिहार की बेलागंज और तरारी सीट पर अपने प्रत्याशी बदल दिए हैं. जहां बेलागंज में प्रोफेसर खिलाफत हुसैन की जगह एक बार फिर मो. अमजद को प्रत्याशी बनाया गया है. वहीं तरारी सीट पर एसके सिंह की जगह किरण सिंह को उम्मीदवार घोषित किया गया है.
आरसीपी सिंह और प्रशांत किशोर दोनो ही नीतीश कुमार के करीबी रहे हैं, लेकिन अब दोनो ही सामने से टक्कर देने की तैयारी कर रहे हैं - क्या इससे नुकसान सिर्फ नीतीश कुमार को ही होगा? यदि ऐसा है तो ये समझिये कि बिहार में 'एक नीतीश कुमार, चार बीमार'. क्योंकि RCP और प्रशांत किशोर से काफी पहले जेडीयू की जमीन पर भाजपा और राजद आंख गड़ाए बैठे हैं.
जनसुराज के घोषित उम्मीदवार पूर्व सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिंह की उम्मीदवारी के संकट पर प्रशांत किशोर ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने दावा किया कि लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिंह का सब कुछ भोजपुर के करथ गांव में ही है. पिछले विधानसभा चुनाव में उनका बिहार की वोटर लिस्ट में नाम भी था, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने दिल्ली में वोट डाला था.
प्रशांत किशोर देश के सबसे सफल चुनाव रणनीतिकार रहे हैं. राजनीति में भी सफल हो सकेंगे, अभी सवाल का जवाब मिलना बाकी है - विधानसभा चुनाव तो बहुत दूर है, ये सवाल तो बेलागंज और तरारी उपचुनावों में ही उठने लगा है.
बिहार में होने वाले विधानसभा उपचुनाव से पहले प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज को बड़ा झटका लगा है. उम्मीद है कि तरारी विधानसभा सीट पर पार्टी द्वारा घोषित किए गए उम्मीदवार को बदलना पड़ सकता है, क्योंकि सेना से रिटायरमेंट के बाद एसके सिंह लंबे अरसे से दिल्ली में परिवार के साथ रह रहे हैं और इसी के चलते उनका नाम बिहार के किसी भी जिले की वोटर लिस्ट में नहीं हैं.
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार में शराबबंदी के प्रभाव और इससे जुड़े मुद्दों पर अपनी नाखुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की सरकार द्वारा लागू की गई शराबबंदी सफल नहीं रही है. प्रशांत किशोर का आरोप है कि बिहार में हर घर तक शराब माफिया का जाल फैल चुका है.