scorecardresearch
 
Advertisement

खिचड़ी घोटाला

खिचड़ी घोटाला

खिचड़ी घोटाला

'खिचड़ी घोटाला' (Khichadi Scam Mumbai) नाम खिचड़ी वितरण योजना में हुए घोटाला से आया है, जिसे बीएमसी ने कोविड लॉकडाउन के दौरान (अप्रैल 2020) जरूरतमंद दिहाड़ी मजदूरों और गरीबों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए शुरू किया था. लॉकडाउन के दौरान इन मजदूरों और गरीबों के पास भोजन प्राप्त करने के लिए कोई काम या अन्य साधन नहीं था. इसलिए इन्हें बीएमसी ने खिचड़ी उपलब्ध कराई. 

बाद में यह बात सामने निकलकर आई कि नियमों को ताक पर रखकर इस काम का ठेका दिया गया और बकायदा रिश्वत तक ली गई. जांच एजेंसी ने बताया कि खिचड़ी पैकेट की आपूर्ति के लिए बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) ने ‘फोर्स वन मल्टी सर्विसेज’ (जिसके पास ‘खिचड़ी’ का ठेका गया था) के बैंक खाते में 8 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की थी.

इसके अलावा यह बात भी सामने निकलकर आई की मजदूरों को जो 250 ग्राम खिचड़ी दी जानी थी वह केवल 125 ग्राम ही दी गई, यानि खिचड़ी बांटने में भी घोटाला हुआ. 

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 9 अप्रैल 2024 को शिवसेना (यूबीटी) नेता अमोल कीर्तिकर से कोविड महामारी के दौरान BMC द्वारा खिचड़ी वितरण  में कथित अनियमितताओं के संबंध में पूछताछ भी की. कथित घोटाले में उनकी भूमिका की जांच करते हुए जांच एजेंसी के अधिकारियों ने अपने मुंबई कार्यालय में कीर्तिकर से लगभग आठ घंटे तक पूछताछ की. इस कथित घोटाले के दौरान अमोल कीर्तिकर के बैंक खाते में लेनदेन हुआ था, जहां उन्हें कथित तौर पर खिचड़ी ठेका फर्म से 1.65 करोड़ रुपए मिले थे.

और पढ़ें

खिचड़ी घोटाला न्यूज़

Advertisement
Advertisement