मोहन चरण माझी (Mohan Majhi, CM Odisha) ओडिशा से भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं. वे ओडिशा के 15वें मुख्यमंत्री चुने गए हैं. मोहन माझी राज्य में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री हैं. उन्होंने 12 जून को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. बीजेपी ने 4 जून को 147 सदस्यीय ओडिशा विधानसभा में 78 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया और राज्य की 21 लोकसभा सीटों में से 20 पर जीत हासिल की.
पहली बीजेपी सरकार का नेतृत्व करते हुए वे 2019 के ओडिशा विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के रूप में क्योंझर निर्वाचन क्षेत्र चुने गए थे. उन्होंने वर्ष 2000 से 2009 के दौरान दो बार क्योंझर का प्रतिनिधित्व भी किया.
मोहन माझी का जन्म 6 जनवरी 1972 को ओडिशा में हुआ था. उनकी पत्नी डॉ प्रियंका मरंडी हैं.
संस्थान में पढ़ने वाले नेपाली छात्रों ने इस घटना के विरोध में प्रदर्शन किया था. प्रदर्शनकारी नेपाली छात्रों के साथ KIIT के सुरक्षाकर्मियों द्वारा मारपीट और दुर्व्यवहार करने, हॉस्टल से निकाले का आरोप है. नेपाल सरकार की मांग ओडिशा सरकार के समक्ष तब रखी गई जब उसकी विदेश मंत्री डॉ आरजू राणा देउबा ने 22 फरवरी को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से फोन पर बात की.
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य के SOG जवानों के जोखिम भत्ते को तीन गुना बढ़ाने की घोषणा की है. ओडिशा के SOG जवानों को अब 8 हजार रुपये की जगह 25 हजार रुपये जोखिम भत्ता के तौर पर मिलेगा.
मुख्यमंत्री ने हाल ही में बेमौसम बारिश के कारण कई जिलों में किसानों को हुए नुकसान पर चिंता व्यक्त की, और इस बात पर जोर दिया कि यह जश्न मनाने का समय नहीं है. उपमुख्यमंत्री प्रवती परिदा और केवी सिंह देव ने मुख्यमंत्री की भावनाओं को दोहराते हुए शोक अवधि के दौरान सम्मान के प्रतीक के रूप में नए साल के उत्सव से दूर रहने के अपने निर्णय की घोषणा की.
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सेना के मेजर और उनकी मंगेतर के साथ बदसलूकी मामले में बड़ा फैसला लिया है. सीएम ने रविवार को उपमुख्यमंत्री केवी सिंह देव और पार्वती परिदा, राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी, कानून मंत्री पृथ्वीविराज हरिचंदन और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की, उसके बाद न्यायिक जांच के आदेश जारी किए हैं. देखें
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सेना के मेजर और उनकी मंगेतर के साथ बदसलूकी मामले में बड़ा फैसला लिया है. सीएम ने रविवार को उपमुख्यमंत्री केवी सिंह देव और पार्वती परिदा, राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी, कानून मंत्री पृथ्वीविराज हरिचंदन और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की, उसके बाद न्यायिक जांच के आदेश जारी किए हैं.
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन माझी ने राजनीतिक अस्थिरता के मद्देनजर राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान के लिए नई पहल का ऐलान किया है. जिलों के अधिकारियों को सख्ती से निपटने के निर्देश दिए गए हैं और ब्लॉक, तहसील, और पुलिस स्तर पर कमेटी का गठन किया गया है.
ओडिशा सीएम ने ममता बनर्जी से पूछा कि आपको किसने अधिकार दिया ओडिशा के बारे में ऐसे आपत्तिजनक बयान देने का? ओडिशा एक शांतिपूर्ण राज्य है और यहां के लोग जिम्मेदार और जागरूक हैं, ओडिशा के लोग आपके नफरत भरे रवैये, नकारात्मक टिप्पणियों और हमारे राज्य के प्रति असंवेदनशील रवैये को कभी भी स्वीकार नहीं करेंगे.
बीजद के वरिष्ठ नेता और ओडिशा के पूर्व मंत्री प्रताप केशरी देब ने सोमवार को कहा कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का बयान “दुर्भाग्यपूर्ण” है और उन्हें अपने पद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए. असल में सीएम मोहन चरण माझी ने दावा किया था कि पिछली नवीन पटनायक सरकार ने उन्हें मंत्री पद और खनिज ब्लॉक का लालच दिया था.
उपमुख्यमंत्री केवी सिंह देव को छोड़कर नई मंत्रिपरिषद में किसी भी सदस्य के पास मंत्री पद का अनुभव नहीं है. इसी तरह 16 सदस्यीय टीम में से 9 मंत्री पहली बार विधायक बने हैं. सीएम ने अपनी टीम में 21 मंत्रियों की स्वीकार्य सीमा के मुकाबले केवल 15 मंत्रियों को शामिल किया है. कुछ मंत्रियों को एक से अधिक विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
ओडिशा की नई बीजेपी सरकार में मंत्रियों का विभागों का बंटवारा हो गया है. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के पास गृह, सामान्य प्रशासन और लोक शिकायत, सूचना एवं जनसंपर्क और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी रहेगी. डिप्टी सीएम कनक वर्धन सिंह को कृषि एवं किसान सशक्तिकरण, ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है.
ओडिशा CM के लिए नहीं है कोई सरकारी आवास, पटनायक ने 24 साल घर से किया काम, जानें- कहां रहेंगे नए मुख्यमंत्री?
ओडिशा में पहली बार BJP ने अपने दम पर सरकार बनाई है और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को सत्ता सौंपी है. 52 साल के माझी आदिवासी समुदाय से आते हैं और उनके पिता एक चौकीदार थे. माझी ने पंचायत से लेकर विधानसभा तक का सफर तय किया. संघर्ष के दिनों में उन्हें फुटपाथ तक पर सोना पड़ा था.
ओडिशा में पहली बार बीजेपी की सरकार बन गई है. मोहन माझी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि नए सीएम माझी रहेंगे कहां? वो इसलिए क्योंकि 24 साल तक नवीन पटनायक ने से घर ही काम किया और यहां मुख्यमंत्री के लिए कोई सरकारी आवास नहीं है.
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बुधवार शाम राज्य सचिवालय लोक सेवा भवन में अपने मंत्रियों के साथ बैठक की अध्यक्षता की. उसके बाद कैबिनेट से जुड़े फैसलों के बारे में जानकारी दी. माझी सरकार ने पुरी के जगन्नाथ मंदिर से लेकर किसानों और महिलाओं से जुड़े बड़े फैसले लिए हैं.
ओडिशा में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का कमल खिल गया है. राज्य के 15वें सीएम के रुप में बीजेपी के आदिवासी नेता मोहन चरण माझी ने शपथ ले ली हैं. इसके अलावा राज्य को दो डिप्टी सीएम भी मिले हैं. इसके अलावा 13 मंत्रियों ने भी शपथ ली हैं. शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी और राज्य के पूर्व सीएम नवीन पटनायक भी पहुंचे थे. VIDEO
ओडिशा में मोहन चरण माझी बने सीएम, साथ में दो डिप्टी सीएम ने ली शपथ.
बीजेपी ने मोहन माझी को ओडिशा का नया मुख्यमंत्री बनाया है. माझी को सीएम बनाए जाने को लेकर जब उनके परिवार से पूछा गया तो उनके परिवार ने इस पर खुशी और हैरानी जताई. माझी की पत्नी ने कहा कि 'मैंने कभी नहीं सोचा था कि वो सीएम बनेंगे, मुझे उम्मीद थी कि वो नए भाजपा मंत्रिमंडल में मंत्री बन सकते हैं'.
ओडिशा में मोहन चरण मांझी की सरकार का आगाज हो गया है. बीजेपी विधायक दल की बैठक में मोहन को नेता चुना गया और अब उन्होंने सीएम पद की शपथ भी ले ली है. सवाल है कि बीजेपी ने नवीन पटनायक की जगह ले रहे मोहन माझी पर दांव क्यों खेला?
मोहन चरण माझी ने बुधवार को ओडिशा के 15वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. उन्होंने उड़िया भाषा में शपथ ली और सभी को साथ लेकर चलने का वादा किया. इस दौरान पीएम मोदी, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी समेत बीजेपी के दिग्गज नेता मंच पर मौजूद थे. शपथग्रहण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी और फूलों का गुलदस्ता भेंट किया.
विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर बहुमत हासिल किया. इसी के साथ राज्य में 24 साल बाद बीजेडी सत्ता से बाहर हुई. बीजेपी को 147 सीटों में 78 सीटें मिलीं. नवीन पटनायक साल 2000 से लगातार 2024 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे. वो इस पद पर 24 साल और 98 दिन तक रहे. अब प्रदेश में पहली बार बीजेपी सरकार बनने पर माझी मुख्यमंत्री बने हैं.
देशभर के 14 राज्यो में 23 डिप्टी सीएम हैं. हाल के समय में जितने भी राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं, सब जगह डिप्टी सीएम बनाए गए हैं. ओडिशा में दो और आंध्र में एक डिप्टी सीएम है. जबकि, डिप्टी सीएम के पद का जिक्र संविधान में कहीं नहीं है. ऐसे में जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने डिप्टी सीएम के पद को असंवैधानिक क्यों नहीं माना था?