इस्लामिक सहयोग संगठन (Organisation of Islamic Cooperation), एक अंतर-सरकारी संगठन है. पहले इसका नाम इस्लामिक सम्मेलन का संगठन था. इसकी स्थापना 1969 में हुई थी (Foundation of OIC). इस संगठन में 57 सदस्य राज्यों में से 48 मुस्लिम बहुल देश शामिल है (Members of OIC).
संगठन का कहना है कि यह 'मुस्लिम दुनिया की सामूहिक आवाज. है और 'अंतर्राष्ट्रीय शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने की भावना से मुस्लिम दुनिया के हितों की रक्षा और सुरक्षा' के लिए काम करता है (OIC quotes).
ओआईसी के पास संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के स्थायी प्रतिनिधिमंडल हैं. ओआईसी की आधिकारिक भाषाएं अरबी, अंग्रेजी और फ्रेंच हैं (Languages use in OIC). यह ओआईसी चार्टर के ढांचे के भीतर विभिन्न संबद्ध, विशेष और सहायक अंगों को बनाए रखता है. 2015 तक सदस्य राज्यों की सामूहिक जनसंख्या 1.8 बिलियन से अधिक थी, यानी दुनिया की आबादी के एक चौथाई से कम. इनके पास सामूहिक क्षेत्र 31.66 वर्ग किमी है (Area of OIC).
UNHCR के अनुसार, OIC देशों ने 2010 के अंत तक 18 मिलियन शरणार्थियों की मेजबानी की. तब से OIC सदस्यों ने सीरिया में विद्रोह सहित अन्य संघर्षों से शरणार्थियों को सहारा दिया है. मई 2012 में, ओआईसी ने अशगबत, तुर्कमेनिस्तान में 'मुस्लिम विश्व में शरणार्थियों' सम्मेलन में इन चिंताओं को संबोधित किया था (Refugees with OIC).
गाजा में इजरायल की गोलीबारी से भागकर फिलिस्तीनियों ने दक्षिणी शहर रफाह में शरण ली थी लेकिन वहां भी उनकी जान सुरक्षित नहीं है. रविवार से ही इजरायल रफाह में हवाई हमले कर रहा है जिसमें विस्थापितों की जान जा रही है. इस हमले पर अरब लीग और इस्लामिक देशों का संगठन ओआईसी कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं.
57 इस्लामिक देशों के संगठन इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चिंता व्यक्त की. इस पर भारत की प्रतिक्रिया आई है. भारत ने ओआईसी के बयान को खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय ने बिना नाम लिए पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा कि मानवाधिकारों के सिलसिलेवार उल्लंघनकर्ता और सीमा पार आतंकवाद के प्रमोटर के इशारे पर ओआईसी की भूमिका संदिग्ध बनाता है.
भारत की नरेंद्र मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया था जिसके खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सुनवाई की है. कोर्ट ने भी सरकार के फैसले को सही ठहरा दिया है जिसके बाद इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी ने इस पर चिंता जताई है.
57 इस्लामिक देशों के संगठन इस्लामिक सहयोग संगठन ने स्वीडन के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है. अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला देते हुए पिछले महीने स्वीडन में कुरान जलाने की अनुमति दी गई थी. इस महीने एक बार फिर कुरान के अपमान की अनुमति दिए जाने से मुस्लिम देशों में भारी नाराजगी है.
स्वीडन के स्टॉकहोम सेंट्रल मस्जिद के सामने कुरान जलाए जाने की घटना को इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन ने पवित्र कुरान और अन्य इस्लामी मूल्यों, प्रतीकों उसकी पवित्रता का उल्लंघन का प्रयास बताया था. ओआईसी की टिप्पणी के बाद स्वीडिश सरकार ने कुरान जलाए जाने की घटना पर प्रतिक्रिया दी है.
स्वीडन में कुरान जलाए जाने की घटना ने मुस्लिम देशों को भड़का दिया है. मुस्लिम देशों के संगठन ने इसे लेकर रविवार को एक आपात बैठक बुलाई. बैठक में ओआईसी के महासचिव हिसैन ब्राहिम ताहा ने कुरान जलाए जाने की कड़ी निंदा की.
स्वीडन में बकरीद के मौके पर कुरान जलाए जाने की घटना को ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन' (OIC) ने पवित्र कुरान और अन्य इस्लामी मूल्यों, प्रतीकों और पवित्रता का उल्लंघन करने का प्रयास बताया है. स्वीडन में बुधवार को स्टॉकहोम सेंट्रल मस्जिद के सामने सलवान मोमिका नाम के शख्स ने कुरान जलाकर प्रदर्शन किया था.