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के सिवन

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के सिवन

के सिवन, वैज्ञानिक

डॉ. कैलासवादिवू सिवन (Dr Kailasavadivoo Sivan) एक भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक हैं जो 14 जनवरी 2022 तक सचिव (अंतरिक्ष) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष रहे हैं (K Sivan Former Chairman of ISRO). इससे पहले, उन्होंने विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र और तरल प्रणोदन प्रणाली केंद्र के निदेशक के रूप में कार्य किया था (Former Director of Vikram Sarabhai Space Center and Liquid Propulsion Systems Centre).

सिवन का जन्म 14 अप्रैल 1957 को भारत के तमिलनाडु राज्य के कन्याकुमारी जिले में नागरकोइल के पास मेला सरक्कलविलाई में हुआ था (K Sivan Date of Birth). उनके माता-पिता चेल्लम और कैलासवादिवू हैं. सिवन का पालन-पोषण एक आम किसान परिवार में हुआ (K Sivan Family). उन्होंने स्कूली शिक्षा अपने गांव में तमिल माध्यम के सरकारी स्कूल और बाद में कन्याकुमारी जिले के वल्लनकुमारनविलई में हासिल की. सिवन अपने परिवार से स्नातक करने वाले पहले शख्स थे. बाद में सिवन ने 1980 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की. उन्होंने 1982 में भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त की और इसरो में काम करना शुरू किया. उन्होंने 2006 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की. वे इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग, एरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया और सिस्टम्स सोसाइटी ऑफ इंडिया के फेलो हैं (K Sivan Education).

सिवन 1982 में पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) प्रोजेक्ट में भाग लेने के लिए इसरो (ISRO) में शामिल हुए. उन्होंने इसरो के लिए प्रक्षेपण यान के डिजाइन और विकास पर काम किया. उन्हें 2 जुलाई 2014 को इसरो के तरल प्रणोदन प्रणाली केंद्र का निदेशक नियुक्त किया गया था. सिवन को अप्रैल 2014 में सत्यबामा विश्वविद्यालय, चेन्नई से डॉक्टर ऑफ साइंस (ऑनोरिस कौसा) से सम्मानित किया गया था. 1 जून 2015 को, वह विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक बने.  

सिवन को जनवरी 2018 में इसरो का प्रमुख नियुक्त किया गया और उन्होंने 15 जनवरी को पदभार ग्रहण किया. उनकी अध्यक्षता में, इसरो ने 22 जुलाई 2019 को चंद्रमा के लिए दूसरा मिशन चंद्रयान 2 लॉन्च किया (Chandrayaan 2), जिसके विक्रम लैंडर और प्रज्ञान (रोवर) दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे (Vikram lander and Pragyan rover), लेकिन जनवरी 2022 तक ऑर्बिटर प्रभावित हुए बिना अभी भी चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है.

30 दिसंबर 2020 को, बतौर इसरो अध्यक्ष उनके कार्यकाल को एक वर्ष के लिए जनवरी 2022 तक बढ़ा दिया गया था. उनका पहले का कार्यकाल जनवरी 2021 तक था.
 

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