कांशीराम (Kanshiram) एक राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक थे. उन्होंने बहुजनों, भारत में जाति व्यवस्था के सबसे निचले स्तर पर अछूत समूहों सहित पिछड़ी और निचली जाति के लोगों के उत्थान और राजनीतिक लामबंदी के लिए काम किया. उन्हें बहुजन नायक के नाम से भी जाना जाता है.
कांशीराम ने 1971 में दलित शोषित समाज संघर्ष समिति (डीएस-4), अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग (एससी/एसटी/ओबीसी) और अल्पसंख्यक समुदाय कर्मचारी महासंघ (बामसेफ) और 1984 में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की स्थापना की. उन्होंने बीएसपी का नेतृत्व अपनी शिष्या मायावती को सौंप दिया, जिन्होंने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री के रूप में चार कार्यकाल पूरे किए.
कांशीराम जी का जन्म 15 मार्च 1934 को पंजाब के रोपड़ जिले में हुआ था. वे चमार जाति के रामदासिया परिवार से ताल्लुक रखते थे.
कांशीराम को मधुमेह था. उन्हें 1994 में दिल का दौरा पड़ा. 2003 में लकवाग्रस्त हो गए थे. 9 अक्टूबर 2006 को 72 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से नई दिल्ली में उनका निधन हो गया.
मायावती अब तक कांग्रेस और गांधी परिवार के खिलाफ ही हमलावर नजर आई हैं, लेकिन बड़े दिनों पर मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर बीजेपी की केंद्र और यूपी सरकार को लेकर सख्त लहजे में रिएक्ट किया है - और वो भी गरीबों की दुश्मन और अमीरों की हितैषी बताते हुए.
आकाश आनंद को बीएसपी से बाहर करने के बाद भी मायावती एक्शन मोड में ही हैं. ताजा शिकार आनंद कुमार हुए हैं, जो आकाश आनंद के पिता और मायावती के भाई हैं - क्या अब भी आपको लगता है कि बीएसपी में जो हो रहा है उसके पीछे आकाश आनंद ही हैं?
ऐसे समय में जब बहुजन समाज पार्टी दिन प्रति दिन अपनी लोकप्रियता खोती जा रही है, पार्टी सुप्रीमो मायावती अपना उत्तराधिकारी खोजने में अपनी सारी ऊर्जा लगा रही हैं. दुर्भाग्य से मास्टर कांशीराम की तरह उन्होंने अपनी पार्टी के लिए सेकंड लाइन की लीडरशिप नहीं तैयार की. जाहिर है कि इसका असर भविष्य में पार्टी पर पड़ना तय है.
दिल्ली में फरवरी में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसी कड़ी में अब नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद की पार्टी ने भी ताल ठोंक दी है. दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने पांच विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया है.