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एलओसी

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लाइन ऑफ कंट्रोल (Line of Control) भारत के जम्मू और कश्मीर और पाकिस्तानी-नियंत्रित भागों के बीच एक सैन्य नियंत्रण रेखा है. यह 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद, शिमला समझौते (Simla Agreement) के रूप में बनाया गया था. 

भारतीय नियंत्रण में पूर्व रियासत का हिस्सा जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित है. पाकिस्तानी नियंत्रित खंड को कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान(Kashmir and Gilgit–Baltistan) में विभाजित किया गया है. नियंत्रण रेखा का सबसे उत्तरी बिंदु NJ9842 के रूप में जाना जाता है, जिसके आगे सियाचिन ग्लेशियर (Siachen Glacier) है. एलओसी के दक्षिण में, संगम, चिनाब नदी, अखनूर है, जो सीमा बनाती है. पाकिस्तानी पंजाब और जम्मू प्रांत के बीच, इसकी स्थिति अस्पष्ट है. भारत इसे "अंतर्राष्ट्रीय सीमा" (International Boundary) मानता है, और पाकिस्तान इसे "कार्यशील सीमा" कहता है.

1965 के कश्मीर युद्ध और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध, जिसने बांग्लादेश को स्वतंत्रा मिली थी, इसके बाद, मूल युद्धविराम रेखा में केवल मामूली संशोधन किए गए थे. 1972 के शिमला समझौते में, दोनों देश युद्धविराम रेखा को "नियंत्रण रेखा" (LOC) में बदलने के लिए सहमत हुए और इसे एक वास्तविक सीमा के रूप में मानते हैं कि सशस्त्र कार्रवाई का उल्लंघन नहीं होना चाहिए. भारत और पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (UNMOGIP) की युद्धविराम उल्लंघन (CFV) की जांच की भूमिका थी, हालांकि 1971 के बाद उनकी भूमिका कम हो गई. 

हालांकि पाकिस्तान लगातार युद्धविराम उल्लंघन करता रहता है (Ceasefire Violations From Pakistan Side).

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