NASA
नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) अमेरिकी सरकार की एक स्वतंत्र एजेंसी है (American Agency NASA). यह सिविलियन स्पेस प्रोग्राम के साथ एरोनॉटिकल्स और स्पेस रिसर्च के लिए काम करती है.
नासा की स्थापना 1958 में हुई थी (Establishment Date of NASA), जो एरोनॉटिक्स (Aeronautics) के लिए राष्ट्रीय सलाहकार समिति (NACA) के तहत काम करती है. इसकी स्थापना के बाद से, अधिकांश अमेरिकी अंतरिक्ष अन्वेषण प्रयासों का नेतृत्व नासा ने किया है, जिसमें अपोलो मून लैंडिंग मिशन, स्काईलैब स्पेस स्टेशन और बाद में स्पेस शटल शामिल हैं. नासा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को सपोर्ट करता है. साथ ही, ओरियन अंतरिक्ष यान, अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणाली, कमर्शियल क्रियू वेहिकल्स और ल्यूनर गेटवे स्पेस स्टेशन के विकास की देखरेख करता है (NASA Works).
नासा का अध्ययन पृथ्वी अवलोकन प्रणाली के माध्यम से पृथ्वी को बेहतर ढंग से समझने पर केंद्रित है. इसका साइंस मिशन निदेशालय के हेलियोफिजिक्स अनुसंधान कार्यक्रम के माध्यम से हेलियोफिजिक्स को आगे बढ़ाना, न्यू होराइजन्स जैसे उन्नत रोबोटिक अंतरिक्ष यान के साथ पूरे सौर मंडल में निकायों की खोज और खगोल भौतिकी विषयों पर शोध करना है- जैसे कि बिग बैंग, ग्रेट ऑब्जर्वेटरीज और संबंधित कार्यक्रम (Science Research of NASA).
नासा ने कई स्पेस प्रोजेक्ट्स पर काम किए हैं उनमें X-15 प्रोग्राम, प्रोजेक्ट मर्करी, प्रोजेक्ट जेमिनी और प्रोजेक्ट अपोलो प्रमुख हैं (Projects of NASA).
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अंतरिक्ष में एक नई सैटेलाइट लॉन्च कर दी है. यह सैटेलाइट 26 फरवरी को अमेरिका के फ्लोरिडा से लॉन्च की गई है. यह सैटेलाइट चंद्रमा पर पानी का पता लगाएगी. नासा ने इस मिशन को SpaceX Falcon 9 नाम दिया है. चंद्रमा की सतह पर काफी लंबे समय से पानी की खोज की जा रही है. ऐसे में नासा का यह नया मिशन काफी सुर्खियों में है.
SpaceX Falcon 9 रॉकेट ने केप कैनावेरल में कैनेडी स्पेस सेंटर से नासा के लूनर ट्रेलब्लेज़र ऑर्बिटर को लेकर उड़ान भरी. लूनर ट्रेलब्लेज़र अंतरिक्ष यान को लॉकहीड मार्टिन के LMT.N स्पेस डिवीजन द्वारा बनाया गया था.
बीते कई हफ्तों से ऐसा कहा जा रहा था कि क्षुद्रग्रह 2024 YR4 2032 में पृथ्वी से टकराने वाला है. इसे लेकर वैज्ञानिकों के बीच काफी चिंता जताई जा रही थी लेकिन अब नासा के खगोलविदों ने राहत भरी खबर दी है.
धरती से लाखों किलोमीटर दूर स्पेस में इंसान की जिंदगी बिल्कुल अलग होती है. एक ऐसी जगह, जहां जीरो ग्रेविटी में रोजमर्रा के काम भी चुनौती बन जाते हैं. ब्रश करना, नहाना, यहां तक कि पानी पीना भी आसान नहीं होता. अक्सर अंतरिक्ष यात्री ऐसे वीडियो शेयर करते हैं, जिनमें स्पेस स्टेशन की डेलीलाइफ दिखती है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना पद संभालने के बाद Elon Musk को दोनों एस्ट्रोनॉट्स को वापस धरती पर लाने की जिम्मेदारी दी थी. उन्होंने ने मस्क से कहा था कि दोनों एस्ट्रोनॉट्स को जल्द से जल्द पृथ्वी पर वापस लाया जाए.
भारतीय मूल की नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स पिछले साल से ही अंतरिक्ष में फंसी हुई हैं. इसी बीच उन्होंने अपने सह अंतरिक्ष यात्री के साथ मिलकर स्पेस वॉक कर नया कीर्तिमान रच दिया. इसी के साथ विलियम्स सबसे ज्यादा स्पेस वॉक करने वाले अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल हो गई हैं.
नासा वैज्ञानिकों ने एक ऐसे एस्टेरॉयड का पता किया है जो 2032 में पृथ्वी से टकरा सकता है. जैसे-जैसे वैज्ञानिक इसके बारे में पता करेंगे, वैसे यह बात भी पुख्ता होती जाएगी कि यह कितने नजदीक से जाएगा या टकराएगा. टकराने की कितने प्रतिशत संभावना है.
नासा ने एक ऐसे एस्टेरॉयड से सैंपल कलेक्ट किया है जो बेहद हैरान करने वाला है. यह सैंपल ऐसा है जिसमें डीएनए और आरएनए के 5 न्यूक्लियोबेसेस और प्रोटीन में पाए जाने वाले 20 अमीनो एसिड में से 14 मौजूद है. क्या धरती पर जीवन एक एस्टेरॉयड से आया? अगर ऐसा है तो क्या इंसान एलियन है?
'चांद के पार चलो...', इस गाने को भले एक प्रेमगीत के रूप में लिखा गया है. लेकिन इसके शब्द एक रहस्य की ओर भी इशारा करते हैं. ये रहस्य है अंतरिक्ष का, हमारी अनंत आकाश गंगा का. आज का मनुष्य न सिर्फ इस भेद को जानने समझने की कोशिश कर रहा है बल्कि स्वयं उस मुकाम तक जाना चाहता है. इसके लिए दुनिया के दो धनाढ्य उद्योगपतियों एलन मस्क और जेफ बेजोस के बीच रेस चल रही है. विज्ञान के करामात और डॉलर के भंडार के दम पर ये दोनों उत्साही बिजनेसमैन दुनिया को अंतरिक्ष की सैर कराना चाहते हैं.
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का स्पेसक्राफ्ट पार्कर सोलर प्रोब (Parker Solar Probe) ने क्रिसमस की पूर्व संध्या पर इतिहास बनाया है. उसने सूरज के सबसे नजदीक जाने का रिकॉर्ड बनाया है.
एक छोटी कार के आकार का पार्कर सोलर प्रोब सूरज के सबसे नजदीक से गुजरने वाली पहली इंसानी वस्तु बन चुका है. नासा का यह यान सूरज की सतह से 61 लाख km दूर से निकला. अब वैज्ञानिकों को इस बात का इंतजार है कि ये जिंदा बचा या नहीं. इसका पता कुछ दिन बाद ही चल पाएगा.
दशकों से ये माना जा रहा था कि बृहस्पति ग्रह के बर्फीले चांद यूरोपा की बर्फ की मोटी चादरों के नीचे जीवन होगा. लेकिन ये परत इतनी मोटी है कि जीवन की उम्मीद भी बेकार हो चुकी है. बर्फ इस मोटी परत के नीचे नमकीन पानी का समंदर है.
Sunita Williams अब अगले साल फरवरी में धरती पर नहीं लौटेंगी. उन्हें लौटने में करीब एक महीने का समय और लगेगा. इसकी वजह है SpaceX के Dragon कैप्सूल में तकनीकी दिक्कत. जून 2024 में 10 दिन की यात्रा पर गई सुनीता की यात्रा अब दस महीने के लिए हो चुकी है.
SpaceX के ड्रैगन कैप्सूल में तकनीकी दिक्कत की वजह से अब सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर फरवरी 2025 के बजाय मार्च के अंत तक धरती पर वापस आएंगे. क्योंकि अगले मिशन के लिए स्पेसएक्स नया ड्रैगन कैप्सूल बना रहा है, जिसमें थोड़ा समय लगेगा.
X (पुराना टि्वटर) हैंडल पर एक वीडियो पसंद किया जा रहा है. जिसमें स्पेस स्टेशन के पीछे से एक रोशनी वाली चीज जाती दिख रही है. दावा है कि जैसे ही ये चीज दिखाई दी नासा ने लाइव फीड काट दिया. दो ट्विटर हैंडल ने दावा किया है कि ये एलियन यूएफओ (Alien UFO) है. देखिए वीडियो...
NASA ने मंगल ग्रह पर इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर उड़ाया. इस हेलिकॉप्टर की इस साल अपनी 72वीं उड़ान के समय हार्ड लैंडिंग हो गई थी. तब से ये सवाल उठ रहा था कि क्या इंजीन्यूटी की जिंदगी खत्म हो गई. काफी जांच-पड़ताल के बाद ये पता चला है कि इंजीन्यूटी को दूसरी जिंदगी मिल गई है. वो मंगल पर दूसरा काम करेगा.
NASA ने मंगल ग्रह पर इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर उड़ाया. इस हेलिकॉप्टर की इस साल अपनी 72वीं उड़ान के समय हार्ड लैंडिंग हो गई थी. तब से ये सवाल उठ रहा था कि क्या इंजीन्यूटी की जिंदगी खत्म हो गई. काफी जांच-पड़ताल के बाद ये पता चला है कि इंजीन्यूटी को दूसरी जिंदगी मिल गई है. वो मंगल पर दूसरा काम करेगा.
ट्रंप ने पैसे देकर स्पेसवॉक करने वाले अरबपति कारोबारी को बनाया NASA चीफ, जानिए कौन हैं जेरेड इसाकमैन जिनकी नियुक्ति पर उठ रहे सवाल
धरती के चारों तरफ 14 हजार सैटेलाइट्स चक्कर लगा रहे हैं. उनके साथ घूम रहे हैं 12 करोड़ अंतरिक्ष का कचरा. वो भी धरती की निचली कक्षा यानी लोअर अर्थ ऑर्बिट में. संयुक्त राष्ट्र इस बात से परेशान है कि कहीं अंतरिक्ष में इनकी वजह से जाम न लग जाए. इससे भयानक परिणाम होंगे. खतरा बढ़ेगा.
ISRO ने खुशखबरी दी है. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर भेजे जाने वाले गगनयात्रियों के पहले चरण की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है. जल्दी उन्हें एडवांस ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा. यह इसरो-नासा का ज्वाइंट मिशन है. जिसमें मिशन पायलट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और बैकअप ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर शामिल हैं.
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर रूसी यान के आते ही एक रहस्यमयी जहरीली दुर्गंध फैल गई. जिसकी वजह से रूसी यान के दरवाजे यानी हैच को बंद करना पड़ा. इसी यान ने स्पेस स्टेशन को पिछले कुछ दिनों में दो बार अंतरिक्ष के कचरे से बचाया था. लेकिन अब इस विचित्र गंध की वजह भी बना हुआ है.