चंद्रमा
चंद्रमा (Moon) पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है (Natural satellite of Earth). पृथ्वी के व्यास के लगभग एक-चौथाई है. यह सौर मंडल का पांचवां सबसे बड़ा उपग्रह है (Fifth satellite of the Solar System).
चंद्रमा पर वातावरण, जलमंडल या चुंबकीय क्षेत्र नहीं है. इसकी सतह का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के लगभग एक-छठे (One sixth) (0.1654 ग्राम) है.
SpaceX Falcon 9 रॉकेट ने केप कैनावेरल में कैनेडी स्पेस सेंटर से नासा के लूनर ट्रेलब्लेज़र ऑर्बिटर को लेकर उड़ान भरी. लूनर ट्रेलब्लेज़र अंतरिक्ष यान को लॉकहीड मार्टिन के LMT.N स्पेस डिवीजन द्वारा बनाया गया था.
दशकों से ये माना जा रहा था कि बृहस्पति ग्रह के बर्फीले चांद यूरोपा की बर्फ की मोटी चादरों के नीचे जीवन होगा. लेकिन ये परत इतनी मोटी है कि जीवन की उम्मीद भी बेकार हो चुकी है. बर्फ इस मोटी परत के नीचे नमकीन पानी का समंदर है. लेकिन हाल ही में आइस शीट की चौड़ाई के खुलासे के बाद वैज्ञानिक हैरान हैं.
धरती के पास दो महीने तक 'दूसरा चंद्रमा' था. जो 25 नवंबर 2024 को पृथ्वी को छोड़कर अंतरिक्ष में निकल गया. सवाल ये है कि क्या अब ये मिनी-मून कभी वापस लौटेगा. या अब ये कभी धरती की ओर नहीं आएगा. ये चांद 29 सिंतबर से 25 नवंबर तक हमारी धरती की ऑर्बिट में चक्कर लगा रहा था.
ISRO तैयार है. Chandrayaan-4 अगले चार साल में लॉन्च करने की प्लानिंग है. इस बार ये मिशन कई जटिल तकनीकी घटनाओं का मिश्रण होगा. इस मिशन में कई कमाल की चीजें होंगी. चांद से मिट्टी-पत्थर का सैंपल धरती पर लाया जाएगा. अंतरिक्ष में डॉकिंग-अनडॉकिंग होगी.
NASA वैज्ञानिकों को एक ऐसा चंद्रमा मिला है, जो खत्म हो रहा है. उसकी सतह पर लावा फूट रहा है. यह चंद्रमा हमारे चंद्रमा जैसा शांत नहीं है. सतह पर लावा बह रहा है. बीच-बीच में इससे जहरीली गैस निकल रही है. साथ ही यह बिजलियां भी उगल रहा है. ऐसा लग रहा है कि ये मरने वाला है.
NASA ने Europa Clipper नाम का स्पेसक्राफ्ट बृहस्पति ग्रह के चंद्रमा यूरोपा की तरफ भेज दिया है. 290 करोड़ km की यात्रा पूरी करने में इस यान को करीब 6 साल लगेंगे. यानी यह 2030 में यूरोपा तक पहुंचेगा. वहां यूरोपा की सतह के नीचे मौजूद समंदर में जीवन की खोज करेगा.
धरती को दो महीनों के लिए दूसरा चांद मिलने वाला है. ये एक मिनी मून (Mini-Moon). ये छोटा चंद्रमा 29 सितंबर से 25 नवंबर तक धरती का चक्कर लगाएगा. जानिए आप इसे देख पाएंगे या नहीं...
क्या आपने कभी सोचा है कि अगर पृथ्वी के दो चंद्रमा होंगे तो क्या होगा? कुछ ऐसा ही जल्द होने वाला है. क्योंकि कुछ समय के लिए पृथ्वी के 'दो चंद्रमा' होने वाले हैं. पृथ्वी अपनी कक्षा में एक एस्टेरॉयड को आकर्षित करने वाला है. वैज्ञानिक इसे मिनी मून कह रहे हैं. हालांकि यह कुछ महीनों के लिए ही पृथ्वी के मिनी मून के रूप में रहेगा. देखें वीडियो.
चंद्रमा के खनिजों का बना रहे थे नक्शा.. वैज्ञानिकों को मिला पानी और ऑक्सीजन का खजाना.
सितंबर के महीने में धरती के पास मिनी मून नजर आएगा. ये मिनी मून 29 सितंबर से 25 नवंबर तक धरती का चक्कर लगाएगा.
चंद्रमा पर खनिजों का नक्शा बनाने के बाद वैज्ञानिकों को पूरी सतह पर पानी मिला है. इसके साथ ही मिला है हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बनने वाला हाइड्रोक्सिल. ये वहां भी मिला है, जहां पर सूरज की रोशनी काफी तेज है. यानी बहुत तेज रोशनी और गर्मी में भी पानी के ये कण खत्म नहीं हो रहे हैं.
धरती को दो महीनों के लिए दूसरा चांद मिलने वाला है. या यूं कहे कि मिनी मून (Mini-Moon). कहीं दूसरी दुनिया से कोई हमारी धरती पर विंडो शॉपिंग करने तो नहीं आ रहा. ये मिनी मून 29 सितंबर से 25 नवंबर तक धरती का चक्कर लगाएगा. आइए जानते हैं सुदूर अंतरिक्ष से आ रहे इस नए मेहमान के बारे में...
Chandrayaan 4 Mission: बड़ी खुशखबरी आई है... भारत सरकार ने ISRO के चंद्रयान-4 मिशन को मंजूरी दे दी है. इस मिशन में कई कमाल की चीजें होंगी. चांद से सैंपल धरती पर आएगा. अंतरिक्ष में डॉकिंग और अनडॉकिंग होगी. आइए जानते हैं कि इस मिशन में क्या चीजें खास हैं?
China सिर्फ अगले 11 साल में चांद के दक्षिणी ध्रुव पर बेस बना लेगा. ये दावा चीन की स्पेस एजेंसी CNSA ने किया है. चंद्रमा पर चीन इंटरनेशनल लूनर रिसर्च स्टेशन बनाने जा रहा है. जिसमें उसका साथ देगा रूस. इसका शुरूआती रोडमैप तीन साल पहले ही सामने आ चुका है.
आज आसमान में चांद की रोशनी 30% ज्यादा होगी और चंद्रमा 14% बड़ा दिखेगा. यानी आज आसमान में निकलेगा Supermoon. इसे Blue Supermoon भी कहते हैं.
आज 19 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन अंतरिक्ष में एक अलग नजारा देखने को मिलेगा. आज आसमान में चांद की रोशनी 30 फीसदी ज्यादा होगी, क्योंकि आज ब्लू सुपरमून निकलेगा.
आज सिर्फ सावन का आखिरी सोमवार या रक्षाबंधन ही नहीं है. बल्कि आज आसमान में अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा. आज का चांद एक सुपरमून है. ब्लू सुपरमून (Blue Supermoon). यानी नीला चांद. आइए जानते हैं इस सुपरमून की खासियत...
इस साल का सबसे बड़ा और चमकीला Supermoon 19 अगस्त 2024 यानी रक्षाबंधन वाले दिन शाम को दिखाई देगा. लेकिन इसका नाम बेहद विचित्र है. ये है - स्टरजियॉन मून (Sturgeon Moon). इसे ब्लू सुपरमून (Blue Supermoon) भी बुलाते हैं. आइए जानते हैं क्या इस बार चंद्रमा नीले रंग का होगा?
आखिरकार चांद पर वो जगह मिल ही गई, जहां भविष्य में एस्ट्रोनॉट्स रह सकते हैं. ये चांद की सतह पर मौजूद ऐसे गड्ढे हैं, जहां पर आसानी से इंसानी बस्ती बनाई जा सकती है. साइंटिस्ट इन्हें गुफा भी बुला रहे हैं. इनके अंदर एस्ट्रोनॉट्स चांद पर आने वाले खतरनाक रेडिएशन से भी बचे रहेंगे.
ISRO चीफ डॉ. एस. सोमनाथ ने कहा है कि Chandrayaan-4 को एक बार में लॉन्च नहीं किया जाएगा. इसे दो हिस्सों लॉन्च किया जाएगा. इसके बाद अंतरिक्ष में इसके मॉड्यूल्स को जोड़ा जाएगा. यही तकनीक भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन बनाने में मदद करेगी.
चांद के अंधेरे वाले हिस्से से सैंपल लेकर धरती पर सुरक्षित वापस लौट आया है चीन का स्पेसक्राफ्ट Chang'e-6. चीन ने चांद से सैंपल लाने का कमाल दूसरी बार किया है. अंधेरे वाले इलाके से सैंपल लाने वाला पहला देश बन चुका है. चीन के स्पेसक्राफ्ट ने इनर मंगोलिया के रेगिस्तान में सेफ लैंडिंग की. जहां से उसे रिकवर कर लिया गया है.