लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास)- LJP (Ram Vilas) एक राजनीतिक दल है जिसका गठन 2021 में चिराग पासवान के नेतृत्व में किया गया था. दोनों गुटों को नया नाम और प्रतीक आवंटित किया गया. अब यह दो अलग-अलग गुटों में से एक है, दूसरा राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी है.
नागालैंड चुनाव में एलजेपी (राम विलास) ने 15 सीटों पर उम्मीदवार उतारे. जिनमें से 2 उम्मीदवार पुघोबोटो और टोबू से जीते और 8 अन्य सीटों पर दूसरे स्थान पर रहे. कुल वोटों के लगभग 8.65 फीसदी के साथ पार्टी को नागालैंड में 'राज्य पार्टी' का दर्जा दिया गया (LJP (Ram Vilas) in Nagaland).
पिछले तीन दशक को छोड़ दें तो बिहार में सवर्ण राजनीति का दबदबा रहा है, जिससे चार कदम आगे चलकर प्रशांत किशोर ने दलित राजनीतिक का रुख किया है - देखना है कास्ट पॉलिटिक्स के दौर में ये प्रयोग किस दिशा में आगे ले जाता है?
राष्ट्रीय जनता दल के नेता मुकेश रोशन के बयान पर पलटवार करते हुए, नीतीश सरकार में मंत्री और जेडीयू लीडर जमा खान ने कहा, '2025 में आरजेडी के नेताओं की जमानत जप्त हो जाएगी. एनडीए मजबूत है, आरजेडी वाले बौखला कर ऐसे बयान दे रहे हैं.'
NDA की मीटिंग में चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी वजह से ही एनडीए को इतनी बड़ी जीत मिली है. चिराग पासवान ने इस दौरान अपने पिता राम विलास पासवान को भी याद किया और बताया कि वह अपने पिता के किस सपने को पूरा करने में लगे हुए हैं.
लोकसभा चुनाव के बीच एलजेपी रामविलास चीफ चिराग पासवान से इंडिया टुडे से खास बातचीत की. इस दौरान चिराग ने चुनावी तैयारियों से लेकर बिहार में एनडीए की भूमिका तक पर बेबाकी से बातचीत की. चिराग की पार्टी के बीजेपी में विलय की खबरों पर क्या कहा. देखें
RJD की चुनावी रैली में गाली दिये जाने के मामले में चिराग पासवान को तेजस्वी यादव से राजनीतिक परिपक्वता तो नहीं, संवेदनशीलता की अपेक्षा जरूर रही होगी. शायद यही वजह है कि आरजेडी नेता की चुप्पी पर चिराग पासवान ने न सिर्फ सवाल उठाया है, बल्कि रैली के वाकये को जंगलराज से जोड़ दिया है.
रामविलास पासवान परिवार से जुड़े एक और सदस्य की राजनीति में एंट्री हो चुकी है. चिराग ने अपने जीजा अरुण भारती को जमुई से उम्मीदवार बनाया है. वह खुद हाजीपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे.
पशुपति कुमार पारस का NDA छोड़ना कहीं से भी राजनीतिक निर्णय नहीं लगता, बल्कि वो भावनाओं में बह गये लगते हैं. बीजेपी ही नहीं, चिराग पासवान का भी वो शायद ही कुछ खास नुकसान कर पायें - बल्कि खुद उनके बिहार का शिवपाल यादव बन कर रह जाने का खतरा पैदा हो गया है.
ये चिराग पासवान का ही मामला है जो बीजेपी पशुपति कुमार पारस के साथ यूज-एंड-थ्रो व्यवहार कर रही है. पहले उनको एकनाथ शिंदे और अजित पवार जैसा इस्तेमाल किया, और अब उनके साथ भी उद्धव ठाकरे और शरद पवार की तरह पेश आ रही है - ये है 'मोदी के हनुमान' की ताकत का कमाल है.
चिराग पासवान भी बिहार में नीतीश कुमार वाली प्रेशर पॉलिटिक्स शुरू कर चुके हैं, और बीजेपी के साथ साथ INDIA ब्लॉक का विकल्प भी खुला रखा है. एनडीए में चिराग पासवान की जो शर्तें हैं, तेजस्वी यादव उससे ज्यादा देने को तैयार हैं - बीजेपी ने इधर नाराज किया तो, उधर के खुले दरवाजे का विकल्प भी खुला रखा है.
जातिगत गणना के आंकड़े सामने आने के बाद नीतीश कुमार से पूछा जाने लगा है कि क्यों नहीं वो किसी मुस्लिम को मुख्यमंत्री बना देते. प्रशांत किशोर तो ये भी पूछने लगे हैं कि चाचा-भतीजा अगर कुंडली मार कर बैठे रहेंगे तो किसी मुस्लिम या अतिपिछड़े वर्ग के नेता को हक भला कहां मिल पाएगा?