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मंगला गौरी व्रत

मंगला गौरी व्रत

मंगला गौरी व्रत

मंगला गौरी व्रत (Mangla Gauri Vrat) देवी पार्वती को समर्पित है. द्रिक पंचांग के अनुसार मंगला गौरी व्रत श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. इस दिन लोग व्रत रखते हैं और देवी गौरी की पूजा करते हैं.

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, श्रावण माह में मनाया जाने वाला मंगला गौरी व्रत बहुत महत्वपूर्ण और शुभ माना जाता है. यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और खुशी के लिए रखती हैं, तो वहीं, अविवाहित लड़कियां यह व्रत शिव की तरह पति पाने के लिए रखती हैं. अगर किसी की कुंडली में मंगल दोष या बाधा उत्पन्न हो रही है तो इस दिन की पूजा करना और व्रत रखना अत्यधिक लाभदायी होती है (Mangla Gauri Vrat Rituals). 

भक्त या तो श्रावण माह के दौरान व्रत रखने या श्रावण माह से शुरू करके सोलह सप्ताह तक व्रत रखने का संकल्प लेते हैं. मंगला गौरी व्रत सावन के प्रत्येक मंगलवार को मनाया जाता है. महिलाएं, विशेषकर नवविवाहित महिलाएं, देवी गौरी से वैवाहिक सुख पाने के लिए इसे मनाती हैं- Sawan Mangla Gauri Vrat.

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