भारत में 18वीं लोकसभा चुनाव अप्रैल और मई 2024 तक होना है. लोकसभा चुनाव के लिए मतदान कुल सात फेजों में होगा (Lok Sabha Elections 2024). चुनाव आयोग 16 मार्च 2024 को 3 बजे तक लोकसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा की. नवनियुक्त चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह सिंधू के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार चुनाव की तारीखों का ऐलान किया.
फेज 1, 19 अप्रैल 2024 को होना है जिसमें 21 राज्यों के 102 सीटों पर मतदान होगा. फेज 2, 26 अप्रैल 2024 को होना है, जिसमें 12 राज्य के 88 सीटों पर मतदान होगा. वहीं फेज 3, 07 मई 2024 को होना है जिसमें 13 राज्य के 94 सीटों पर मतदान होगा. फेज 4, 13 मई 2024 को होना है जिसमें 10 राज्य के 96 सीटों पर मतदान होगा, फेज 5, 20 मई 2024 को होना है, जिसमें 8 राज्य के 49 सीटों पर मतदान होगा, जबकि फेज 6, 25 मई 2024 को होना है, जिसमें 7 राज्य के 57 सीटों पर मतदान होगा और फेज 7, 01 जून 2024 को होना है, जिसमें 8 राज्य के 57 सीटों पर मतदान होगा.
मतगणना की तारीख 4 जून 2024 रखी गई है.
बता दें कि लोकसभा का कार्यकाल 16 जून 2024 को समाप्त होने वाला है.
पिछला लोकसभा चुनाव अप्रैल-मई 2019 में हुए थे. चुनाव के बाद, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने केंद्र सरकार बनाई, जिसमें नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने रहे (PM Narendra Modi).
चुनाव लड़ने वाले 6 राष्ट्रीय दल हैं जिनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP), कांग्रेस (Congress), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI(M), बहुजन समाज पार्टी (BSP), नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) और आम आदमी पार्टी (AAP). इन पार्टियों में बीजेपी और कांग्रेस चुनाव के मुख्य दावेदार हैं (Lok Sabha Elections 2024 National Parties).
कांग्रेस नेता राहुल गांधी का सवाल है, ‘मायावती ठीक से चुनाव क्यों नहीं लड़ रही हैं?’ और बीएसपी नेता ने जवाब में X पर 6 पोस्ट लिखी है - सवाल है कि राहुल गांधी को जवाब मिला क्या?
बीजेपी अध्यक्ष की कुर्सी संभालते वक्त जेपी नड्डा के सामने अमित शाह बनने जैसी मुश्किल चुनौती थी, लेकिन नये अध्यक्ष के सामने संघ की नजर में नड्डा न बनने की चुनौती होगी, और मोदी-शाह की अपेक्षाओं पर भी खरा उतरना होगा - अब जो भी पैमाने में फिट हो पाएगा, बीजेपी की कमान उसे ही थमाई जाएगी.
जगह जगह डबल इंजन होने के बावजूद लोकसभा चुनाव में बीजेपी की गाड़ी डिरेल हो गई थी. अब MOTN सर्वे बता रहा है कि भारतीय जनता पार्टी ट्रैक पर लगभग लौट आई है - और ये सिर्फ ब्रांड मोदी के कारण ही नहीं, बल्कि संघ के समर्थन से ही मुमकिन हो पाया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि स्वच्छता अभियान के चलते 2300 करोड़ का कबाड़ बेचकर लाभ हुआ. उन्होंने इथेनॉल की पहल और भ्रष्टाचार में कमी की वजह से देश के लाखों करोड़ की बचत की बात कही. महात्मा गांधी के ट्रस्टीशिप सिद्धांत का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि आर्थिक बचत देश के विकास में काम आ रही है, न कि शीशमहल के निर्माण में.
लोकसभा में अखिलेश यादव ने जाति जनगणना पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अब जाति जनगणना के पक्ष में है. अब जाति जनगणना को अब कोई नहीं रोक सकता. उन्होंने कांग्रेस से इस मुद्दे पर साथ देने का आग्रह किया. VIDEO
राहुल गांधी को INDIA ब्लॉक की परवाह न होने की एक वजह ये भी है कि 2029 के आम चुनाव से पहले होने वाले ज्यादातर विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए खास मायने नहीं रखते - ऐसे में अखिलेश यादव और लालू यादव जैसे नेताओं के लिए कांग्रेस का भी कोई महत्व नहीं रह जाता.
अयोध्या के मिल्कीपुर की लड़ाई आखिरी दौर में पहुंच चुकी है. योगी आदित्यनाथ जहां अखिलेश यादव को अलग अलग तरीके से घेर रहे हैं, वहीं समाजवादी नेता चुनाव की निष्पक्षता पर पहले से ही सवाल उठाने लगे हैं - आखिर ये बहस क्या इशारे कर रही है?
अयोध्या के हासिल से हिंदू समाज खुश है, और महाकुंभ में डुबकी लगाकर सेलीब्रेट भी कर रहा है. लेकिन, राम मंदिर पर राजनीतिक आवाज बुलंद करने वाली बीजेपी को अपने हिस्से की उपलब्धि के लिए अब भी मिल्कीपुर के नतीजे का इंतजार है, ताकि हार के मलाल से उसे मुक्ति मिल सके.
अरविंद केजरीवाल के खिलाफ स्वाति मालीवाल की मुहिम कभी थमी तो नहीं, लेकिन दिल्ली चुनाव से पहले राज्यसभा सांसद ने नये सिरे से मामला उठा दिया है. लोकसभा चुनाव में भी स्वाति मालीवाल केस का असर महसूस किया गया था - क्या पुराना वाकया आम आदमी पार्टी के लिए नया चैलेंज बनने जा रहा है?
हाल ही में एक पॉडकास्ट में जुकरबर्ग ने कहा, '2024 दुनिया भर में एक बड़ा चुनावी साल था. भारत जैसे सभी देशों में चुनाव हुए. हर जगह मौजूदा सरकारें चुनाव हार गईं. वैश्विक स्तर पर कुछ न कुछ ऐसा हुआ है, चाहे वह महंगाई के कारण हो, आर्थिक नीतियों के कारण हो या सरकारों के कोविड से निटपने के तरीकों के कारण, ऐसा लगता है कि इसका वैश्विक प्रभाव पड़ा है.'
उत्तर प्रदेश में होने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मिल्कीपुर उपचुनाव बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव है - जिसका रिजल्ट अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ दोनो के लिए सियासी मशाल साबित होने जा रहा है.
समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने मिल्कीपुर की जिम्मेदारी अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद को दे डाली है, क्योंकि, उम्मीदवार तो उनका बेटा ही है. और, इसलिए ये चुनाव उनके लिए भी प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है - योगी आदित्यनाथ के लिए मिल्कीपुर तो ‘बदलापुर’ ही बन गया है.
अजित पवार के मन में क्या चल रहा है, ये तो नहीं मालूम. मगर, उनकी मां चाहती हैं कि नये साल में चाचा-भतीजे फिर से साथ हो जायें - क्या ये वास्तव में संभव हो सकता है?
हम आज आपको 2024 के उन सियासी शख्सियतों से रू-ब-रू कराएंगे जो पूरे साल चर्चा में रहे. इस साल 8 राज्यों के विधानसभा और देश के आम चुनावों के नतीजों का इतिहास अपने साथ लेकर साल 2024 बीत चला है. ये साल राजनीति के मोर्चे पर काफी कठिन परीक्षाओं से भरा रहा.
चुनाव आयोग ने गुरुवार को लोकसभा चुनाव डेटा जारी किया है. डेटा के अनुसार, लोकसभा चुनावों में 64.4 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जिसमें महिला मतदाताओं का प्रतिशत 65.78 प्रतिशत रहा, जबकि पुरुष मतदाताओं का प्रतिशत 65.55 प्रतिशत रहा.
2024 में लोकसभा के साथ साथ 6 राज्यों की विधानसभाओं के भी चुनाव हुए. चुनाव नतीजों ने बहुतों को निराश भी किया, लेकिन कइयों के लिए उसमें खुशियों का पैगाम भी था, और कुछ नेताओं के लिए बड़ी राहत की बात भी.
वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा में अपने पहले ही भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टार्गेट किया है. प्रियंका गांधी ने भी वही सारी बातें बोली है, जो राहुल गांधी कहते आ रहे हैं - लेकिन अंदाज बहुत अलग देखने को मिला है.
राहुल गांधी अभी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं, और ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री. दोनो नेताओं की अहमियत अलग अलग लेवल की है - INDIA ब्लॉक के नेतृत्व में भी दोनो की अपनी अपनी तयशुदा हदें भी हैं, जाहिर है, प्रभाव भी.
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात कई लिहाज से महत्वपूर्ण है. बहाना भले ही प्रयागराज महाकुंभ बन रहा हो, लेकिन ये लोकसभा चुनाव के बाद दोनों नेताओं की पहली औपचारिक भेंट है - और हां, ये भी ध्यान रहे कि संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिलने के बाद.
उद्धव ठाकरे की राजनीति को करीब करीब खत्म माना जाने लगा है, सिर्फ बीएमसी चुनावों से ही थोड़ी बहुत उम्मीद बची है - अब देखना ये है कि एकनाथ शिंदे की आगे की पारी का क्या प्रभाव पड़ता है?
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में तो महाविकास अघाड़ी को उसकी गलतियां ही ले डूबी हैं. लगता है MVA के नेता लोकसभा की कामयाबी को हजम नहीं कर पाये, और आपस में ही लगातार लड़ते रहे.