एम4 कार्बाइन (M4 Carbine) 1980 के दशक के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका में विकसित एक 5.56×45 मिमी नाटो, सेलेक्ट-फायर, गैस-संचालित, मैगजीन-फेड कार्बाइन-लेंथ असॉल्ट राइफल है. यह M16A2 असॉल्ट राइफल का छोटा एडिशन है.
M4 का इस्तेमाल अमेरिकी सेना द्वारा बड़े पैमाने पर किया जाता है. M4 को दुनिया भर के 60 से अधिक देशों ने अपने आर्मी में शामिल किया है.
सेना की गाड़ियों पर पहला हमला ही M4 से ही फायर किया जाता है. इसकी वजह ये बताई जा रही है कि इससे स्टील बुलेट फ़ायर की जाती है जो कि थिन स्किन गाड़ियों (बिना बुलेटप्रूफ वाली गाड़ी) की स्टील की चादर पर कॉपर बुलेट के मुक़ाबले आसानी से छेद कर देती है.
जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों ने हाल के हमलों में M4 कार्बाइन असॉल्ट राइफल्स का इस्तेमाल किया है. जानिए ये कितनी खतरनाक.
अमेरिका ने अपनी सेना के लिए जिस असॉल्ट राइफल को बनवाया था. वह आतंकियों तक कैसे पहुंचा? कैसे दुनियाभर के आतंकी समूह M4 Carbine का इस्तेमाल कर रहे हैं? इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल बताता है कि दुनियाभर में सिक्योरिटी को लेकर कहीं न कहीं चूक हो रही है. नुकसान हम सबको उठाना होगा.
यह हमला ऐसे समय पर किया गया, जब सुरक्षाबल कठुआ के बडनोटा में तलाशी अभियान चला रहे थे. तभी आतंकियों ने घात लगाकर हमला किया. सूत्रों का कहना है कि इलाके में रेकी के लिए स्थानीय गाइड ने आतंकियों की मदद की थी. इन गाइडों ने आतंकियों को खाना भी मुहैया कराया था और उन्हें पनाह दी थी.
जम्मू-कश्मीर हमले में आतंकवादियों ने अमेरिका में निर्मित राइफल एम 4 कार्बाइन का इस्तेमाल किया था.गुरुवार दोपहर को घात लगाकर किए गए इस हमले में 5 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे.
Gorakhpur Temple Attack: मुर्तजा इंटरनेट के जरिए आधुनिक हथियार जैसे- AK 47 Rifle, M4 Carbine, Missile Technology आदि के आर्टिकल पढ़ता और वीडियो भी देखता था. वह एयर राइफल से प्रैक्टिस भी करता था.