जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़
धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ (Dhananjay Yashwant Chandrachud) जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ भारत के 50वें चीफ जस्टिस बने. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ को 9 नंवबर 2022 को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के पद की शपथ दिलाई (Justice D Y Chandrachuda, CJI). वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और बॉम्बे उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश हैं. वह राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं (Justice D Y Chandrachuda). वह सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्य न्यायाधीश वाई वी चंद्रचूड़ (CJI Y V Chandrachuda) के बेटे हैं.
जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ का जन्म 11 नवंबर 1959 को मुंबई (Mumbai) में हुआ था (Justice D Y Chandrachuda). उनके पिता, यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ भारत के मुख्य न्यायाधीश हैं (Justice D Y Chandrachuda Father). उनकी मां प्रभा एक शास्त्रीय संगीतकार थीं.
उन्होंने कैथेड्रल और जॉन कॉनन स्कूल, मुंबई और सेंट कोलंबिया स्कूल, दिल्ली से पढ़ाई की है. उन्होंने 1979 में सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली से अर्थशास्त्र और गणित में स्नातक की. इसके बाद उन्होंने 1982 में दिल्ली विश्वविद्यालय में विधि संकाय से लॉ में स्नातक की, इसके बाद 1983 में हार्वर्ड लॉ स्कूल से कानून में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की. डी वाई चंद्रचूड़ ने 1986 में हार्वर्ड से डॉक्टरेट ऑफ ज्यूरिडिकल साइंस की उपाधि हासिल की (Justice D Y Chandrachuda Education).
अपनी सर्वोच्च न्यायालय की सेवा के दौरान, वह संवैधानिक मामलों की सबसे अधिक सुनवाई के लिए गठित संविधान पीठों में शामिल रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने भारतीय संवैधानिक कानून, तुलनात्मक संवैधानिक कानून, मानवाधिकार, लैंगिक न्याय, जनहित याचिका, वाणिज्यिक कानून और आपराधिक कानून पर निर्णय दिए हैं (Justice D Y Chandrachuda Tenure).
पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि महिलाओं के लिए बनाए गए कानूनों का सही क्रियान्वयन बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके. निर्भया कांड के बाद कानूनों में कई बदलाव किए गए, लेकिन सिर्फ कानून बना देना ही काफी नहीं है.
पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने वर्ष 2022 में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। जब काशी की ज्ञानवापी मस्जिद का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, तब मुस्लिम पक्ष ने इसे PLACES OF WORSHIP ACT 1991 के तहत असंवैधानिक और गैर-कानूनी बताया. लेकिन जस्टिस चंद्रचूड़ ने उल्लेख किया कि यह कानून धार्मिक स्थलों की स्थिर स्थिति को बरकरार रखने का अधिकार देता है, मगर इससे धार्मिक चरित्र की जांच पर कोई रोक नहीं लगाई गई है. उनका वक्तव्य धार्मिक स्थलों के सर्वेक्षण की संवैधानिक व्याख्या के संदर्भ में महत्वपूर्ण है.
महाराष्ट्र में करारी शिकस्त के बाद संजय राउत ने कहा था कि डीवाई चंद्रचूड़ ने विधायकों की अयोग्यता वाली याचिकाओं पर फैसला नहीं किया. इसलिए राजनेताओं के मन से कानून का डर खत्म हो गया और राजनीतिक दलबदल हुआ. इस पर अब पूर्व सीजेआई का बयान आया है.
Aaj Ki Taza Khabar: पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने संजय राउत के आरोपों पर उन्हें खरी-खरी सुनाई है. पूर्व सीजेआई ने कहा है कि कोई पार्टी यह तय नहीं करती कि सुप्रीम कोर्ट में किन मामलों की सुनवाई होगी. वहीं, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को लगाता मिल रही धमकियों के बाद उनके दोस्त ने उन्हें बुलेट प्रूफ लैंड क्रूजर कार गिफ्ट की है.
विधानसभा चुनाव में महाविकास अघाड़ी की करारी हार के बाद शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में जो कुछ भी हुआ है. उसके लिए पूर्व सीजेआई डी.वाईचंद्रचूड़ जिम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि इस चुनाव में ईवीएम बड़ा मुद्दा रहा है. इस नतीजे को रहने दीजिए, लेकिन फिर से बैलेट पेपर से चुनाव कराएं और फिर हमें ऐसा नतीजा लाकर दिखाइए.
महाराष्ट्र में नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर मंथन चल रहा है. वहीं दूसरी ओर परिणाम को लेकर विपक्षी दलों का हमला थम नहीं रहा. कांग्रेस, शिवसेना, उद्धव गुट और एनसीपी शरद पवार गुट इन परिणाम को अविश्वसनीय बता रहे हैं. संजय राउत ने पूर्व CJI चंद्रचूड़ को चुनावी परिणाम के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया. देखें VIDEO
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें चर्च में नन और पादरियों की सैलरी पर लगने वाले टैक्स को चुनौती दी गई थी. ये रियायत दशकों से चली आ रही थी, जिसे जारी रखने के लिए अदालत को बहुत सी अर्जियां मिलीं. पूर्व मुख्य न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने इसपर कहा कि तनख्वाह जिसके खाते में आ रही है, उसे टैक्स देना होगा.
सरकार ने पिछले शुक्रवार को CJI को पत्र लिखकर मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर के अनुसार अपनी सिफारिश भेजने को कहा था. बता दें कि CJI डीवाई चंद्रचूड़ 10 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन उनका लास्ट वर्किंग-डे 8 नवंबर (शुक्रवार) को होगा.
भारत के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ 10 नवंबर 2024 को रिटायर हो रहे हैं. उन्होंने जस्टिस संजीव खन्ना को अगले चीफ जस्टिस के रूप में प्रस्तावित किया है. जस्टिस खन्ना का जन्म 14 मई 1960 को हुआ. उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसलों में भाग लिया, जैसे VVPAT की समीक्षा, इलेक्टोरल बॉन्ड योजना का निरसन, और अनुच्छेद 370 का हटना.
DY Chandrachud chief justice of india के पद से रिटायर हो चुके हैं. लेकिन रिटायरमेंट के बाद, अब वो वकालत की प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे, न ही इससे जुड़ी किसी भी तरह की प्राइवेट सर्विस दे सकेंगे. सिर्फ वो ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट से रिटायर सारे ही जजों के लिए वकालत पर पाबंदी होती है. आइए जानते हैं ऐसा क्यों है. साथ ही ये भी जानेंगे कि रिटायरमेंट के बाद उनके पास क्या-क्या विकल्प हो सकते हैं.
रिटायरमेंट के बाद क्या काम नहीं कर सकेंगे पूर्व CJI चंद्रचूड़, जानिए किन कामों की रहेगी छूट…
डीवाई चंद्रचूड़ चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के पद से रिटायर हो चुके. अब वे वकालत की प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे, न ही इससे जुड़ी किसी भी तरह की प्राइवेट सर्विस दे सकेंगे. केवल वे ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट से रिटायर सारे ही जजों के लिए वकालत पर पाबंदी है. जानें, क्यों है ऐसा, और अब उनके पास क्या-क्या विकल्प हो सकते हैं.
बार काउंसिल के सदस्यों ने रविवार को सीजेआई चंद्रचूड़ के सेवानिवृत्त होने पर उनके कार्यकाल के बारे में अपने विचार साझा किए हैं. कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने उनके द्वारा दिए एक ऐतिहासिक फैसलों, योगदान को याद किया. साथ ही बार सदस्यों ने उन क्षेत्रों का भी याद किया, जहां सीजेआई उनकी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे.
SCBA अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने कहा कि आप में अपार धैर्य है. मैंने अपने 52 साल के करियर में ऐसा धैर्यवान और सबका ध्यान रखने वाला जज नहीं देखा. आप एक असाधारण पिता के असाधारण बेटे हैं. हमेशा मुस्कुराते रहने वाले डॉ. चंद्रचूड़, आपका चेहरा हमारे दिल में हमेशा बसा रहेगा.
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने अपने आखिरी जजमेंट में बुलडोजर एक्शन की कड़ी निंदा की है. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कानून के शासन के अंतर्गत, बुलडोजर कार्रवाई के माध्यम से न्याय स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी की संपत्ति को नष्ट करके लोगों को न्याय नहीं दिया जा सकता.
सीजेआई ने अपने जजमेंट में कहा, 'बुलडोजर के माध्यम से न्याय न्यायशास्त्र की किसी भी सभ्य प्रणाली के लिए ठीक नहीं है. गंभीर खतरा है कि अगर राज्य के किसी भी विंग या अधिकारी द्वारा गैरकानूनी व्यवहार की अनुमति दी जाती है, तो बाहरी कारणों से नागरिकों की संपत्तियों को चुनिंदा प्रतिशोध के रूप में ध्वस्त कर दिया जाएगा.'
सीजेआई चंद्रचूड़ ने अपने लास्ट वर्किंग डे (8 नवंबर) पर स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या 82,000 तक पहुंच जाने के पीछे असली कारण ये है कि नवंबर 2022 से पहले, अनरजिस्टर्ड/दोषपूर्ण मामलों को कभी भी सार्वजनिक डोमेन में नहीं रखा गया, लेकिन इन मामलों का लेखा-जोखा उनके कार्यकाल में रखा जाने लगा.
सीजेआई चंद्रचूड़ 10 नवंबर, 2024 को अपने पद से रिटायर हो रहे हैं. अपने कार्यकाल के दौरान वे 23 संविधान पीठों का हिस्सा थे और इस दौरान उन्होंने 612 फैसले लिखे. वे 10294 पीठों का हिस्सा थे और उन्होंने विभिन्न विषयों पर फैसले सुनाए. न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ को 2016 में सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया गया था और नवंबर 2022 में वे मुख्य न्यायाधीश बने.
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने विदाई समारोह के दौरान मिले सम्मान के लिए सभी का धन्यवाद किया. मुख्य न्यायाधीश ने अपने विदाई समारोह में अपने पिता और अपने न्यायिक अनुभवों को लेकर भावुक बातें साझा कीं. उन्होंने बताया कि उनके पिता बेहद अनुशासित थे लेकिन उन्होंने कभी अपने बच्चों पर अनुशासन नहीं थोपा.
आज सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का लास्ट वर्किंग डे था. इस दौरान उनके साथी जजों ने अनपी भावनाएं व्यक्त कीं और इस दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ भावुक हो गये. उन्होंने अपनी जेब से रूमाल निकाला और आखें पोछीं.
कोर्ट का कहना है कि अब नई बेंच एएमयू को अल्पसंख्यक दर्जा देने के मानदंड तय करेगी. इस मामले पर सीजेआई समेत चार जजों ने एकमत से फैसला दिया है जबकि तीन जजों ने डिसेंट नोट दिया है. मामले पर सीजेआई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा एकमत हैं. वहीं, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा का फैसला अलग है.