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मुहूर्त पूजा 2022

मुहूर्त पूजा 2022

मुहूर्त पूजा 2022

मुहूर्त पूजा 2022

मुहूर्त (Muhurat Puja 2022)  कैलेंडर में निमेश, काठ और कला के साथ समय के लिए माप की एक हिंदू इकाई है. मुहूर्त समय के विभाजन में एक दिन का 1/30, या 48 मिनट की अवधि होता है. मुहूर्त में "क्षण" का भाव भी सामान्य है. ऋग्वेद में केवल "क्षण" का ही अर्थ मिलता हैं (Muhurat Puja in Rigveda).

इसके अलावा प्रत्येक मुहूर्त को आगे 30 कला में विभाजित किया गया है, यानी भारतीय मिनट -1 कला = 1.6 पश्चिमी मिनट या 96 पश्चिमी सेकंड बनाते हुए होता है. प्रत्येक कला को आगे 30 काष्ठ यानी भारतीय सेकंड में विभाजित किया गया है - ये 1 काष्ठ 3.2 पश्चिमी सेकंड बनाते हैं (Muhurat Puja Kaal Division).

इस शब्द का "संधि विदछेद" इस प्रकार है- यह मुहूर्त को दो भागों में तोड़ता है, "मुहू" का मतलब पल या तत्काल और "एता" का मतलब आदेश होता है. 

हिंदू धर्म में किसी विशेष मुहूर्त की गुणवत्ता के आधार पर महत्वपूर्ण धार्मिक समारोहों का अनुष्ठान किया जाता है, जिसके लिए विशेष मुहूर्त पूजा की जाती है. अनुष्ठान और अन्य समारोह करते समय वैदिक शास्त्रों द्वारा एक या अधिक मुहूर्तों का समय होता है. दुर्गा पूजा के पहले दिन कलश स्थापना का एक खास मुहूर्त पूजा होती है, जिसके बाद नवरात्रि पूजा की शुरुआत होती है (Muhurat Puja 2022 in Durga Puja). इसी तरह दिवाली से एक दिन पहले धनतेरस में भी मुहूर्त पूजा की विशेषता है. दिवाली के शाम लक्ष्मी गणेश की पूजा भी खास समय और मुहूर्त देखर कर पूजा की जाती है ताकि पूजा का लाभ ज्यादा से ज्यादा मिल पाए (Muhurat Puja 2022 in Diwali).

भारत में वैदिक-हिंदू विवाह समारोह के लिए सबसे शुभ क्षण की गणना के लिए भी "मुहूर्त" का उपयोग होता है. ज्योतिषियों को अक्सर शादी के लिए एक पल की गणना करनी होती है ताकि किसी भी संभावित दैवीय स्रोत की समस्याओं को टाला जा सके. हिंदू धर्म में विवाह संस्कारों के साथ ही, जनेऊ संस्कारों में भी मुहूर्त पूजा की समान उपयोगिता है (Muhurat Puja Hindu Rituals).

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