मोरबी केबल ब्रिज हादसा
गुजरात राज्य (Gujarat) के मेरबी में 20 अक्टूबर 2022 को केबल ब्रिज के टूटने से लगभग 100 से ज्यादा लोगों की मौत गई थी (Morbi Cable Bridge Collapse Death). यह हादसा मोरबी में बहने वाली मच्छु नदी (Machhu River, Morbi) पर बने केबल ब्रिज के अचानक टूटने से हुआ. जानकारों के मुताबिक यह ब्रिज 100 साल पुराना था. इस पुल की हालत काफी जर्जर हो चुकी थी, जिसके कारण इसे बंद कर दिया गया था. लेकिन इसकी मरम्मत कराई गई और उद्घाटन के बाद जनता के लिए खोल दिया गया (Morbi Cable Bridge Repair).
रविवार, 30 अक्टूबर 2022 को छुट्टी थी, जिसकी वजह से लोग सालों बाद खुले केबल ब्रिज घूमने आए हुए थे. इस हादसे के वक्त पुल पर 400 से ज्यादा लोग मौजूद थे (Morbi Cable Bridge Collapse Date). अचानक केबल टूटने से लोग नदी में गिर गए. रेस्क्यू के लिए सेना, नेवी, एयरफोर्स एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ की टीमें पहुंचर लोगों को बचाने की कोशिश में जुटी, जिसमें 177 लोगों को रेस्क्यू किया गया. इस हादसे में राजकोट से बीजेपी सांसद मोहनभाई कल्याणजी कुंदारिया के लगभग 12 रिश्तेदारों की भी मौत हो गई (Morbi Cable Bridge Collapse BJP Leader).
मरम्मत के बाद ही ब्रिज गिर गया इसके पीछे के कारणों की जांच होगी. मोरबी हादसे को लेकर रखरखाव करने वाली एजेंसी के खिलाफ 304, 308 और 114 के तहत क्रिमिनल केस दर्ज किया गया है (Morbi Cable Bridge Collapse Criminal Cases).
हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि मोरबी हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारी और पदाधिकारियों पर क्या एक्शन लिया गया. बता दें कि मोरबी के केबल ब्रिज को बहाल करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. इसमें कहा गया था कि टूटा हुआ पुल एक विरासत पुल था, इसे फिर से बनाया जाए.
गुजरात हाई कोर्ट ने लापरवाही के लिए ओरेवा कंपनी को नोटिस जारी किया है. इसके साथ ही कोर्ट ने फटकारते हुए कहा कि, आप यहां लुका-छिपी खेलने नहीं आए, आप हर वक्त ऐसा कर रहे हैं. पहले कहा गया कि एमडी जेल में हैं और अब दूसरा बहाना बनाया जा रहा है. कोर्ट ने कहा कि, यह स्वत: संज्ञान से की गई सुनवाई है, हम कंपनी की बात सुनने के लिए बाध्य नहीं हैं.
मोरबी जिले में मच्छु नदी पर बना हैंगिंग ब्रिज 30 अक्टूबर 2022 को टूट गया था. हादसे के वक्त इस पर 300-400 लोग मौजूद थे. सभी लोग नदी में गिर गए थे. हालांकि, इनमें से कुछ की जान बचा ली गई थी. इस हादसे में 135 लोगों की मौत हुई थी.
पिछले साल 30 अक्टूबर को मोरबी पुल हादसे में कुल 135 लोगों की मौत हो गई थी. आरोपी जयसुख पटेल पुल का रखरखाव करने वाली कंपनी ओरेवा के मैनेजिंग डायरेक्टर थे. पटेल सहित कुल 10 आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 304, 308, 336 व 337, 338 के तहत केस दर्ज किया गया था. पुल हादसे की जांच के दौरान एसआईटी को कई खामियां मिली थीं.
पिछले साल 30 अक्टूबर को मोरबी में सस्पेंशन ब्रिज ढह गया था. इस हादसे में 135 लोगों की मौत हुई थी. आज इस घटना को पूरे एक साल हो गया है. अहमदाबाद में मृतक के परिजनों ने शोकसभा आयोजित की. इस दौरान उन्होंने आजतक से बात कर अपना दर्द बयां किया. देखें वीडियो
मोरबी ब्रिज हादसे के पीड़ित परिवारों के लिए गुजरात हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने प्रत्येक मृतक के पीड़ित परिवार को 10 -10 लाख रुपए और घायलों को 2-2 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है. पिछले साल 30 अक्टूबर को हुए हादसे में 135 लोग झुलतो पुल टूटने से जिंदा नदी में समा गए थे. देखें गुजरात बुलेटिन.
गुजरात हाई कोर्ट ने मोरबी ब्रिज हादसे में ओरेवा कंपनी को पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख रुपये और घायलों को 2-2 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. बीते साल 30 अक्टूबर को हुए हादसे में 135 लोगों की मौत हुई थी.
SIT की रिपोर्ट में कहा गया है कि मोरबी ब्रिज हादसे के लिए नगर पालिका के साथ-साथ ओरेवा कंपनी भी जिम्मेदार है. रिपोर्ट में बताया गया है कि मोरबी नगरपालिका के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और चीफ ऑफिसर ने एग्रीमेंट को ठीक तरह से नहीं लिया.
मोरबी का 765 फीट लंबा और 4 फुट चौड़ा पुल 143 साल पुराना था. इस पुल का उद्घाटन 1879 में किया गया था. इस केबल ब्रिज को 1922 तक मोरबी में शासन करने वाले राजा वाघजी रावजी ने बनवाया था. वाघजी ठाकोर ने पुल बनाने का फैसला इसलिए लिया था, ताकि दरबारगढ़ पैलेस को नजरबाग पैलेस से जोड़ा जा सके.
गुजरात के मोरबी में हुए पुल हादसे के मामले में ओरेवा ग्रुप के प्रबंध निदेशक (एमडी) जयसुख पटेल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. जयसुख पटेल की कंपनी पर ही मोरबी पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी थी. बीते 31 जनवरी को उनके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था. इसके बाद पटेल ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था.
मोरबी में हुए पुल हादसे में पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दी है. पुलिस ने अपनी चार्जशीट में ओरेवा ग्रुप के मालिक जयसुख पटेल समेत 10 लोगों को आरोपी बनाया है. इस मामले में पुलिस ने अबतक 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है.
मोरबी में पिछले साल 30 अक्टूबर को हैंगिंग ब्रिज टूट जाने से 135 लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले में ब्रिज का मेंटेनेंस देख रही कंपनी ओरेवा ग्रुप के एमडी जयसुख पटेल ने हाई कोर्ट को बताया कि वह हादसे से दुखी हैं. वह पीड़ित परिवारों को मुआवजा भी देने को तैयार हैं. हालांकि इस पर कोर्ट ने उन्हें चेताया भी. इसके अलावा कोर्ट ने सरकार और नगरपालिका को फटकार लगाई है.
गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी पर बना हैंगिंग ब्रिज पिछले साल 30 अक्टूबर को टूट गया था. जब यह हादसा हुआ था तब पुल पर करीब 300-400 लोग थे. इस हादसे में करीब 135 लोगों की जान चली गई थी. इस हादसे में सरकार ने मोरबी नगर पालिका को बर्खास्त करने के लिए अध्यक्ष को नोटिस भेजा था लेकिन उन्होंने नोटिस का जवाब देने से इनकार कर दिया है.
मोरबी हादसे में पीड़ित परिवारों को अभी तक न्याय नहीं मिल पाया है. हादसे की जांच के लिए कई कमेटियां बनाई गईं. कई लोगों पर आरोप भी लगे, जिसके बाद गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर ओरेवा कंपनी के मालिक जयसुख पटेल को नोटिस जारी किया था.
मोरबी हादसे में गुजरात हाई कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए ओरेवा कंपनी के मालिक जयसुख पटेल को नोटिस भेज दिया है. उस नोटिस पर जयसुख को अगली सुनवाई तक जवाब देना होगा. कोर्ट द्वारा मोरबी कॉरपोरेशन पर भी एक्शन लेने की बात कही गई है. अगर उनके स्तर पर कोई लापरवाही सामने आती है, तो उन्हें भी ना बख्शने की बात हो रही है.
तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता साकेत गोखले की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. मोरबी पुल हादसे में अहमदाबाद की मेट्रोपॉलिटन कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी. वहीं थोड़ी देर बाद पुलिस ने उन्हें मोरबी हादसे से जुड़े एक और मामले में गिरफ्तार कर लिया है. टीएमसी अब उनकी रिहाई की मांग की है.
गुजरात की एक सीट पर लोगों की खास नजर थी. वो सीट है मोरबी. दरअसल, यहां अक्टूबर में हुए पुल हादसे में सौ से अधिक लोगों की जान गई थी. जिसको लेकर लगातार चर्चा थी कि बीजेपी को इस सीट पर नुकसान उठाना पड़ सकता है. हालांकि नतीजे इसके उलट आए.
हावड़ा में भीषण सड़क हादसा हो गया जहां एक ट्रक से गाड़ी टकरा गई और 7 लोगों से भरी एक गाड़ी पलट गई. टक्कर में गाड़ी के परखच्चे उड़ गए लेकिन जाको राखे साईंयां वाली कहावत चरितार्थ हुई, भीषण हादसे में भी सारे सवार बच गए. देखें 100 शहर 100 खबरों का ये एपिसोड.
गुजरात के मोरबी में 30 अक्टूबर की शाम केबल ब्रिज टूटने से बड़ा हादसा हो गया था. इसमें 135 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. इस हादसे के बाद उत्तराखंड सरकार ने सभी ब्रिजों की जांच के आदेश दे दिए थे. यहां के करीब 36 पुलों को असुरक्षित पाया गया है. सरकार ने तुरंत आवागमन रोकते हुए इन पुलों के मरम्मत के लिए काम शुरू कर दिया है.
गुजरात के मोरबी पुल हादसे की कोर्ट की निगरानी में जांच और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई के लिए दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा कि घटना की स्वतंत्र जांच के साथ हादसे से जुड़े सभी पहलुओं जैसे नगरपालिका अधिकारियों की जवाबदेही, अजंता मैन्युफैक्चरिंग के बड़े लोगों पर कार्रवाई, बढ़ा मुआवजा जैसे मुद्दों पर पहले हाई कोर्ट सुनवाई करेगा.
गुजरात की सत्ता में बीजेपी भले ही 27 वर्षों से काबिज है, लेकिन इस बार समीकरण बदले-बदले नजर आ रहे हैं. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने गुजरात में पूरी ताकत लगा दी है. दोनों पार्टी बीजेपी को घेरने के लिए मोरबी से लेकर मुख्यमंत्री चेहरे बार-बार बदलने और स्थानीय मुद्दों को उठा रही है. ऐसे में बीजेपी के लिए सियासी राह आसान नहीं दिख रही है.