कूनो नेशनल पार्क
कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) मध्य प्रदेश, भारत के मध्य प्रदेश में स्थित है (Madhya Pradesh India). इसकी उद्दयान की स्थापना 1981 में श्योपुर और मुरैना जिलों में 344.686 वर्ग किमी क्षेत्र (Kuno National Park Area) के साथ एक वन्यजीव अभयारण्य के रूप में की गई थी (Kuno National Park Foundation). 2018 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया था. यह खथियार-गिर शुष्क पर्णपाती वनों के क्षेत्र का हिस्सा है.
1990 के दशक में, इसे एशियाई शेर पुनरुत्पादन परियोजना को लागू करने के लिए एक संभावित स्थल के रूप में चुना गया था. इसका उद्देश्य भारत में शेरों की दूसरी आबादी स्थापित करना था. 1998 और 2003 के बीच, 24 गांवों के लगभग 1,650 निवासियों को संरक्षित क्षेत्र के बाहर के स्थलों पर बसाया गया. वहां स्थित अधिकांश निवासी सहरिया आदिवासी लोग थे. गांव जाटव, ब्राह्मण, गुर्जर, कुशवाहा और यादव लोगों के घर भी थे. वन्यजीव अभयारण्य के आसपास के 924 वर्ग किमी के क्षेत्र को मानव बस्तियों के लिए बफर जोन के रूप में जोड़ा गया था (Kuno Wildlife Sanctuary).
2009 में, कूनो वन्यजीव अभयारण्य को भी भारत में चीता के पुनरुत्पादन के लिए एक संभावित स्थल के रूप में प्रस्तावित किया गया था. दिसंबर 2018 में राज्य सरकार ने वन्यजीव अभयारण्य की स्थिति को कुनो राष्ट्रीय उद्यान में बदल दिया और संरक्षित क्षेत्र को 413 वर्ग किमी तक बढ़ा दिया (Wildlife Sanctuary to Kuno National Park).
जनवरी 2022 में, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान चीतों को फिर से बसाने के लिए कार्य योजना शुरू की. 2022 में, भारत सरकार ने गुजरात राज्य के भीतर शेर स्थानांतरण के लिए 25 वर्षीय योजना का मसौदा तैयार किया. 17 सितंबर 2022 को 4 से 6 साल की उम्र के पांच मादा और तीन नर चीते अप्रिका के नामीबिया (Namibia, Africa) से कूनो नेशनल पार्क लाए गए (Kuno National Park Cheetah).
इस नेशल पार्क में संरक्षित क्षेत्र की वनस्पति में एनोगेसस पेंडुला वन और झाड़ी, बोसवेलिया और बुटिया वन, शुष्क सवाना वन और घास के मैदान और उष्णकटिबंधीय नदी के जंगल शामिल हैं. प्रमुख वृक्ष प्रजातियां बबूल केचु, सलाई बोसवेलिया सेराटा, तेंदु डायोस्पायरोस मेलानोक्सीलॉन, पलाश बुटिया मोनोस्पर्मा, ढोक एनोजिसस लैटिफोलिया, बबूल ल्यूकोफ्लोआ, जिजिफस मॉरिटियाना और जिजिफस जाइलोपाइरस हैं. प्रमुख झाड़ीदार प्रजातियों में ग्रेविया फ्लेवेस्केंस, हेलिकटेरेस आइसोरा, होपबश विस्कोसा, विटेक्स नेगुंडो शामिल हैं (Kuno National Park Flora).
यहां संरक्षित क्षेत्र में पाए जाने वाले मुख्य शिकारी भारतीय तेंदुआ, जंगली बिल्ली, सुस्त भालू, ढोल, भारतीय भेड़िया, सुनहरा सियार, धारीदार लकड़बग्घा और बंगाल लोमड़ी हैं. अनगुलेट्स में चीतल, सांभर हिरण, नीलगाय, चार सींग वाले मृग, चिंकारा, काला हिरण और जंगली सूअर शामिल हैं (Kuno National Park Fauna).
Kuno National Park: बीते दिनों चीतों पर ग्रामीणों ने न केवल उन पर पत्थर फेंके, बल्कि लाठी-डंडों के साथ जानवरों को घेर लिया. इस घटना के बाद चीतों की सुरक्षा पर चिंता जताई गई, जिसके जवाब में श्योपुर जिला प्रशासन और कूनो प्रबंधन ने एक एडवाइजरी जारी की है.
Kuno National Park: एक वीडियो में देखा गया कि ज्वाला और उसके शावक एक-एक कर रास्ता पार कर रहे थे, तभी उन्होंने एक गाय पर हमला कर दिया. ज्वाला ने गाय का गला पकड़ लिया, जिसके बाद ग्रामीण लाठी-डंडे और पत्थर लेकर चीतों को भगाने दौड़े.
Kuno National Park: आधी रात को ज्वाला और उसके चार शावक वीरपुर तहसील के ग्राम श्यामपुर से करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर निर्माणाधीन श्योपुर-ग्वालियर ब्रॉडगेज रेलवे ट्रैक से गुजरते नजर आए. इस दौरान वहां से गुजर रहे ट्रक चालकों ने इनके वीडियो बनाए.
दुनिया के महशूर चीता एक्सपर्ट और 'द मेटापॉपुलेशन इनिशिएटिव' (TMI) के फाउंडर विन्सेंट वैन डेर मेरवे का शव रियाद के एक अपार्टमेंट में पाया गया है. उनके निधन के बाद से दुनियाभर के वन्यजीव संरक्षणवादियों में शोक की लहर दौड़ गई है.
Kuno National Park में दक्षिण अफ्रीकी मादा चीता गामिनी और उसके 4 शावकों को पार्क के खजूरी वन क्षेत्र में खुले जंगल में सफलतापूर्वक छोड़ दिया गया.
Kuno नेशनल पार्क में वर्तमान में कुल 26 चीते हैं. इनमें से 12 चीते खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से घूम रहे हैं और अपना शिकार कर रहे हैं, जबकि शेष 14 चीते अभी बड़े बाड़ों में रखे गए हैं. पार्क के अधिकारियों का कहना है कि चीतों की बढ़ती संख्या और उनकी जंगल में मौजूदगी से पर्यटन को नई गति मिल रही है.
Kuno नेशनल पार्क में वर्तमान में कुल 26 चीते हैं. इनमें से 12 चीते खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से घूम रहे हैं और अपना शिकार कर रहे हैं, जबकि शेष 14 चीते अभी बड़े बाड़ों में रखे गए हैं. पार्क के अधिकारियों का कहना है कि चीतों की बढ़ती संख्या और उनकी जंगल में मौजूदगी से पर्यटन को नई गति मिल रही है.
Kuno के खुले जंगल में कुल 12 चीते विचरण कर रहे हैं. इनमें आग,वायु और धीरा अलग-अलग क्षेत्रों में घूम रहे हैं. ज्वाला के शावक जंगल में सक्रिय हैं, और मां के साथ उछल-कूद कर रहे हैं. मादा चीता आशा भी अपने शावकों से दूर स्वतंत्र रूप से विचरण कर रही है.
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में शुक्रवार को पांच और चीतों को जंगल में छोड़ा गया, जिनमें नामीबिया से लाई गई मादा चीता 'ज्वाला' और उसके चार शावक शामिल हैं. अब पार्क में कुल 12 चीते खुले जंगल में हैं, जबकि 14 अभी भी बाड़ों में हैं. कूनो में कुल 26 चीते मौजूद हैं.
कूनो नेशनल पार्क के बड़े बाड़े में बंद मादा चीता आशा को उसके तीन नर शावकों के साथ जंगल में छोड़ा गया. साथ ही मादा चीता धीरा को अलग से जंगल में छोड़ा गया.
Kuno National Park: कूनो नेशनल पार्क में एक बार फिर किलकारी गूंजी है. मंगलवार के दिन मादा चीता वीरा ने 2 शावकों को जन्म दिया है. अब पार्क में चीतों की कुल संख्या 26 हो गई है. जिनमें 12 वयस्क चीता और 14 शावक हैं. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शावकों के फोटो पोस्ट कर जताई खुशी है.
झांकी के मध्य भाग में बहती हुई कूनो नदी और इसके आसपास राष्ट्रीय उद्यान के वनावरण और प्राकृतिक आवास में विचरण करते हुए वन्य-जीव, जिनमें हिरण, बंदर, पक्षी और चीते उनकी बढ़ती हुई संख्या के साथ जैव-विविधता के लिये एक आदर्श के रूप में कूनो अभयारण्य को दर्शाया गया है.
चीता जंगल लौटते समय आधी रात को शहर की सड़कों पर दौड़ लगाता कैमरे में कैद हुआ है. अब चीता वापस जंगल की ओर रुख कर गया है. बताया जा रहा है कि वह अब कूनो के बफर जोन में जा पहुंचा है.
कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में छोड़े गए चीतों (अग्नि और वायु) में से एक श्योपुर के ढेंगदा गांव और पॉलिटेक्निक कॉलेज के पास रिहायशी इलाके में नजर आया. राहगीरों ने चीता सड़क पार करते हुए वीडियो बनाया, जो अब वायरल हो रहा है. फिलहाल, चीते की पहचान नहीं हो सकी है कि वह अग्नि है या वायु.
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस के मौके पर चीतों वायु और अग्नि को जंगल में छोड़ा गया. यह कदम भारत में विलुप्त हो चुकी चीता प्रजाति को फिर से बसाने की कोशिशों का हिस्सा है. पर्यटक अब सफारी के दौरान इन चीतों को देख सकेंगे.
MP News: कान्हा नेशनल पार्क से 18 नर और 10 मादा चीतल लाए गए और उन्हें गांधीसागर के बाड़े वाले क्षेत्र में छोड़ा गया. इसके साथ ही अब तक गांधीसागर में 434 चित्तीदार हिरण छोड़े जा चुके हैं, जिनमें 120 नर और 314 मादा हैं.
Kuno National Park: श्योपुर में स्थित कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर खुशखबरी मिलने वाली है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट कर कहा, 'देश के 'चीता स्टेट' मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में एक मादा चीता जल्द ही नए शावकों को जन्म देने वाली है.
भारत लाए गए 20 चीतों में से आठ वयस्क चीतों (3 मादा और 5 नर) की मौत हो गई. वहीं, भारत आने पर 17 शावकों का जन्म हुआ जिनमें से 12 जीवित हैं. इस प्रकार कूनो में इस समय शावकों सहित कुल 24 चीते हैं.
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) को मॉनसून के बाद पर्यटकों के लिए फिर से खोल दिया गया है, लेकिन चीते देखने का इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है. देश में चीतों को फिर से बसाने की योजना के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों को अभी जंगल में नहीं छोड़ा गया है.
इस साल के अंत तक गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में चीतों का एक नया ग्रुप लाए जाने की संभावना है और उन्हें अगले पांच साल तक खुले माहौल में छोड़ा जाएगा.
Gwalior Regional Industry Conclave: कॉन्क्लेव में वन-टू-वन मीट सबसे अहम पहलू होगा. इसमें बड़े-बड़े उद्योगपति और निवेशक ग्वालियर-चंबल अंचल में निवेश की संभावनाओं को तलाशेंगे. साथ ही अपने खजाने निवेश के लिए खोलेंगे.