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निकाह

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इस्लाम में, निकाह (Nikah) दो लोगों के बीच एक संबंध है, जिसमें दूल्हा और दुल्हन दोनों को अपनी मर्जी से शादी के लिए मंजूरी देनी होती है. इसे एक औपचारिक या एक अनुबंध के तहत पूरा किया है. निकाह में दूल्हा और दुल्हन अपनी मंजूरी देते हुए 'कबूल है' कहते है. इसको धार्मिक रूप से मान्य इस्लामी विवाह का अभिन्न अंग माना जाता है और दूल्हे और दुल्हन के अधिकारों और जिम्मेदारियों की रूपरेखा तैयार करता है (Nikah Rituals). 

निकाह  में मेहर दिया जाता है, जो शादी के दहेज या उपहार से अलग है. यह मुस्लिम विवाह के लिए अनिवार्य है. मेहर दूल्हा अपनी दुल्हन को देता है. मेहर की राशि या संपत्ति का भुगतान शादी के समय दुल्हन को उसके विशेष उपयोग के लिए दिया जाता है (Nikah and Mahr). 

निकाह का कॉन्ट्रैक्ट दूल्हा और दुल्हन की वली यानी अभिभावक के बीच होता है. दुल्हन की वली आमतौर पर दुल्हन के पिता या एक पुरुष रिश्तेदार होता है (Nikah contract). 

शरिया कानून के अनुसार, मुसलमानों को बहुविवाह की अनुमति है. कुरान के अनुसार, एक आदमी की चार कानूनी पत्नियां तभी हो सकती हैं, जब गैर-विवाहित अनाथ लड़कियों के साथ अन्याय होने का डर हो. फिर भी, पति को सभी पत्नियों के साथ समान व्यवहार करना आवश्यक है. साथ ही दूसरी शादी करने के लिए अपनी पत्नी से सहमति लेनी होती है (Nikah and Polygyny).

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