scorecardresearch
 
Advertisement

MUDA स्कैम

MUDA स्कैम

MUDA स्कैम

मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण यानी MUDA  मैसूर शहर के विकास कार्यों के लिए यह अथॉरिटी स्वायत्त संस्था है. जमीनों के अधिग्रहण और आवंटन का कार्य प्राधिकरण की ही जिम्मेदारी है. आरोप लगया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Chief Minister Siddaramaiah) की पत्नी पार्वती की 3.16 एकड़ जमीन MUDA द्वारा अधिग्रहित की गई. इसके बदले में एक महंगे इलाके में 14 साइटें आवंटित की गईं. मैसूर के बाहरी इलाके केसारे में यह जमीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को उनके भाई मल्लिकार्जुन स्वामी ने 2010 में उपहार स्वरूप दी थी. आरोप है कि मुडा ने इस जमीन का अधिग्रहण किए बिना ही देवनूर तृतीय चरण की योजना विकसित कर दी (MUDA Scam).

जिन 14 साइटों का आवंटन मुख्यमंत्री की पत्नी के नाम पर हुआ उसी में घोटाले के आरोप लग रहे हैं. विपक्ष मुखर होकर कह रहा है कि पार्वती को MUDA द्वारा इन साइटों के आवंटन में अनियमितता बरती गई है.

सीएम सिद्धारमैया का भी यही दावा है कि, जमीन का यह टुकड़ा, जिसके लिए उनकी पत्नी को मुआवजा मिला था, वह उनके भाई मल्लिकार्जुन ने 1998 में गिफ्ट की थी, लेकिन RTI कार्यकर्ता कृष्णा ने आरोप लगाया कि मल्लिकार्जुन ने इसे 2004 में अवैध रूप से हासिल किया था और सरकारी और राजस्व अधिकारियों की मदद से जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके इसे रजिस्टर्ड कराया था. जमीन को 1998 में खरीदा गया दिखाया गया था, 2014 में जब सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे, तब  उनकी पत्नी पार्वती ने इस जमीन के लिए मुआवजे की मांग की थी.

जमीन घोटाले का यह मामला की शरुआत 2004 में हुई  यह मामला MUDA की ओर से उस समय मुआवजे के तौर पर जमीन के पार्सल के आवंटन से जुड़ा है. उस वक्त सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे. सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं. इससे सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान हुआ है. इस मामले में MUDA और राजस्व विभाग के आला अधिकारियों के नाम भी सामने आये हैं.

और पढ़ें

MUDA स्कैम न्यूज़

Advertisement
Advertisement