मून रोवर
मून रोवर या चंद्रमा रोवर (Moon rover) एक अंतरिक्ष अन्वेषण वाहन (space exploration vehicle) है जिसे चंद्रमा की सतह पर जाने के लिए डिजाइन किया गया है. अपोलो प्रोग्राम के लूनर रोविंग व्हीकल (Apollo Program's Lunar Roving Vehicle) को 3 अमेरिकी क्रू- अपोलो 15, 16 और 17 (Apollo 15, 16, and 17) के सदस्यों ने चंद्रमा पर चलाया था. कई अन्य रोवर आंशिक रूप से या पूरी तरह से ऑटोनोमस रोबोट हैं (partially or fully autonomous robots), जैसे कि सोवियत संघ (Lunokhods) के लूनोखोड्स और चीनी यूटस (Yutus).
तीन देशों के पास चंद्रमा पर ऑपरेटिंग रोवर हैं: सोवियत संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन. भारत का एक मिशन विफल रहा जबकि जापान और ग्रीस ने वर्तमान में मिशन की योजना बनाई है (Three countries have operating rovers).
सितंबर के महीने में धरती के पास मिनी मून नजर आएगा. ये मिनी मून 29 सितंबर से 25 नवंबर तक धरती का चक्कर लगाएगा. इस मिनी मून को 2024 पीटी5 नाम दिया गया है. इस एस्टेरॉयड का व्यास लगभग 10 मीटर का है. दूसरे मून को लोग सिर्फ टेलीस्कोप से ही देख सकेंगे. इस मिनी मून के बारे में ज्यादा जानने के लिए देखें वीडियो.
China का लेटेस्ट मून मिशन Chang'e 6 चंद्रमा के ऑर्बिट में पहुंच गया है. बहुत जल्द यह चांद की सतह पर उतरेगा. खास बात ये है कि इस बार चीन ने अपने इस मिशन के साथ PAK समेत चार देशों के सीक्रेट पेलोड्स और रोबोट भी भेजा है. जिसके बारे में चीन ने कोई खुलासा नहीं किया कि ये चंद्रमा पर क्या काम करेंगे?
China ने चंद्रमा पर अपना नया मिशन भेजा. पर क्यों? वो भी पिछले हिस्से में. जहां हमेशा अंधेरा रहता है. जिसे Far Side या Dark Side कहते हैं. चीन ने चंद्रमा के पिछले हिस्से में क्या खोजने के लिए यह मिशन किया है. क्यों अभी तक कोई और देश इस इलाके में नहीं पहुंच पाए हैं?
NASA चाहता है कि चांद पर उसके एस्ट्रोनॉट्स कार चलाएं. ताकि वो ज्यादा लंबी दूरी तय करके पानी की खोज कर सकें. इसलिए नासा ने तीन कंपनियों को चुना है. ये कंपनियां अब चांद की सतह पर चलने वाली लूनर टरेन व्हीकल्स यानी LTV बनाएंगे. जानिए क्या है नासा का पूरा प्लान...
चांद पर एक और मिशन जाने की तैयारी में है. नासा का वाइपर मून रोवर 80 फीसदी तैयार हो चुका है. इस साल के अंत तक इस रोवर को नासा चंद्रमा पर भेजेगा. यह रोवर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ की खोज करेगा.
China अब चांद के अंधेरे वाले हिस्से में अपना स्पेसक्राफ्ट उतारने जा रहा है. वहां से सैंपल इकट्ठा करके धरती पर वापस आएगा उसका यान. इस मिशन का नाम है Chang's-6. ऐसा पहली बार होगा जब कोई देश चांद के Far Side में सैंपल रिटर्न मिशन भेज रहा है. इससे पहले चीन ने वहां अपना लैंडर उतारा था.
Intuitive Machines IM-1 Mission: आधी सदी के बाद अमेरिका (US) चांद पर अपना यान उतारने जा रहा है. वह एक निजी कंपनी के मून लैंडर को चांद की सतह पर उतार रहा है. लॉन्चिंग SpaceX के रॉकेट से की जा रही है. इस लैंडर को इंट्यूशिव मशींस (Intuitive Machines) कंपनी ने बनाया है. इसका नाम है ओडिसियस लैंडर (Odysseus Lander).
Japan के पहले मून लैंडर SLIM की चांद की सतह पर पड़े हुए कि पहली फोटो आ गई है. यह फोटो ली है LEV-2 रोबोट रोवर ने. जो इस लैंडर के साथ गया था. ये एक ऐतिहासिक तस्वीर है. ये इमेज 24 जनवरी 2024 की रात में ली गई है.
Japan का SLIM मून मिशन सफलतापूर्वक चांद की सतह पर उतर चुका है. इसके साथ ही जापान ये सफलता हासिल करने वाला दुनिया पांचवां देश बन गया है. जापान के अंतरिक्षयान ने धरती से चांद तक पहुंचने के लिए 5 महीने की यात्रा की.
Japan का SLIM मून मिशन आज रात करीब 8:50 बजे के आसपास चांद की सतह पर लैंडिंग करेगा. सफलता मिली तो सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला 5वां देश बन जाएगा. इसी के साथ स्लिम स्पेसक्राफ्ट की पांच महीने की यात्रा पूरी हो जाएगी. जानिए कहां देख सकते हैं आप इसे Live...
6 सितंबर 2023 को Japan ने अपने मून मिशन SLIM को चांद की ओर भेजा था. ये अब जाकर चांद की ऑर्बिट में पहुंचा है. 19 जनवरी 2024 को संभव है कि ये चांद की सतह पर लैंड करे. अगर ऐसा होता है तो जापान चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पांचवा देश बन जाएगा. ये जानकारी जापानी स्पेस एजेंसी JAXA ने दी है.
अमेरिका 50 साल बाद चंद्रमा पर वापस जा रहा है. अगले महीने की 25 तारीख को NASA एक लैंडर को लॉन्च करेगा. आखिरी अपोलो मिशन के बाद पहली बार अमेरिकी स्पेस एजेंसी कोई मून मिशन करने जा रही है. वह पहली बार किसी निजी कंपनी के लैंडर को चांद की सतह पर उतारने जा रही है.
चंद्रमा के शिव शक्ति बिंदु पर आज सूर्योदय होने की उम्मीद है. मतलब, जल्द ही चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर को उपयोगी मात्रा में सूर्य का प्रकाश मिलने लगेगा. इसरो 22 सितंबर को विक्रम और प्रज्ञान के साथ फिर संचार स्थापित करने का प्रयास करेगा.
Australia भी 2026 में अपना मून मिशन भेजने वाला है. इसके लिए वह नासा के अर्टेमिस मिशन का सहारा लेगा. यह रोवर चांद की सतह पर मिट्टी की जांच करेगा. जिसे रिगोलिथ कहते हैं. यह उस मिट्टी के सैंपल की जांच करके ऑक्सीजन के लेवल का पता करेगा.
Japan ने अपना मून मिशन लॉन्च कर दिया है. अगर इसका SLIM लैंडर चांद पर उतरता है, तो जापान चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाला दुनिया का पांचवां देश हो जाएगा. लॉन्चिंग दक्षिणी जापान के तांगेशिमा स्पेस सेंटर से की गई. स्लिम मिशन को जापानी स्पेस एजेंसी के H-2A रॉकेट से लॉन्च किया गया.
ऑस्ट्रेलिया भी अब भारत, अमेरिका, रूस और चीन के बाद अपना पहला मून मिशन भेजना चाहता है. वह NASA के अर्टेमिस मिशन के साथ अपना मून रोवर भेजेगा. उम्मीद है कि यह मिशन 2026 में जाएगा. यह रोवर चांद की सतह पर मिट्टी की जांच करेगा. जिसे रिगोलिथ कहते हैं. आइए जानते हैं इस मिशन के बारे में...
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर Chandrayaan-3 की सफल लैंडिंग के बाद अब अमेरिका भी अपना मून रोवर लेकर आ रहा है. NASA ने अपने अगले मून रोवर मिशन VIPER के प्रोटोटाइप को लेकर सामने आया है. उसने एक ट्वीट से अपने नए मून रोवर के मूवमेंट को दिखाया है. आइए जानते हैं कि क्या वाइपर की खासियत क्या है?
इसरो ने शेयर किया रोवर प्रज्ञान का नया वीडियो
Chandrayaan-3 चांद पर उतरा. पूरे देश और दुनिया ने खुशी मनाई. लेकिन उतरने से ठीक पहले '15-20 मिनट ऑफ टेरर' क्या था? ये असल में वह समय था तब इसरो वैज्ञानिकों समेत पूरे देश की सांसें थमी थीं. सफल लैंडिंग होगी या नहीं इसे लेकर चिंता थी. अब समझिए इसे आसान शब्दों में...
Chandrayaan-3 का लैंडर जहां उतरा है, वहां की तस्वीर चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने भेजी हैं. तस्वीर में साफ-साफ चंद्रयान-3 का लैंडर दिख रहा है. यहां दो फोटो का कॉम्बो है, जिसमें बाईं तरफ वाली फोटो में जगह खाली है. दाहिनी फोटो में विक्रम लैंडर चांद की सतह पर उतरा हुआ दिखता है. आप भी देखिए इस शानदार तस्वीर को...
हिंदुस्तान ने बता दिया है कि अंतरिक्ष के सिकंदर हम ही हैं. पहली बार चांद के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर भारत का राष्ट्रीय चिन्ह छप गया है. पहली बार चांद के दक्षिणी ध्रुव पर भारत का तिरंगा लहराया है. आज की तारीख दुनिया के कैलेंडर में इतिहास के तौर पर दर्ज हो गई है. इसरो की इस महान उपलब्धि पर पूरे देश को गर्व है. पूरा देश आज उत्सव मना रहा है.