लूना 25 (Luna 25) रूस के रोस्कोस्मोस (Roscosmos, Russia) का एक चंद्र लैंडर मिशन है जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास क्रेटर बोगुस्लाव्स्की पर उतरने वाला है. शुरुआत में इसे लूना-ग्लोब लैंडर कहा जाता था. 1970 के दशक से सोवियत लूना कार्यक्रम पर जोर देने के लिए इसका नाम बदलकर लूना 25 कर दिया गया था. यह पहला मून इंवेस्टिगेशन है जिसे रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोसमोस ने चंद्रमा पर भेजा है.
लूना 25 मिशन, 10 अगस्त 2023 को 23:10 यूटीसी पर रूस के पूर्वी अमूर क्षेत्र में वोस्तोचन कोस्मोड्रोम से सोयुज-2.1 बी रॉकेट के साथ लॉन्च हुआ (Luna 25 Launched Date). पिछला सोवियत मून लैंडर 1970 के दशक के मध्य में लूना 24 था.
NASA ने रूस के Luna-25 के क्रैश से हुए नुकसान को लेकर जारी की तस्वीर
Russia के फेल मून मिशन Luna-25 ने चांद की सतह पर करीब 33 फीट चौड़ा गड्ढा बना दिया है. ये गड्ढा लूना-25 के तेजी से टकराने की वजह से बना है. इस बात की पुष्टि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने की है. नासा ने इसे लेकर दो तस्वीरों का एक कॉम्बो जारी किया है. जिसमें क्रैश से पहले और बाद की तस्वीर है.
रूस के Luna-25 के गिरने से चांद पर हुआ 33 फीट चौड़ा गड्ढा.
रूस के फेल हुए लूना-25 से भी तीन गुना कम खर्च... चंद्रयान-3 मिशन कैसे हुआ संभव?
रूस के मून मिशन Luna-25 से करीब तीन गुना कम कीमत फिर भी Chandrayaan-3 सफल कैसे हुआ? क्या रूस से ज्यादा बेहतर तकनीक है हमारे पास? या ज्यादा बुद्धिमान वैज्ञानिक. आज आप इस स्टोरी में पढ़ेंगे कि कैसे भारत के इंटेलिजेंट वैज्ञानिकों ने इस मिशन को सफल बनाया. वो भी सिर्फ 615 करोड़ रुपए में.
खरगोश और कछुए की रेस की कहानी सबने सुनी, पढ़ी या कहीं न कहीं देखी होगी. भारत का चंद्रयान-3 लैंडिंग के लिए कछुए से भी कम स्पीड में करेगा लैंडिंग. सफलता मिलेगी या नहीं ये तो वक्त बताएगा. लेकिन हम ये जानने की कोशिश कर सकते हैं कि कैसे चंद्रयान-3 कछुए की गति से भी धीमी चाल से उतरेगा?
रूस का मून मिशन लूना-25 असफल हो गया है. इसकी असफलता पर ग्लोबल टाइम्स ने अपने एक लेख में कहा है कि रूस ने इस मिशन के जरिए यह दिखाने की कोशिश की थी कि यूक्रेन के साथ युद्ध के बीच उसकी राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी सामान्य तरीके से काम कर रही है. लेकिन उसके इस प्रयास को झटका लगा है. ग्लोबल टाइम्स ने भारत के चंद्रयान-3 पर भी टिप्पणी की है.
रूस का चांद पर जाने का सपना चकनाचूर हो गया. उसका स्पेसक्राफ्ट Luna-25 चांद की सतह पर क्रैश हो चुका है. रूसी स्पेस एजेंसी ने इस बात की पुष्टि की है. उन्होंने माना है कि उनसे गलत पैरामीटर्स सेट हुए. अपने डेटा एनालिसिस में गलती हुई. जिसकी वजह से यान गलत ऑर्बिट में गया और क्रैश हो गया.
अंतरिक्ष में भेजे गए रूस के मिशन मून को बड़ा झटका लगा है. अधिकारियों के मुताबिक, रूस का लूना-25 अंतरिक्ष यान अनियंत्रित कक्षा में घूमने के बाद चंद्रमा से टकराकर क्रैश हो गया है. 21 अगस्त को इसकी चांद पर सॉफ्ट लैंडिग होनी थी.
रूसी स्पेस एजेंसी रॉसकॉसमॉस ने कहा कि लूना-25 अंतरित्र यान के सामने चंद्रमा पर उतरने से पहले एक आपातकालीन स्थिति सामने आई है. स्पेस एजेंसी ने एक बयान में कहा कि, 'लैंडिंग से पहले की कक्षा में स्थानांतरित करने के लिए थ्रस्टर चलाया गया था. एक बयान में कहा गया है कि प्रबंधन टीम फिलहाल स्थिति का विश्लेषण कर रही है.
Chandrayaan-3 के विक्रम लैंडर आज यानी 20 अगस्त की सुबह 2 से 3 बजे के बीच चांद के और करीब पहुंच गया. अब वह 25 km x 135 km की ऑर्बिट में है. पहले वह 113 km x 157 km की ऑर्बिट में था. यानी अब चांद की सतह से विक्रम लैंडर की दूरी 25 किलोमीटर ही बची है. अब बस 23 को सफल लैंडिंग का इंतजार है.
अब चांद के कितने करीब पहुंचा रूस का Luna-25?