नदव लैपिड (Nadav Lapid) एक इजराइली स्क्रीनराइटर और फिल्ममेकर हैं (Israeli Screenwriter and Filmaker). उन्हें उनकी फिल्म 'पुलिसमेन' और 'द किंडरगार्टन टीचर' के लिए जाना जाता है. उनकी फिल्म 'पुलिसमेन' को 2011 में लोकार्नो फेस्टिवल स्पेशल ज्यूरी पुरस्कार मिला था तो वहीं, फिल्म द किंडरगार्टन टीचर को 2014 इंटरनेशनल क्रिटिक्स वीक में प्रदर्शित किया गया था. लैपिड को 2016 के कान्स फिल्म फेस्टिवल के इंटरनेशनल क्रिटिक्स वीक सेक्शन के जूरी के सदस्य के रूप में शामिल किया गया था. फरवरी 2019 में 69वें बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में नदव लैपिड की फिल्म 'सिनोनिम्स' को गोल्डन बियर अवार्ड मिला था (Nadav Lapid Awards).
लैपिड का जन्म 8 अप्रैल 1975 को इजराइल के तेल अवीव में हुआ था (Nadav Lapid Age). वह एशकेनाजी यहूदी वंश से ताल्लुक रखते हैं. वह लेखक हैम लैपिड और फिल्म संपादक एरा लैपिड के बेटे हैं (Nadav Lapid Parents). उन्होंने तेल अवीव विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र का अध्ययन किया. इजराइल रक्षा बलों में काम करने के बाद वह पेरिस चले गए. फिर जेरूसलम में सैम स्पीगल फिल्म एंड टेलीविजन स्कूल में डिग्री हासिल करने के लिए वह वापस इजराइल लौट आए (Nadav Lapid Education).
उनके फिल्मों में, रोड (लघु फिल्म, 2005), एमिल्स गर्लफ्रेंड (2006), पुलिसमेन (2011), एम्युनिशन हिल (2013), द किंडरगार्टन टीचर (2014), वाई (2015), अ डायरी ऑफ अ वेडिंग फोटोग्राफर (2016), सिनोनिम्स (2019) और आहेद्स नी (2021) शामिल है (Nadav Lapid Movies).
नवंबर 202 में नदव लैपिड ने विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) की फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' (The Kashmir Files) को लेकर विवादित बयान दिया था, जिसके कारण वह चर्चा में रहे थे (Nadav Lapid Controversial statement on Hindi Film).
IFFI के जूरी हेड नदव लैपिड फिल्म कश्मीर फाइल्स पर दिए अपने बयान पर कायम हैं. उन्होंने कहा- मैंने वो सब कहा जो मुझे कहना था. मैं इंडियन नहीं हूं. इस बारे में बात करते हुए मुझे असहज महसूस नहीं होता. मैंने खुद को एक निश्चित जगह पर एक निश्चित स्थिति में पाया. मैंने वही किया जो मुझे लगा किया जाना चाहिए.
इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) 2022 के जूरी प्रमुख नदव लैपिड (Nadav Lapid) के खिलाफ जम्मू में कश्मीरी पंडितों ने बुधवार को जमकर प्रदर्शन किया. नदव लैपिड ने फिल्म द कश्मीर फाइल्स को प्रोपेगेंडा और वल्गर बताया है. इसी के बाद वह लोगों के निशाने पर आ गए हैं. वहीं आजतक से बात करते हुए उन्होंने एक बार फिर अपने दिए गए बयान को सही ठहराया है.
नदाव लपिड गोवा में हुए International Film Festival की जूरी के चेयरपर्सन थे. बड़ी बात ये है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान जिन 15 फिल्मों का चयन करना था, उनमें 12 फिल्में दूसरे देशों में बनी थी, जबकि तीन फिल्में भारत की थी. ये सारा विवाद यहीं से शुरू हुआ. देखें वीडियो
द कश्मीर फाइल्स को वल्गर प्रोपेगेंडा बताकर नदव लैपिड मुश्किल में फंस गए हैं. अनुपम खेर ने इंडिया टुडे से बातचीत में उन्हें दिमागी रूप से बीमार बताया. अनुपम ने कहा कि उन्हें हर प्लेटफॉर्म पर जूते खाने की आदत है. वो ऐसे ही स्टेटमेंट देता है, उसे जूते पड़ते होंगे हर जगह.