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लिएंडर पेस

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लिएंडर पेस: 44 साल बाद भारत के लिए पहला व्यक्तिगत पदक जीता

कांस्य पदक: अटलांटा (1996)

जब भी भारतीय टेनिस की बात होती है, तो लिएंडर पेस का नाम सबसे पहले सामने में आता है. पेस ने 1996 के अटलांटा ओलंपिक में पुरुष एकल में कांस्य पदक जीता था. पेस ने 1952 में हेलसिंकी ओलंपिक में पहलवान केडी जाधव के कांस्य पदक के बाद भारत को अपना पहला व्यक्तिगत पदक दिलाया.

लिएंडर पेस लगातार 7 ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाले दुनिया के एकमात्र टेनिस खिलाड़ी हैं. वह 7 बार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र भारतीय हैं, जिसके लिए उन्हें सर्टिफिकेट भी मिल चुका है. अपने सुनहरे करियर में पेस 18 ग्रैंड स्लैम खिताब जीत चुके हैं, जिसमें 8 डबल्स और 10 मिक्स्ड डबल्स खिताब शामिल हैं.

नंबर-1 बन गए थे जूनियर पेस

लिएंडर पेस का जन्म 17 जून 1973 को कोलकाता में हुआ था. उनके पिता वेस पेस 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडलिस्ट भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रह चुके हैं. वहीं, मां जेनिफर पेस ने 1980 के एशियन बास्केटबॉल चैम्पियनशिप में भारतीय टीम की कप्तान रह चुकी हैं. 1990 में पेस ने सिर्फ 17 साल की उम्र में विंबलडन का ‌जूनियर खिताब अपने नाम किया. 1991 में यूएस ओपन का जूनियर खिताब जीतकर इस कैटेगरी में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी बने. अगले साल 1992 में पेस ने रमेश कृष्णन के साथ बार्सिलोना ओलंपिक में भाग लिया.


अटलांटा ओलंपिक बना यादगार

अटलांटा में पेस ने अपने सिंगल्स अभियान का शानदार आगाज करते हुए पहले दौर में अमेरिका के रिची रेनबर्ग को पटखनी दी. इसके बाद पेस ने दूसरे दौर में वेनेजुएला के निकोलस परेरा और तीसरे दौर में स्वीडन के दिग्गज थॉमस एनक्विस्ट को मात दी. क्वार्टर फाइनल में लिएंडर पेस ने इटली के रेंजो फुरलान को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई.
सेमीफाइनल में लिएंडर पेस का सामना दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में से एक आंद्रे अगासी से हुआ. पहला सेट टाई ब्रेकर तक खिंचा, लेकिन पेस के हाथ से निकल गया. फिर अगासी ने पेस को कोई मौका नहीं देते हुए 7-6, 6-3 से मैच जीतकर करोड़ों भारतीय फैन्स की उम्मीदें तोड़ दीं.

पेस को हराने के बाद अगासी स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब रहे. दूसरी ओर लिएंडर पेस के पास अब भी कांस्य पदक जीतने का एक मौका था. ब्राजील के फर्नांडो मेलीजेनी के खिलाफ मैच में पेस को पहला सेट उन्हें 3-6 से गंवाना पडा. लेकिन इसके बाद लिएंडर पेस ने शानदार वापसी करते हुए 3-6, 6-2, 6-4 से मुकाबला जीतकर भारत का नाम पदक तालिका में ला दिया. पूरा देश जश्न में डूब उठा, क्योंकि 44 साल बाद किसी भारतीय एथलीट ने व्यक्तिगत स्पर्धा में ओलंपिक मेडल अपने नाम किया था.

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